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सूरत की 18 सीटों पर मुकाबला, 16 पर पिछले चुनाव के मुकाबले 2.93% कम वोटिंग

गुजरात विधानसभा के चुनाव के पहले चरण शहर में सबसे ज्यादा पाटीदार इलाके में हुई वोटिंग।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 10, 2017, 05:01 AM IST

सूरत की 18 सीटों पर मुकाबला, 16 पर पिछले चुनाव के मुकाबले 2.93% कम वोटिंग

सूरत.गुजरात विधानसभा के चुनाव के पहले चरण का मतदान के दौरान शनिवार को सूरत की 16 सीटों 66.65 प्रतिशत मतदान हुआ। पिछले चुनाव के मुकाबले इस चुनाव में 2.93 प्रतिशत वोटिंग कम हुई है। 2012 के चुनाव में सूरत जिले में 69.58 प्रतिशत मतदान हुआ था। 2017 के चुनाव में 2.93 प्रतिशत कटौती के साथ जिले का कुल मतदान 66.65 प्रतिशत दर्ज किया गया। शहर की 12 सीटों पर सुबह 8 बजे शुरू हुआ मतदान शुरुआत में धीमा चला, लेकिन दोपहर तक मतदान में तेजी आई। शहर की अपेक्षा जिले की चार सीटों पर ज्यादा मतदान हुआ। सबसे ज्यादा मतदान 78.89 प्रतिशत मांडवी में दर्ज किया गया।

शहर की 12 सीटों पर 55 से 69 प्रतिशत मतदान

- मांडवी सीट पर भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। उसके बाद महुवा में 76.62, मांगरोल में 75.76 प्रतिशत और बारडोली में 71.37 मतदान हुआ। शहर की 12 सीटों पर 55 से 69 प्रतिशत मतदान हुआ। वराछा में 62.95 प्रतिशत और करंज में 55.77 प्रतिशत वोटिंग हुई।

- इसके बाद चौर्यासी में 60.97, मजूरा में 61.93, लिंबायत में 65.33, ओलपाड में 67.25 प्रतिशत और सूरत पश्चिम में 67.49 प्रतिशत मतदान हुआ है।

दक्षिण गुजरात की बात करें तो नवसारी में 76, वलसाड में 70, तापी में 73, भरूच में 71, नर्मदा में 73 और डांग में 70 प्रतिशत मतदान हुआ। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार सूरत में कम वोटिंग हुई।


चुनाव आयोग और पार्टियों का प्रयास भी नहीं ला पाया रंग
इस बार के चुनाव में भाजपा कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक पार्टियों एवं निर्दलीय प्रत्याशी भी जोर शोर से प्रचार अभियान मे जुटे थे। सोशल मीडिया पर भी मतदाताओं को भारी संख्या में मतदान करने के लिए प्रेरित किया गया। चुनाव आयोग ने भी मतदान बढ़ाने के लिए कई पहल की। लेकिन सभी प्रयासों के बाद सूरत जिले के वोटिंग प्रतिशत में कमी आई है।

मतदाताओं के नाराज होने की वजह से कम हुआ इस बार मतदान
- ओलपाड विधानसभा क्षेत्र में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार 3.53 प्रतिशत मतदान में कमी आई। भाजपा ने मुकेश पटेल को रिपीट किया था, लेकिन कांग्रेस ने राजपूत समाज से योगेश बाकरोला को टिकट दिया था। 45 प्रतिशत मतदाता कोली पटेल समाज से हैं।

- कांग्रेस द्वारा कोली पटेल को टिकट नहीं देने से ग्रामीण इलाकों मे मतदान कम हुआ। राज्य सरकार के वनमंत्री गणपत वसावा की सीट मांगरोल पर पिछले चुनाव के मुकाबले मे 4.39 प्रतिशत मतदान कम हुआ है।

- दिसंबर मे वोटिंग होने से इस इलाके से मजदूरी के लिए अन्य जगहों पर गए लोग मतदान से वंचित रहे। कांग्रेस ने इस बैठक पर अपने ही प्रत्याशी को हराने की अपील कार्यकर्ताओं से की थी। छोटू वसावा की पार्टी बीटीएस से गठबंधन से विवाद हुआ था, जिससे मतदाताओं में उत्साह की कमी देखी गई।

प्रत्याशी बदलने से असर

कामरेज विधानसभा क्षेत्र में 1.25 लाख मतदाता पाटीदार समाज के हैं। आरक्षण आंदोलन के चलते मतदाताओं का उत्साह कम होता दिखाई दे रहा था। कांग्रेस के प्रत्याशी दो बार बदलने से वोटिंग पर असर हुआ है। सूरत उत्तर में मूल सूरतियों की संख्या ज्यादा है। इस सीट पर एक ही समाज के दो प्रत्याशी आमने-सामने थे। विधायक का टिकट कटने से असर पड़ा।

नए चेहरे का फायदा नहीं

वराछा में भाजपा और कांग्रेस ने नए चेहरों को मौका दिया है। प्रत्याशी नए होने से मतदाताओं को आकर्षित करने में विफल रहे। भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं की जनसभा का अभाव भी एक कारण माना जा रहा है। सूतर पश्चिम में 90 प्रतिशत मतदाता पाटीदार समाज के हैं।

मतदाताओं में निराशा

करंज सीट पर पिछले चुनाव के मुकाबले 8.79 प्रतिशत मतदान कम हुआ है। भाजपा के बागी भीमजी पटेल ने निर्दलीय उम्मीदवारी की थी। भाजपा एवं कांग्रेस ने नए चेहरे को टिकट दिया था। मतदाताओं की निराशा स्पष्ट सामने आई है और वोटिंग कम हुई। लिंबायत में पाटिल एवं मुस्लिम मतदाता ज्यादा हैं। पिछले चुनाव के मुकाबले यहां 1.48 प्रतिशत मतदान कम हुआ।

नाराजगी बनी वजह

हिंदीभाषी मतदाताओं की प्रभुत्व वाली उधना सीट पर भाजपा और कांग्रेस से टिकट की मांग हो रही थी, लेकिन नहीं मिलने से वोटिंग पर इसका असर देखने को मिल रहा है। पिछले चुनाव के मुकाबले मे 2 प्रतिशत मतदान कम हुआे। कतारगाम में भी इस बार 3.65 प्रतिशत मतदान कम हुआ।

सूरत जिले की 16 विधानसभा सीटों पर हुआ मतदान

- जेएच अंबानी स्कूल के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं और कपड़ा कारोबारी जिनेश जैन, अनुराग कोठारी के बीच नोकझोंक हुई। मतदान करने के बाद जिनेश जैन अपने दोस्तों के साथ खड़े थे तब वहा अनुराग कोठारी आए। उस समय गरवी गुजरात गरवी राजस्थान का वीडियो बनाने के दौरान उन्होंने जिनेश जैन को वीडियो से बाहर कर दिया।
- मजूरा के उमरा पोलिंग बूथ पर ईवीएम मशीन में खराबी के कारण बुजुर्ग मतदाताओं को 35 मिनट खड़े रहना पड़ा।
- भटार स्थित शिशु विहार प्राथमिक शाला परिसर में सुबह 9-30 बजे तक किसी भी मीडियाकर्मी को प्रवेश करने नहीं दिया। नवसारी सांसद सीआर पाटिल के आने के बाद सभी को एंट्री दी गई। मीडिया कर्मियों में रोष देखने को मिला।
- मतदान के कारण सिविल और स्मीमेर अस्पतालों में मरीज की संख्या काफी देखी गई। सबसे ज्यादा कमी इमरजेंसी मरीजों की संख्या में दिखी। डॉक्टरों का कहना है कि मतदान के कारण ज्यादातर लोग घर से बाहर नहीं निकलते।

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Web Title: surt ki 18 siton par mukablaa, 16 par pichhle chunaav ke mukable 2.93% km votinga
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