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इस स्कूल में चल रहा अनूठी पहल, बैंकिंग समझाने बनाया ऑनलाइन चाइल्ड सेविंग बैंक

गुजरात के इस सरकारी स्कूल ने अनोखा प्रोग्राम अपनाया है ताकि बच्चे बिना किसी डर के पढ़ने के लिए मोटिवेट हों।

Danik Bhaskar | Mar 26, 2018, 07:42 AM IST

हिम्मतनगर (सूरत). गुजरात के इस सरकारी स्कूल ने अनोखा प्रोग्राम अपनाया है ताकि बच्चे बिना किसी डर के पढ़ने के लिए मोटिवेट हों। बैंकिंग सेविंग और सेहत के महत्व को भी समझें। ये चार पॉइंट हैं-एजुकेशन, हेल्थ, सेविंग और कुपोषण से जंग। बैंक सेविंग के गुर समझाने के लिए स्कूल ने ऑनलाइन चिल्ड्रन सेविंग बैंक शुरू की है। इसके लिए 10 हजार का सॉफ्टवेयर खरीदा है।

- स्वास्थ्य के प्रति बच्चों में जागरूकता बढ़े-इसके लिए बाल डॉक्टर नियुक्त किए हैं। वजह, हालिया स्वास्थ्य परीक्षण में 58 बच्चे कुपोषण ग्रस्त पाए गए थे-इन्हें इससे उबारने के लिए साथ में नाश्ता-भोजन की व्यवस्था अपनाई है।

- पढ़ाई के प्रति स्व-प्रेरणा के लिए स्कूल को बाल अभ्यारण्य जैसा लुक दिया गया है ताकि बच्चे निर्भय बन कर पढ़ाई करें और इनकी आंतरिक शक्तिया निर्बाध रूप से बाहर आएं। साबरकांठा जिले के केशरपुरा गांव के इस प्राथमिक (एक से आठ) स्कूल में 500 विद्यार्थी हैं।

- आचार्य अंकुर देसाई कहते हैं कि हमारा उद्देश्य से स्कूल से पढ़ाई करने वाले बच्चे मानवीय दृष्टिकोण की समझ के साथ निकलें। व्यवहार-बैंकिंग कामकाज और हिंदी में बातचीत और स्वास्थ्य के प्रति बच्चे खुद को निजी स्कूलों के पासआउट बच्चों के मुकाबले कमतर महसूस न करें-इन स्टैप्स के पीछे यही प्रेरणा है। कुपोषण से जूझ रहे 58 बच्चों को अगले छह महीने में उबार कर सामान्य स्वास्थ्य मानदंड पर खरा उतारना है।

ऑनलाइन बचत बैंक क्यों
- बच्चे मिलने वाले पैसे खर्च देते थे। इसलिए इन्हें बचत और बैंकिंग के गुरसिखाने के लिए यह पहल की । सातवीं के बच्चों को कैशियर/मैनेजर की जिम्मेदारी सौंपी है। दो महीने से यह व्यवस्था काम कर रही हैं।

- हालांकि 23 मार्च को जिला विकास अधिकारी हर्ष व्यास ने औपचारिक रूप से इसका आरंभ किया। अब तक 40 हजार रुपए की बचत भी हो चुकी है। बच्चे पासबुक की एंट्री को समझने लगे हैं।

- सोमवार-गुरुवार को ये बैंक काम करती है। हर सप्ताह कंप्यूटराइज्ड स्टेटमेंट बच्चों के घर पहुंचाया जाता है। सर्वाधिक बचत करने वाले पहले तीन विद्यार्थियों को 500-300 और 200 रुपए के प्रोत्साहन इनाम की भी तैयारी है। कुपोषण से जंग में अपने स्तर पर प्रयास के तहत आचार्य ने बच्चों के साथ सुबह का नाश्ता अनिवार्य किया है। दोपहर का भोजन भी।