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मजदूरी करने वाले ने 50 हजार उधार ले खरीदा ऑटो, प्रसूताओं के लिए रात में फ्री चलाते हैं

पत्नी जैसी तकलीफ किसी को न हो, इसलिए 10 सालों से रात में जरूरतमंदों को फ्री में देते हैं ऑटो रिक्शा से सेवा

Danik Bhaskar | Feb 12, 2018, 03:53 AM IST

सूरत. नौ साल पहले 17 फरवरी 2008 की वह रात शियालभाई आज भी नहीं भुला पाए हैं, जब वह रोज की तरह साड़ी के हैंडवर्क के अपने काम पर थे और घर पर पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। पड़ोसी ऑटो या एंबुलेंस ढूंढते रहे और सोनलबेन दर्द से तड़पती रही। हालत गंभीर होने लगी। कई घंटे बाद पास ही रहने वाले किसी व्यक्ति ने मदद की और अपने वाहन में उन्हें अस्पताल पहुंचाया। उस दिन शियालभाई को महिलाओं के दर्द का अहसास हुआ तो उन्होंने उनकी मदद करने की ठान ली। लेकिन, खुद मजदूरी करके वो परिवार चला रहे थे तो औरों की मदद कैसे करते। उसी दिन किसी परिचित से 50 हजार रुपए उधार लिए। इनमें से 25 रुपए से अस्पताल का बिल चुकाया और बाकी पैसों से एक ऑटो खरीदा। अब नौ वर्षों में वे 100 से भी ज्यादा प्रसूताओं को रात के समय मुफ्त में अस्पताल पहुंचा चुके हैं।

- शियालभाई अमरोली स्थित भरथाणा गांव की शांति नगर सोसाइटी में रहते हैं। ऑटो के पीछे लगे पोस्टर पर लिखा है कि रात 11 से सुबह 5 बजे तक वे जरूरतमंदों को निशुल्क अस्पताल पहुंचाएंगे। मोबाइल नंबर भी लिखा है। तब से यही दिनचर्या है। दिन में हैंडवर्क और रात में ऑटो सेवा।

अब तक 100 से ज्यादा को पहुंचा चुके अस्पताल

तारीख को ही बना लिया नंबर प्लेट
जिस दिन शियालभाई के जीवन में यह संकट आया, उसी दिन उन्होंने मदद की शुरुआत की, इस वजह से उन्होंने ऑटो का नंबर भी इसी दिन के ऊपर रखा। ऑटो की नंबर प्लेट 1728 है। रोज 50 रुपए से ज्यादा की सीएनजी ऑटो में खर्च हो जाती है, ऐसे में उनके मित्र सुसान भी उनकी मदद करते हैं।

नशा-मुक्ति का भी अभियान चलाते हैं
प्रसूताओं के लिए चला रहे अभियान के साथ शियालभाई नशा मुक्ति का अभियान भी चलाते हैं। वे समझाते हैं कि तम्बाकू खाने में रोज 50 रुपए, धूम्रपान करने में 100 रुपए और शराब पीने में 200 रुपए बर्बाद करने से अच्छा है कि इस पैसे से किसी जरूरतमंद लोगों की मदद की जाए।