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जेल में बुक लिख चुके कैदी ने मांगी इच्छा मृत्यु, कहा- न्याय के इंतजार में थक चुका हूं

सात साल से लाजपोर जेल में बंद वीरेंद्र वैष्णव ने हाईकोर्ट से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है।

Dainik Bhaskar

Feb 27, 2018, 10:56 PM IST
Prisoner wrote book, wanted death wish

सूरत (गुजरात). लाइफ बिहाइंड द बार्स’ और ‘प्रिजन प्रिजनर पैन एंड आई’ जैसी किताबें लिख चुके और सात साल से लाजपोर जेल में बंद वीरेंद्र वैष्णव ने हाईकोर्ट से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। इस संबंध में वीरेंद्र ने गुजरात हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को फैक्स किया है। फैक्स में उन्होंने लिखा है, मेरे केस की सुनवाई जल्द नहीं करने से मैं सूरत सेशंस कोर्ट का बहिष्कार करता हूं। उन्होंने फैक्स में लिखा है कि उनके मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में 5 मार्च से पहले की जाए, नहीं तो अन्न-जल त्याग कर मरने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा है कि अब सूरत सेशंस कोर्ट से उन्हें न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं रही। किताब की 7 लाख से ज्यादा कॉपी बिक चुकी हैं...

- हत्या के मामले में जेल में बंद 40 साल के वीरेंद्र वैष्णव राइटर हैं। उन्होंने जेल में ही ‘लाइफ बिहाइंड द बार्स ‘और ‘प्रिजन प्रिजनर पैन एंड आई’ नामक किताबें लिखीं।

- बिहाइंड द बार्स को 25 मई 2017 को लंदन के ओलंपिया पब्लिकेशन ने पब्लिश किया। अब तक 60 देशों में इस किताब की 7 लाख से ज्यादा कॉपी बिक चुकी हैं।

- उसके बाद वीरेंद्र ने एक अन्य किताब प्रिजन प्रिजनर्स पैन एंड आई लिखी। इस किताब को चेन्नई के नोशन प्रेस ने 16 दिसंबर 2017 को 150 देशों में पब्लिश किया।

- यह किताब 30 हजार बुक स्टॉल और लायब्रेरी में बिक्री के लिए रखी गई है। प्रिजन प्रिजनर्स पैन एंड आई में वीरेंद्र वैष्णव की लिखी गई कविता को पोएट्री बुक-2018 में शामिल किया गया है।

- वीरेंद्र टेलेंटेड हैं। वह पेंटिंग भी करते हैं। उनकी पेंटिंग को 2015 में नेशनल लेवल पर तिनका तिनका अवॉर्ड मिला था। वीरेंद्र ने लगातार तीन साल 2015 से 2017 तक अवॉर्ड हासिल किया।

नहीं मिल रहा न्याय

- वीरेंद्र की हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को किए गए फैक्स में कहा गया है कि सूरत सेशंस कोर्ट द्वारा उन पर सवा सात साल से अन्याय किया जा रहा है।

- अब वे सेशंस कोर्ट से न्याय की भीख नहीं मांगना चाहते। जजों और वकीलों की आंतरिक लड़ाई में उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।

- न्याय की राह देखते-देखते वह थक चुके हैं। अब सिर्फ हाईकोर्ट से ही उम्मीद है। अगर हाईकोर्ट भी न्याय नहीं दे सकता तो मरने की अनुमति दे।

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