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ब्लाइंडनेस के बाद बचपन में पढ़ाई छोड़ बने मजदूर, 17 की उम्र में शुरू की पढ़ाई, आज कोर्ट में वकील

अब भी किसी क्लाइंट को उन पर भरोसा नहीं होता, लेकिन बात शुरू होने के बाद धीरे-धीरे उनका शक दूर हो जाता है।

जिज्ञासा सोलंकी | Last Modified - Feb 05, 2018, 05:18 AM IST

ब्लाइंडनेस के बाद बचपन में पढ़ाई छोड़ बने मजदूर, 17 की उम्र में शुरू की पढ़ाई, आज कोर्ट में वकील

सूरत.आंध्रप्रदेश के रहने वाले सत्यनारायण वरनाला के साथ जिंदगी ने इतना खिलवाड़ किया, लेकिन उन्होंने अपने जुनून से किस्मत को भी पटखनी दे दी। बार-बार मुसीबत आने से ज्यादातर लोग हिम्मत छोड़ उसे ही अपनी तकदीर मान लेते हैं, पर सत्यनाराण हिम्मत हारने वाले नहीं। किस्मत ने उनकी एक-एक कर दोनों आंखें छीन लीं। तीसरी के बाद पढ़ाई छोड़ मजदूर भी बनना पड़ा। फिर 17 की उम्र में पहली से पढ़ाई शुरू की और आज वे कोर्ट में वकालत कर रहे हैं।

बचपन में एक आंख में रोशनी नहीं थी, हादसे में दूसरी भी गंवाई

जब उनका जन्म हुआ तो ऊपर वाले ने एक आंख में रोशनी ही नहीं दी। फिर भी आंध्र प्रदेश में ही पढ़ाई शुरू की और 10 की उम्र में तेलुगू में क्लास 3 तक पढ़ाई की। तभी पूरा परिवार आंध्र छोड़ सूरत आ गया। यहां भाषा ने ऐसी बाधा पैदा की कि सत्यनारायण दोबारा पढ़ ही न सका। पिता ने अपने और बाकी दो बेटों के साथ सत्यनारायण को भी पावरलूम में काम पर लगा दिया। अगले छह साल तक जिंदगी यूं ही चलती रही और शायद चलती भी रहती। लेकिन, तभी 16 साल की उम्र में एक हादसा हुआ और दूसरी आंख भी खराब हो गई। पढ़ाई तो पहले ही छूट गई, अब काम भी छूट चुका था। जिंदगी में अचानक अंधेरा छा गया।

सातवीं तक पढ़ने के बाद सीधे 10वीं और फिर 11वीं, 12वीं

एक दोस्त के पिता ने बातों ही बातों में फिर पढ़ाई शुरू करने की सलाह दे डाली और सत्यनारायण को यह जंच गई। 17 की उम्र में फिर से क्लास वन की पढ़ाई शुरू की। अहमदाबाद के वस्त्रापुर ब्लाइंड स्कूल में ब्रेल लिपि में एडमिशन लिया। सातवीं तक पढ़ने के बाद सीधे 10वीं का एग्जाम पास कर लिया। इसके बाद सूरत की ही रेसकोर्स स्थित अंधजन पाठशाला में एडमिशन लिया अौर यहां से 11वीं, 12वीं की पढ़ाई पूरी की।

बीए, एलएलबी और खुद की प्रैक्टिस शुरु की

इसके बाद ब्रेल लिपि छोड़ रेगुलर कोर्स में एडमिशन लिया और अमरोली के एचपी देसाई आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज से बीए की डिग्री ली। फिर बीटी चौकसी लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की। यहां का सफर रीडर और राइटर की मदद से तय किया। दूसरे सेमेस्टर से ही उन्होंने एडवोकेट प्रीति जोशी के यहां प्रैक्टिस शुरू कर दी। एडवोकेट जोशी के जूनियर की मदद से ही वे कोर्ट आते-जाते। बाद में सनद का एग्जाम पास कर उन्होंने शहर के गोडादरा इलाके में खुद की प्रैक्टिस शुरू कर दी।

टेक्नोलॉजी ने आसान कर दिया मुश्किल सफर

मोबाइल में 'बी माय आईज एेप' की मदद से वे केस स्टडी करते हैं। मोबाइल में टॉकिंग सिस्टम से नार्मल लोगों की तरह ही काम करते हैं। सत्यनारायण बताते हैं कि शुरुआत में काम करने में बहुत दिकक्त होती थी। अब भी किसी क्लाइंट को उन पर भरोसा नहीं होता, लेकिन बात शुरू होने के बाद धीरे-धीरे उनका शक दूर हो जाता है।

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