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गर्मी बढ़ते ही पर्वत की चोटी से नीचे उतरने लगे हैं शेर, मौसम के साथ बदल जाती है खुराक

गर्मी से बचने के लिए शेर प्रजातियां जंगल छोड़कर आसपास के इलाकों में पेड़ों के नीचे आश्रय ले रही हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Mar 30, 2018, 06:25 AM IST

  • गर्मी बढ़ते ही पर्वत की चोटी से नीचे उतरने लगे हैं शेर, मौसम के साथ बदल जाती है खुराक
    चोटी से नीचे उतरते शेर।

    तालाला(सूरत).गर्मी शुरू होते ही गिर जंगल के वन्य जीव परेशान हो जाते हैं। शीत ऋतु में ठंडी से बचने के लिए पर्वत की चोटी पर चढ़कर धूप का आनंद लेने वाले शेर अब गर्मी का पारा जैसे-जैसे ऊपर चढ़ने लगा है वैसे-वैसे नीचे उतरने लगे हैं। गर्मी से बचने के लिए शेर प्रजातियां जंगल छोड़कर आसपास के इलाकों में पेड़ों के नीचे आश्रय ले रही हैं।

    मौसम के साथ शेरों की खुराक भी बदल जाती है

    - गर्मी में गिर जंगल अौर आसपास के पीएफ एरिया में घूमने वाले शेरों का खुराक भी कम हो जाता है। शेर दिन में शिकार नहीं करते हैं और घने पेड़ों वाले इलाकों की ओर चले जाते हैं।
    - गिर जंगल के पास अभरामपरा गांव के किसान कमल नसीत ने बताया कि प्रचंड गर्मी से शेर परेशान हो जाते हैं। गर्मी में पहाड़ों पर उगे पेड़, झाड़ियां सब सूख जाती हैं। दूर-दूर तक शेरों को पानी नहीं मिलता है। इससे परेशान होकर वे पर्वत से नीचे तलहटी में चले आते हैं।
    - शेर, तेंदुआ जैसे मांसाहारी प्राणियों का गर्मी में खुराक कम हो जाता है। जंगली जानवर जहां पानी होता है वहीं आसपास के घने जंगलों में रहना ज्यादा पसंद करते हैं।
    - गर्मी के मौसम में शेर गिर जंगल के सीमावर्ती गांवों तक पहुंच जाते हैं। रात में गर्मी कम होने पर शेर गांवों में गाय, भैंस, बकरी जैसे दुधारू पशुओं का शिकार करते हैं और दिन होने से पहले ही गांव छोड़कर फिर जंगल में चले जाते हैं। - जैसे-जैसे सर्दी या गर्मी बढ़ती है वैसे-वैसे शेरों के शिकार और रहने की व्यवस्था भी बदलती रहती है।

    शेरों के संरक्षण में प्रदेश नाकाम : केग

    - मार्च 2007 में 7 शेरों के शिकार के बाद यह साबित हो जाता है कि गुजरात सरकार शेरों के संरक्षण के मामले में पूरी तरह से नाकामयाब रही। यह जानकारी केग की रिपोर्ट में दी गई है।
    - रिपोर्ट में कहा गया है कि शेरों का शिकार न हो, इसके लिए आधुनिक टेक्नाेलॉजी के उपयोग की संभावना को तलाशने के लिए एक टास्क फोर्स की रचना 2007 में की गई।
    - इस फोर्स को कितनी ही सहायता नहीं दी गई और कितनी ही योजना में कई कंपनी से करार किया गया है। फोरेंसिक मोबाइल यूनिट की खरीदी में निरर्थक खर्च किया गया है।
    - शेर रेलवे लाइन तक न पहुंचें, इसके लिए लाइन के दोनों ओर फेंसिंग तार लगाया गया था, जिस पर 25.35 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसके बाद भी शेर 8 बार फेसिंग पार कर चुके हैं। यह सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।

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