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गजल सिर्फ कागज और रोशनाई की दुनिया है: राहत इंदौरी

समस्त बिहार-झारखंड द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में भाग लेने आए मशहूर शायर राहत इंदौरी से बातचीत

Dainik Bhaskar

Mar 23, 2018, 04:10 AM IST
rahat indori interview

सूरत. वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी के कन्वेंशन हॉल में बिहार स्थापना दिवस के अवसर पर गुरुवार शाम को आयोजित कवि सम्मेलन में भाग लेने आए मशहूर शायर राहत इंदौरी ने गजल विधा पर अपने विचार रखे। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश।


Q. कोई शायर या गजलकार किसी राजनीतिक पार्टी पर गजल लिखे तो आप क्या कहेंगे?
A. गजल एक ऐसा थर्मामीटर है, जिसे देखकर, पढ़कर या सुनकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस विषय पर किस सोच के साथ यह लिखी गई।

Q. सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं? आजकल इस प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में गजल, नज्म और कविताएं लिखी जा रही हैं?
A. मैं सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करता और करना भी नहीं चाहता, मगर मैंने उसे जानने की कोशिश जरूर की है। यह एक अंधा कुआं है, जिसमें रहने वाले लोगों ने बाहर का कुछ देखा ही नहीं है। यहां 100 -200 लोग एक दूसरे की तारीफ और आलोचना करते रहते हैं। गजल 6 अरब लोगों की दुनिया है।


Q. मौजूदा दौर में आपके पसंदीदा तीन गजलकार?

A. मैं अभी जिंदा लोगों के नाम तो नहीं बता पाऊंगा, लेकिन अहमद फराज, बशीर बद्र और जॉन एलिया मेरे सबसे पसंदीदा गजलकार हैं।

Q. आपने बॉलीवुड में कैसे प्रवेश किया?
A. मुझे गीत लिखने के लिए कई बार बॉलीवुड से बुलावा आया, लेकिन मुझे वहां जाना पसंद नहीं था। एक बार टी सीरीज के गुलशन कुमार ने बुलाया। वहां मैं सिर्फ एक हफ्ता रुका। इतने दिनों में उन्होंने मेरे दो एल्बम रिकॉर्ड किए। उस समय मुझे शोहरत और पैसे की जरूरत थी। उसके बाद मुझे पैसा और शोहरत दोनों मिले। मैंने बहुत ही कम समय में 40 से 45 गाने लिखे। बॉलीवुड के हर बड़े डायरेक्टर के साथ काम किया।


Q. अपाने गजल लिखना कब से शुरू किया?
A. मैं जब 17 साल का था तब से गजल लिख रहा हूं। सबसे बड़े शायर गालिब, नजीर और निराला मेरे आदर्श रहे हैं। गजल सिर्फ कागज और रोशनाई की दुनिया है। औजार से कोई नट बोल्ट कस सकता है, गजल नहीं लिख सकता।


Q. पहली बार सूरत कब आए थे? पहले और अब के सूरत में क्या बदलाव देखा?
A. आज से 50 साल पहले मैं पहली बार सूरत आया था। अब तक मैं 20 बार सूरत आ चुका हूं। आखिरी बार आज से 2 साल पहले आया था। दो साल पहले और आज के सूरत में बहुत अंतर आ गया है। आज जो स्वादिष्ट दाल, सूप यहां एक रेस्टोरेंट में खाया-पिया, वह मुझे दो साल पहले नहीं मिला था।

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