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सबसे अधिक लिनेन उत्पादक बना सूरत, 40 करोड़ रुपए तक पहुंचा कारोबार

जीएसटी के बाद इम्पोर्ट ड्यूटी 26 से 18 फीसदी कम होने का असर

एजाज शेख | Last Modified - Mar 09, 2018, 06:36 AM IST

सबसे अधिक लिनेन उत्पादक बना सूरत, 40 करोड़ रुपए तक पहुंचा कारोबार

सूरत. साड़ियां, ड्रेस, मंडप क्लॉथ के बाद अब लिनेन कपड़े के उत्पादन में भी सूरत देश का सबसे बड़ा मार्केट बन गया है। जिस सूरत में आज से 8 साल पूर्व लीनन कपड़े का उत्पादन नहीं होता था उसी शहर में अब देश की कई नामी संस्थाएं प्रतिमाह करीब 25 से 30 करोड़ तक का लीनन कपड़ा बना रही हैं। दावा किया जा रहा है कि आज देश भर में सबसे अधिक सूरत शहर में प्रतिमाह 40 करोड़ मूल्य के 10 लाख मीटर कपड़े का उत्पादन किया जा रहा है। ओरिजनल लिनेन महंगा होने के कारण सभी लोग इसे पहन भी नहीं पाते। इसलिए डिमांड भी कम होती थी, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद लिनेन कपड़े के व्यापारियों को फायदा हुअा है।

लिनेन कारोबारी सुरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद लिनेन कपड़ा बनाने वालों पर कोई इफेक्ट नहीं हुआ है। उल्टा जीएसटी के बाद इम्पोर्ट ड्यूटी 26 से कम होकर 18 फीसदी होने से फ्रांस और बेल्जियम से इम्पोर्ट होने वाला लीनन फ्लेक्स सस्ता हो गया है। इसका सीधा लाभ लिनेन कारोबारियों को हो रहा है।


बंगाल था अब तक सबसे बड़ा बाजार

7-8 साल पूर्व लिनेन का सबसे बड़ा बाजार बंगाल था। उसके बाद बोइसर स्थित तारापुर और साउथ का नंबर था, लेकिन 7-8 साल पूर्व लिनेन के कारोबार की शुरुआत करने के बाद आज बंगाल और तारापुर को पीछे छोड़ सूरत देश का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है।

100 कलर में है उपलब्ध

पूर्व में 8-10 कलर में ही लिनेन उपलब्ध होता था, लेकिन अब करीब 100 कलर में उपलब्ध है। वेरायटी बढ़ने से प्लेन के साथ साथ प्रिंटेड लिनेन कपड़ा पहनना लोगों को अच्छा लगने लगा है। जेकार्ड मशीन पर अधिकतर शेरवानी ही बनती थी, लेकिन अब लिनेन का कपड़ा भी जेकार्ड मशीन पर विविंग होने लगा है।

आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से सूरत के व्यापारियों का उत्पादन बढ़ा
व्यापारियों का कहना है कि आंतरराष्ट्रीय मार्केट में बने रहने के लिए आधुनिक तकनीक वाली मशीनंे होना जरूरी है। इसलिए सूरत में इस प्रकार की जेकार्ड, जेकार्ड रेपियर, जेकार्ड इलेक्ट्रॉनिक, वॉटर जेट और एयर जेट जैसी मशीनों की संख्या बढ़ने से लिनेन कपड़े का उत्पादन बढ़ रहा है। इन मशीनों से निटिंग क्लॉथ भी श्रेष्ठ क्वालिटी का बनता है। इसकी एक और खासियत यह है कि डिफेक्ट लेस लिनेन सूरत में बन रहा है।

महंगा होने के बावजूद जेकार्ड-डिजिटल प्रिंट लीनन की डिमांड

लिनेन में प्लेन के अलावा जेकार्ड विविंग में बना लिनेन और डिजिटल प्रिंट की अधिक डिमांड ज्यादा है। जेकार्ड मशीन में विविंग का रेट प्लेन से 10 फीसदी अधिक होता है, क्योंकि जेकार्ड मशीन से लीनन के कपड़े में डिजाइन बनती है। जेकार्ड से महंगा डिजिटल प्रिंट होता है, क्योंकि प्लेन विविंग के बाद प्रिंटिंग का खर्च अलग से होता है।

यूरोप, यूएसए और दुबई में होता है एक्सपोर्ट, चाइना से टक्कर

सूरत में बनने वाला लिनेन का कपड़ा यूरोप के िवभिन्न देशों, यूएसए और दुबई जैसे देशों में एक्सपोर्ट होता है। हालांकि इसकी मात्रा अभी काफी कम है। इसका एक कारण यह भी है कि लिनेन फ्लेक्स सारा इम्पोर्ट होता है, जबकि भारत की तुलना में चाइना का लिनेन सस्ता होता है। इसकी वजह से व्यापारियों को नुकसान भी हो रहा है।

रेड एंड टेलर, अरविंद, सियाराम कंपनी भी सूरत में करती हैं उत्पादन

सूरत में ओरिजिनल लिनेन कपड़ा डिफेक्ट लेस बनता है। रेपियर, जेकार्ड, ऐयरजेट और वॉटर जेट जैसी आधुनिक मशीनों पर रेड एंड टेलर, अरविंद और सियाराम कंपनी का लिनेन भी सूरत में हमारी मिल में बनता है। आने वाले दिनों में इसका बाजार और बढ़ेगा।

-गिरधर गोपाल मुंद्रा, लीनन उत्पादक

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Web Title: sabse adhik linen utpaadk bana surt, 40 karoड़ rupaye tak phunchaa karobaar
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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