सूरत

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प्रेग्नेंट पत्नी का जेंडर टेस्ट कराने दबाव बनाया, बेटी होने के बाद भी जारी रहा जुल्म

महिला ने पुलिस के आला अधिकारी से शिकायत की तब जाकर महिला पुलिस हरकत में आई।

Danik Bhaskar

Dec 17, 2017, 06:13 AM IST
महिला पुलिस थाने के बाहर आरोपी महिला पुलिस थाने के बाहर आरोपी

सूरत. सूरत पुलिस ने 8 माह पुराने एक दहेज उत्पीड़न के मामले में कार्रवाई करते हुए शनिवार को एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि बाकी अन्य आरोपियों को छोड़ दिया। पीड़िता ने 3 मार्च 2017 को अपने पति, ससुर, सास, नाना ससुर और नानी सास के खिलाफ दहेज और शारीरिक उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया था, लेकिन महिला पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अंत में थक हार कर महिला ने पुलिस के उच्च अधिकारी से शिकायत की तब जाकर महिला पुलिस हरकत में आई, लेकिन पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने सिर्फ दिखावे के नाम पर कार्रवाई की है।

बेटी पैदा होने के बाद शारीरिक प्रताड़ना बढ़ी
पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि जब वह प्रेग्नेंट हुई तो जेंडर टेस्ट कराने का दबाव बनाया। उसके बाद बेटी हुई, जिसका पूरा खर्च उसके मां-बाप ने उठाया। बावजूद इसके पति और सास-ससुर का बर्ताव अचानक बदल गया। उसके साथ मारपीट होने लगी। प्रताड़ना यहीं तक नहीं रुकी, जब बेटी बड़ी हुई और स्कूल जाने लगी तो पति ने बेटी को स्कूल से निकलावा दिया। इसके बाद उसके सब्र का बांध टूट गया।

लेडी पुलिस इंस्पेक्टर ने जानकारी देने से किया इनकार

- बता दें कि ग्वालियर की रहने वाली दीपेन्टी बेन कुशवाहा ने उमरा स्थित महिला पुलिस थाने में पति ऋषिदत्त कुशवाहा, ससुर रविदत्त कुशवाहा, सास सुनीता, नाना ससुर दाताराम सिंह और नानी ससुर पार्वती के खिलाफ दहेज

और शारीरिक उत्पीड़न की शिकायत की थी। पुलिस ने महिला की अर्जी पर मामला तो दर्ज कर लिया था, लेकिन आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया।

- बार-बार पुलिस थाने के चक्कर काटने के बाद भी जब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो उच्च अधिकारियों से शिकायत की।

- ऊपर से जब प्रेशर आया तो दिखावे के नाम पर 8 माह बाद महिला पुलिस थाने के पीएसआई एनएम जोशी ने पांचों आरोपियों को पुलिस थाने बुलाया, लेकिन पुलिस ने सिर्फ पति ऋषिदत्त कुशवाहा को ही गिरफ्तार किया। बाकी चार लोगों के बयान को लेकर पुलिस ने छोड़ दिया, जबकि सभी आरोपियों के खिलाफ सेम चार्ज हैं। पति को भी जमानत पर छोड़ दिया गया।

- महिला थाने की पुलिस इंस्पेक्टर एनएम जोशी से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने पहले बात करने से इनकार कर दिया, लेकिन जब पुलिस की भूमिका पर सवाल किए गए तो उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं है कि वह मीडिया के सवालों का जवाब दें।

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