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जान जोखिम में डालकर बचा चुके हैं 150 लोगों को, ऐसी है इन कॉन्स्टेबल की स्टोरी

सैयद मुमसाद अली को परोपकार करने का जुनून है, भले ही इस काम में उनकी जान पर ही क्यों न बन आए।

अनूप मिश्रा | Last Modified - Mar 19, 2018, 06:10 AM IST

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    सूरत.सूरत पुलिस में कांस्टेबल पोस्ट पर काम करने वाले सैयद मुमसाद अली को परोपकार करने का जुनून है, भले ही इस काम में उनकी जान पर ही क्यों न बन आए। लोगों की जान बचाने के लिए कई बार वह अपनी जान जोखिम में डाल चुके हैं। एक बार तो उन्हें 12 साल तक कोर्ट के चक्कर भी लगाने पड़े। सैयद ने पिछले 20 साल में 150 से ज्यादा लोगों की जान बचा चुके हैं। सितंबर 1998 में जब सूरत में बाढ़ आई थी तो उन्होंने तत्कालीन पार्षद अनिल कुमार गोपलानी की मदद से एक बोट का इंतजाम कर बाढ़ में फंसे 40 लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया था। अभी तीन दिन पहले ही उन्होंने तीन लोगों की जान बचाई। मुमसाद 16 हिंदू लड़कियों की शादी भी करा चुके हैं।

    जो कसम खाई थी, वही निभा रहा हूं

    - 16 दिसंबर 1996 को एक महिला अपने घर में अचार में डालने के लिए तेल गर्म कर रही थी। अचानक उसके घर में आग लग गई। सैयद आग से घिरी महिला को बचाने के लिए घर में घुस गए।

    - उन्होंने महिला को बचा लिया, लेकिन वह खुद झुलस गए। उन्हें 1 महीने तक सिविल अस्पताल में इलाज करवाना पड़ा। वह कहते हैं पुलिस की वर्दी पहनते समय जो कसम खाई थी उसी का पालन कर रहा हूं।

    मुमसाद नहीं आते तो हम नहीं बचते

    - शुक्रवार, 16 मार्च को सुबह 11.30 बजे सैयद मुमसाद अली कड़ोदरा हाईवे पर खड़े थे। एक कार तेज गति से जा रही थी। मुमसाद अली ने देखा कि इस कार के दो पहिए निकलने वाले हैं। उन्होंने मोटरसाइकिल से कार का पीछा कर चालक से इस बारे में बताया।

    - कार मालिक हरीश भाई सोलंकी ने मुमसाद से कहा आप हमारे लिए भगवान बनकर आए और हमारी जान बचा ली। ड्राइवर उमेश पटेल ने कहा कि अगर मुमसाद साहब नहीं आए होते तो आज हम जिंदा नहीं होते।

    करवा चुके हैं 16 हिंदू लड़कियों की शादी

    - वह वाहन चालकों से किसी गरीब लड़की की शादी में दान करने के लिए कहते हैं। सैयद अब तक 16 हिंदू लड़कियों की शादी करवा चुके हैं।

    भलाई के चक्कर में 12 साल तक लड़ा केस

    - वराछा के पास स्थित बस डिपो पर एक पुलिसकर्मी और कुछ कंडक्टर बस के किराए को लेकर आपस में झगड़ रहे थे। विवाद बढ़ा तो कंडक्टर पुलिसकर्मी को मारने लगे। मुमसाद ने बीच-बचाव कर पुलिसकर्मी को बचाया। कुछ दिनों के बाद उसी पुलिस वाले ने मुमसाद पर केस कर दिया। 12 साल उन्होंने मुकदमा लड़ा। आखिरकार अदालत ने उन्हें बाईज्जत बरी कर दिया।

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