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नौ साल के लड़के को है ऐसी बीमारी, सात साल से रखना पड़ रहा है रस्सी से बांधकर

याद नहीं रहता घर लौटना, नॉन रिस्पोसिंव एपिलेप्सी नामक रोग, नहीं हो रहा इलाज का असर

Dainik Bhaskar

Mar 30, 2018, 05:42 AM IST
बच्चे को रस्सी से बांधे हुए। बच्चे को रस्सी से बांधे हुए।

कीम (सूरत). दक्षिण गुजरात के कीम के शुभम पढियार (9) मेडिकल साइंस के लिए चुनौती हैं। शुभम को रस्सी से घर बांध कर रखना पड़ता है। कारण, उसे यह नहीं पता चलता कि वह कहां जा रहा है। इसलिए सात साल से पढियार परिवार बेटे को यूं बांध कर रखने को विवश है। अप्रैल-2008 में जन्में शुभम को शायद जन्म के समय कुछ दिक्कत थी। ये था मामला...

- एक साल की उम्र में वॉकर से गिरने से सिर में चोट लग गई। मिर्गी का दौरा पड़ने लगा। वह जब चलने लगा तब रोग की गंभीरता ध्यान में आई।

- डॉक्टरों को दिखाया लेकिन कोई लाभ नहीं हो रहा। पिता देवजी परमार ऑटो चलाते हैं। मां गीताबहन बेटे शुभम की बीमारी की बात आने पर रोने लगती हैं।

- वह बताती हैं कि- शुभम, किसी को पहचानता नहीं है। नींद में भी मिर्गी का दौरा आने लगता है। कभी भी उठ कर चलने लगता है।

याद नहीं रहता घर लौटना

- जैसे-तैसे चलते हुए शुभम (9) घर से बाहर तो निकल जाता है लेकिन उसे वापस आना याद नहीं रहता था। इसलिए उसे इस तरह बांध कर रखना शुरू किया।

- दो साल की उम्र से शुरू हुआ ये सिलसिला अब तक जारी है। सूरत के बाल रोग विशेषज्ञ डा. दिगंत शास्त्री, दिमाग में गाठ होने की स्थिति में मिर्गी के दौरे संभव हैं-इलाज है इसका।

- शुभम के मामले में ऐसा नहीं है। वह नॉन रिस्पोसिंव एपिलेप्सी से जूझ रहा है। जांच के बाद उसका ऑपरेशन करने की संभावना नहीं है।

लड़का घर आना ही भूल जाता है। लड़का घर आना ही भूल जाता है।
लड़के की मां। लड़के की मां।
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बच्चे को रस्सी से बांधे हुए।बच्चे को रस्सी से बांधे हुए।
लड़का घर आना ही भूल जाता है।लड़का घर आना ही भूल जाता है।
लड़के की मां।लड़के की मां।
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