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श्मशान में एंट्री के मामले पर पारसी महिला सुप्रीमकोर्ट की शरण में

गुलरुख का कहना है कि मैं अपने अधिकार के लिए लड़ रही हूं, 14 दिसम्बर को है सुनवाई।

Danik Bhaskar | Dec 12, 2017, 02:05 PM IST

वलसाड। पारसी समुदाय की बेटियां यदि अंतरजातीय विवाह कर लेती हैं, तो उन्हें पारसियों के श्मशान में एंट्री नहीं दी जाती। यह प्रतिबंध 10 साल पहले पारसी अंजुमन ट्रस्ट ने लगाया था। अब इस प्रतिबंध के खिलाफ एक पारसी महिला गुलरुख गुप्ता सुप्रीमकोर्ट पहुंच गई है। मामले की सुनवाई 14 दिसम्बर को है। अन्य समाजों में भारी उत्कंठा…

मामला इस प्रकार है-वलसाड़ की कांट्रेक्टर की बेटी गुलरुख की शादी 1991 में महिपाल गुप्ता के साथ हुई है। इन दिनों दोनों मुम्बई में रहते हैं। गुलरुख ने गुजरात हाईकोर्ट में 2008 में केस दाखिल किया कि उसके माता-पिता की मौत के बाद उसे पारसियों के श्मशान गृह दखमा में प्रवेश की अनुमति मिले। क्योंकि दूसरे धर्मों में शादी करने वाली पारसी बेटियों को इसकी अनुमति नहीं है। अहमदाबाद हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। तब गुलरुख ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अब 14 दिसम्बर को इस मामले की सुनवाई है। इससे अन्य समाजों में भारी उत्कंठा देखी जा रही है।

सखी अपने माता-पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाई थी

वलसाड अंजुमन ट्रस्ट द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण गुलरुख की सखी दिलबर अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाई थी। तब गुलरुख ने इस प्रतिबंध के खिलाफ कानूनी जंग लड़ने का फैसला कर लिया। अपने इस निर्णय पर गुलरुख का कहना है कि मैं अपने अधिकार के लिए लड़ रही हूं। मुम्बई जैसे शहरों में काफी छूट मिल जाती है, पर वलसाड जैसे छोटे शहर में संकुचित विचारों के कारण हमें स्वतंत्रता नहीं मिल पाती। मैं अपने समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ जंग लड़ रही हूं। स्त्री-पुरुष, गरीब-अमीर के बीच के भेदभाव को मिटाना चाहती हूं।

अंजुमन ट्रस्ट का कहना है

इस मामले में वलसाड पारसी अंजुमन ट्रस्ट के अध्यक्ष शाम चोथिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में 14 दिसम्बर को सुनवाई है। इसके पहले गुजरात हाईकोर्ट ने इसकी याचिका को खारिज कर दिया था। अब देखते हैं कि सुप्रीमकोर्ट क्या फैसला करती है। फैसले के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।