अधिग्रहण के विरोध में 10 हजार ग्रामीणों का हंगामा, आंसू गैस के 40 राउंड फायर / अधिग्रहण के विरोध में 10 हजार ग्रामीणों का हंगामा, आंसू गैस के 40 राउंड फायर

Bhaskar News

Apr 02, 2018, 04:51 AM IST

चार जिलों से पुलिसबल और दो एसआरपी प्लाटून भी तैनात की गई है।

Opponents of the villagers in protest against land acquisition

भावनगर. गुजरात का भावनगर एक बार फिर भूमि अधिग्रहण के विरोध को लेकर सुर्खियों में है। रविवार को गुजरात पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जीपीसीएल) के अधिग्रहित भूमि पर कब्जे को लेकर ग्रामीण भड़क गए । लगभग 10000 भड़के ग्रामीण-किसानों को काबू करने के लिए पुलिस को 40 टीयर गैस दागने पड़े। 50 ग्रामीणों को हिरासत में भी लिया गया है। घर्षण की शुरूआत पुलिस सुरक्षा में अधिग्रहित जमीन को कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू करने से हुई। घटना घोघा तहसील के बोडी-सुरका नामक गांव से शुरू हुई। देखते ही देखते आसपास के दस गांव के लोग भी विरोध में शामिल हो गए। चार जिलों से पुलिसबल और दो एसआरपी प्लाटून भी तैनात की गई है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भावनगर जिला निरमा सीमेंट प्लांट के खिलाफ आंदोलन के लिए चर्चा में रहा है। ग्रामीणों के विरोध के चलते भारत सरकार के परमाणु बिजली केन्द्र को भी रद्द करना पड़ा है। भावनगर जिला पुलिस अधीक्षक प्रवीण कुमार माल का कहना है कि जीपीसीएल कंपनी ने अधिग्रहित जमीन पर रविवार को माइनिंग का काम शुरू किया। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। जमा हुए लोगों को तितर-बितर करने के लिए 40 टीयर गैस सेल छोड़े गए। 50 किसानों को हिरासत में लिया है। कानून व्यवस्था की स्थिति काबू में है।

2059 हेक्टेयर में माइनिंग करना चाहती है कंपनी
ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि हमने 2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत गुजरात हाईकोर्ट में केस किया है। फैसला आने तक यह कार्रवाई रोकी जाए। फैसला हमें स्वीकार होगा-तब तक माइनिंग का काम रोका जाए।


22 साल पहले भूमि अधिग्रहण

जीपीसीएल के लिए घोघा के इन गांव में भूमि 22 साल पहले अधिग्रहित की गई थी। कंपनी इस में से 2059 हेक्टेयर क्षेत्र में माइनिंग शुरू करना चाहती है। ग्रामीणों को इसकी भनक पहले से लग गई-इसलिए शनिवार से ही ग्रामीण इकट्ठे हो रहे थे।

नक्सलवादी बनने को उकसा रही है सरकार: दिनेश

बाडी गांव के उप-सरपंच दिनेश आहिर का कहना है कि- हम शांतिपूर्वक गांधीजी के बताए मार्ग पर अपना विरोध आंदोलन चला रहे हैं। सरकार के इशारे पर पुलिस दमन के जरिए हमारे आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया गया । सरकार हमें नक्सलवादी बनने के लिए उकसा रही है। हमें मजबूरी में कोई सख्त कदम उठाना पड़ा तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।

2500 बच्चों की पढ़ाई छुड़वा कर आत्मदाह की चेतावनी

इस दौरान आंदोलनकारियों ने बच्चों की पढ़ाई छुड़वाने की भी चेतावनी दी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि हमारे 12 गांव के 2500 से अधिक बच्चे अभी पढ़ाई कर रहे हैं। हमारा दमन किया गया तो इन बच्चों की पढ़ाई छुड़वा देंगे। चाहे जहां ग्रामीण, बच्चे, परिवारजनों के साथ आत्मदाह करेंगे, इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

मुआवजे का हो चुका है भुगतान, हाईकोर्ट में है केस

भावनगर इलेक्ट्रिक कंपनी लिमिटेड (बीईसीएल) के 250 मेगावाट के 2 थर्मल पॉवर प्लांट के लिए जीपीसीएल ने 2059 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया था। 12 गांवों की इस जमीन के एवज में मुआवजे का भुगतान हो चुका है। हालांकि तब कंपनी ने जमीन को नियंत्रण में नहीं लिया था। दिसंबर 2017 से जीपीसीएल अधिग्रहित भूमि को कब्जे में लेने के लिए सक्रिय है।

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