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रिवर फ्रंट विभाग की लापरवाही, नहीं की जांच, सुरक्षा एजेंसियों को पहुंचाया फायदा

साबरमती रिवर फ्रंट पर कंपनी के गार्ड की संख्या कम बताकर वसूली पूरी रकम, विजिलेंस रिपोर्ट में खुलासा

Bhaskar News | Last Modified - Mar 26, 2018, 05:06 AM IST

रिवर फ्रंट विभाग की लापरवाही, नहीं की जांच, सुरक्षा एजेंसियों को पहुंचाया फायदा

अहमदाबाद. शहर के हार्ट समान साबरमती रिवर फ्रंट के 43 किलोमीटर इलाके में तैनात तीन सिक्यूरिटी कंपनियों ने गार्ड की संख्या कम बताकर पूरी रकम वसूल किए जाने का खुलासा विजिलेंस जांच में बाहर आया है। रिवर फ्रंट पर तैनात तीनों कंपनियों के मास्टर मेंटेन कर रहे हंै कि नहीं इसकी भी जांच नहीं कराई गई है। अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहे सिक्युरिटी घोटाले की जानकारी विजिलेंस जांच में सामने आने के बाद खलबली मच गई है।


इससे पहले शिकायत की गई तब रिवर फ्रंट विभाग ने जांच करना मुनासिब नहीं समझा। अब जब विजिलेंस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आने के बाद कंपनियां अपना-अपना बचाव कर रही है। आरटीआई एक्टिविस्ट्स हरदेव सिंह राठौड़ ने कहा था कि सिक्युरिटी कंपनियाें के खिलाफ विजिलेंस जांच में सामने आई जानकारियों में कुल 187 में से कुछ गार्ड ही 24 घंटे की ड्यूटी करते थे। गार्ड की संख्या कम बताई गई थी। हाजिरी पत्रक में संख्या पूरी बताई गई है जबकि हकीकत में गार्ड की संख्या पूरी नहीं थी। रिवर फ्रंट प्रशासन से पूरी रकम वसूलने वाली कंपनियों द्वारा प्रति गार्ड 5501.40 रुपए दिए गए हंै। जबकि चालू विधानसभा में गैर अनुभवी गार्ड को 276 एवं अनुभवी गार्ड को 293 और कम अनुभवी गार्ड को 284 रुपए देने का नियम होने का स्वयं सरकार की ओर से बताया गया है।


सात दिनों में कंपनी को खुलासा करने की नोटिस
म्युनिसिपल की तीनों सिक्युरिटी कंपनियों को खुलासा करने के लिए नोटिस फटकारी गई है। कंपनियों को टेंडर, हाजिरी एवं वेतन दिलाने के तमाम दस्तावेजों को लेकर सात दिनों के भीतर खुलासा करने की ताकीद विजिलेंस विभाग ने दी है।

कार्रवाई कर रुपए वसूलने की मांग

जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद तीनों कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दिए गए रुपए रिकवरी करना चाहिए। कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग आरटीआई एक्टिविस्ट्स ने की है।

म्युनिसिपल के साथ करार बद्ध कंपनियों को सौंपा गया है काम
राज्य सरकार ने साबरमती रिवर फ्रंट के लिए अलग से बोर्ड बनाया है। जिसमें तमाम पदों की पूर्तता कर स्वतंत्र प्रशासन करने के लिए सरकार ने जिम्मेदारी सौंपी है। इसके बावजूद सिक्युरिटी के लिए टेंडर बगैर म्युनिसिपल कार्पोरेशन के साथ करार बद्ध तीन कंपनियों को सुरक्षा का कार्य सौंपा जाता है।

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