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ये है मोरों का गांव, 400 की आबादी वाले गांव में रहते हैं 800 मोर

स्वच्छ वातावरण, अच्छी खुराक और ध्वनि प्रदूषण से मुक्त नानाभेला गांव मोरों के लिए आशीर्वाद

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 04:56 AM IST
मोर का गांव नाम से है प्रसिद्ध मोर का गांव नाम से है प्रसिद्ध

माणिया मियाणा. माणिया मियाणा के नानाभेला के लिए यह गौरव की बात है कि यहां गांव की आबादी की तुलना में मोरों की संख्या दोगुनी है। गांव की कुल आबादी 400 है। इस गांव में 800 से अधिक मोर रहते हैं। इस गांव की एक विशेषता यह भी है कि यहां कबूतर, चकली, कौआ जैसी पक्षियों के कलरव के बीच मोर की आवाज भी दूर तक गूंजती है।


- ग्रामीण वर्षों से पक्षियों के रहने के लिए नीम, आम, पीपल जैसे बड़े पेड़ों को उगाते हैं। नानाभेला गांव माणिया मियाणा तहसील में समुद्री किनारे पर बसा है। यहां खेती मानसून पर आधारित है। ग्रामीण खेतों में देशी खाद का उपयोग ज्यादा करते हैं। खेतों में कीटनाशक दवाओं का बहुत ही कम इस्तेमाल होता है।

- गांव में शादी-ब्याह या होली-दिवाली, महाशिवरात्रि जैसे त्योहार पर ग्रामीण पक्षियों के लिए अन्न का दान करते हैं। गांव के पास तालाब है जिसमें पक्षियों के लिए सालभर पानी भरा रहता है। गांव के चारों ओर बड़े-बड़े बाग हैं जहां पक्षियों का बसेरा है। गांव में हर साल मोर के 150 से 200 बच्चे पैदा होते हैं। यही कारण है कि यहां ग्रामीणों की आबादी से दोगुना मोर रहते हैं।

मजदूरों को थाने में पहचान देना जरूरी
दूसरे राज्यों से आने वाले मजदूरों का पंजीयन पुलिस थाने में कराया जाता है। इससे गांव में पक्षियों का शिकार नहीं होता। बड़े-बड़े पेड़ होने के कारण गांव के आसपास मोर सहित पक्षी ज्यादा दिखाई देते हैं।
- कानजीभाई चावड़ा, फॉरेस्टर

ग्रामीण रातभर देते हैं पहरा
राष्ट्रीय पक्षी मोर या अन्य पक्षियों के शिकार को रोकने के लिए ग्रामीण रातभर पहरा देते हैं। हर शेरी से दो व्यक्ति रातभर जागते हैं और गांव के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। शहर से मोर देखने के लिए आने वाले पर्यटक मोरों को कोई क्षति न पहुंचा सके इसका पूरा ध्यान रखा जाता है।
- लालजीभाई, सरपंच

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