--Advertisement--

कार के सनरूफ से शहर देख रही थी बच्ची, मांझे से कट गया गला, 4 दिन बाद मौत

गला कटने के कारण फातेमा कार के अंदर ही गिर पड़ी। गले से खून निकलता देख उसके परिजन घबरा गए।

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 08:00 AM IST
ग्राफिक्स : लक्ष्मीकांत पाटिल ग्राफिक्स : लक्ष्मीकांत पाटिल

सूरत. कार के सनरूफ से सिर बाहर निकालकर शहर को निहार रही 5 साल की बच्ची का गला मांझे से कट गया। घायल बच्ची को तत्काल उधना दरवाजा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चार दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही इस बच्ची की गुरुवार की रात मौत हो गई।

पिता ने कहा-फातेमा हमें छोड़ चली गई

- फातेमा नाम की यह बच्ची मांडवी के हथूरण की रहने वाली थी। वह 31 दिसंबर को अपने परिवार के साथ सूरत में शॉपिंग करने आई थी। बच्ची और उसका परिवार उधना दरवाजा पहुंचा था, तभी यह हादसा हुआ।

- उसके किसान पिता यूनुस करोडिया ने बताया कि 31 दिसंबर को पत्नी और तीनों बेटियों के साथ सूरत शहर शॉपिंग करने के लिए गए थे।

- वे घर वापस लौट रहे थे, उधना दरवाजा के पास जब वह फ्लाईओवर ब्रीज से गुजरने के दौरान पतंग के मांझे से मेरी बेटी का गला कट गया। उसे बचाने की बहुत कोशिश की गई, लेकिन वह हमें छोड़कर चली गई।

- पुलिस ने अाकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर फातेमा के शव को पोस्टमोर्टम के लिए भेज दिया। सिविल अस्पताल में बच्ची के शव का पोस्टमोर्टम कराया गया। पोस्टमार्टम करने वाले सिविल के सीएमओ डॉ. सीएस शर्मा ने बताया कि बच्ची के गले के दाहिनी तरफ 18 सेंटीमीटर घाव था। गले की त्वचा, पसा, मशल्स और नसें कट गई थीं।

चार दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही बच्ची
पतंग के मांझे से फातेमा का गला कटने के कारण वह कार के अंदर ही गिर पड़ी। उसके गले से खून निकलता देख उसके परिजन घबरा गए। फातेमा की मां ने तत्काल उसके गले पर रुमाल बांध दिया। घबराहट में यूनुस यह भी भूल गए कि अस्पताल कहां है। कुछ देर तक वह मदद मांगते रहे। लोगों ने उन्हें अस्पताल के बारे में बताया। वह तत्काल फातेमा को उधना दरवाजा के निजी अस्पाताल में ले गए। निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने फातेमा को बचाने की चार दिनों तक कोशिश की, लेकिन गुरुवार की रात जिंदगी उसका साथ छोड़ गई।

चाइनीज मांझे पर बैन, देसी पर क्यों नहीं?
सूरत में पुलिस ने चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन देसी मांझे के बारे में अभी तक कोई गाइडलाइंस जारी नहीं की गई है। सूरत में कई जगहों पर चाइनीज मांझे की तर्ज पर मांझा बनाया जा रहा है। इस स्थानीय मांझे में भी कांच का इस्तेमाल हो रहा है। यह स्थानीय मांझा भी चाइनीज मांझे की तरह खतरनाक है। इस मांझे की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है, लेकिन अभी तक इस बारे में प्रशासन की तरफ से संज्ञान नहीं लिया गया है।

पतंग के मांझे से हो चुकी हैं 5 साल में 8 लोगों की मौत

पिछले पांच साल में मांझे की चपेट में आने से 8 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा कई वाहन चालक घायल भी हो चुके हैं। मांझे से होने वाली घटनाओं के लिए सूरत में हेल्पलाइन शुरू की गई है। इसके अलावा दो एंबुलेंस तैनात की गई हैं। हर साल पतंग उत्सव के दौरान तीन दिनों में लगभग 50 कॉल आते हैं। नर्सिंग एसोसिएशन और सहस्त्रफड पार्श्वनाथ चेरिटेबल ट्रस्ट की मदद से यह सुविधा शुरू की गई है।