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शहर की हवा में बढ़ा प्रदूषण, रोक लगाने को 6 माह में चलेंगी 50 ग्रीन सीएनजी बसें

तैयारी: ये ग्रीन सीएनजी बसें नए कॉरिडोर पर चलेंगी या सामान्य रोड पर, जल्द लेंगे निर्णय

Bhaskar News | Last Modified - Mar 30, 2018, 05:46 AM IST

शहर की हवा में बढ़ा प्रदूषण, रोक लगाने को 6 माह में चलेंगी 50 ग्रीन सीएनजी बसें

सूरत. शहर में बढ़ते प्रदूषण में कमी लाने के लिए अब ग्रीन ईको सीएनजी बसें चलाई जाएंगी। आगामी छह महीने में 50 ग्रीन ईको सीएनजी बसें शहर की सड़कों पर दौड़ने लगेंगी। सूरत महानगर पालिका की चार सदस्यीय टीम अगले हफ्ते दिल्ली जाएगी। यह टीम वहां सीएनजी बसों के परिचालन और उससे होने वाले पर्यावरण संरक्षण को देखेगी। ये अधिकारी वहां एक वर्कशॉप में भाग लेंगे। ये बसें किन रूट पर चलेंगी, यह अभी तय नहीं किया गया है। इसके लिए अलग कॉरिडोर की व्यवस्था की जा सकती है। इस योजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार 50 करोड़ रुपए की ग्रांट देंगी।

शहर में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत वराछा और लिंबायत जोन में एयर मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के साथ मास ट्रांसपोर्ट के ऐसे साधनों पर विचार किया जा रहा है, जो कम प्रदूषण फैलाते हों। इसी विचार के तहत अब ग्रीन बसों को लाया जा रहा है। पिछले साल से ही इन बसों को जल्द से जल्द शुरू किए जाने की कवायद चल रही थी, लेकिन ग्रांट की कमी की वजह से यह पटरी पर नहीं आ पाई। पहले इन बसों को मिडल रिंग रोड पर दौड़ाने की बात अधिकारियों ने कही थी। अब इन बसों को किन सड़कों पर दौड़ाया जाएगा इसका निर्णय भी जल्द ले लिया जाएगा।

हवा में तय सीमा से ज्यादा पीएम 10
मनपा अधिकारियों ने बताया कि ग्रीन बसों की योजना पब्लिक ट्रासंपोर्ट में बदलाव लाएगी। इससे शहर के प्रदूषण स्तर में कमी आएगी। साउथ और वराछा जोन सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाके हैं। गुजरात पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (जीपीसीबी) ने मनपा से कहा है कि शहर की हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 10) की मात्रा सामान्य से ज्यादा है। पिछले महीने मनपा की बैठक में ड्रेनेज, पावर प्लांट, मास ट्रांसपोर्टेशन तथा टर्सरी ट्रीटमेंट प्लांट का ब्योरा तैयार किया गया और ग्रीन बसें चलाने पर सहमति बनी थी।

जीपीसीबी ने मनपा को दी चेतावनी
जीपीसीबी के मुताबिक सूरत की हवा में पीएम 10 की मात्रा 60 होनी चाहिए, लेकिन यह 93 है। वहीं पीएम 2.5 की मात्रा 40 होनी चाहिए, जबकि यह 33 है। जीपीसीबी ने बढ़ते प्रदूषण का कारण घटते पेड़, बढ़ती इंडस्ट्रीज और वाहनों को बताया था। अब बढ़ते प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए ग्रीन ईको सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें चलाने पर विचार किया जा रहा है।

बसों के लिए नए कॉरिडोर पर भी होगा विचार

मनपा के ट्रैफिक इंचार्ज डीएन वसाक ने बताया कि मनपा की चार सदस्यीय टीम 5 या 6 अप्रैल को दिल्ली रवाना होगी। यह टीम वहां पहले से चल रही ग्रीन बसों के परिचालन से होने वाले पर्यावरण संरक्षण की परख करेगी। इसके अलावा टीम यह भी देखेगी कि वहां किन-किन प्रदूषित इलाकों में बसें चलाई जा रही हैं। अधिकारियों ने कहा कि ये बसे अलग कॉरिडोर पर चलेंगी या सामान्य रोड पर, इसपर निर्णय लिया जाना है।

चर्चा: इलेक्ट्रिक बसें चलाने पर भी किया जा रहा विचार
मनपा आयुक्त ने पिछले महीने टाटा, आयसर और अशोक लेलैंड जैसी सात बड़ी वाहन कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ इस संबंध में बैठक की। मनपा के डिप्टी आयुक्त और सूरत सिटी लिंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एम नागराजन ने बताया कि आने वाले समय में शहर में बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए मनपा ने इलेक्ट्रिक बसों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट में शामिल करने पर चर्चा की है। इन बसों के लिए कोई अतिरिक्त विभाग या कॉरिडोर नहीं बनाया जाएगा। इसे बीआरटीएस के रूट पर ही दौड़ाया जाएगा।

तकनीक: एक बार चार्ज करने पर 150 किमी दौड़ेगी बस
इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग प्वॉइंट बनाए जाएंगे। एक बार पूरी तरह से चार्ज हो जाने पर ये 5 से 6 घंटों तक चलेंगी और करीब 150 किमी का सफर तय करेंगी। इसके लिए मनपा डीजीवीसीएल (दक्षिण गुजरात विद्युत कंपनी लिमिटेड) और टोरेंट से बात करेगी। इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार के नेशनल इलेक्ट्रिक मोबेलिटी प्लान 2020 के तहत बनाया जाएगा। इस काम के लिए मनपा को केंद्र सरकार से आर्थिक मदद भी प्राप्त होगी। मनपा अधिकारियों के मुताबिक इलेक्ट्रिक बसों का रंग हरा होगा।

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