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10 टन मलबे के नीचे से 2 लाशें निकालने के बाद दिखी शर्ट, यूं मौत के मुंह से निकाला

करीब ढाई घंटों तक टनों मलबा व लोहे की एंगल काटकर उसे बचा लिया गया।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 22, 2018, 06:49 AM IST

10 टन मलबे के नीचे से 2 लाशें निकालने के बाद दिखी शर्ट, यूं मौत के मुंह से निकाला

सूरत.रेसकोर्स रोड पर आदर्श सोसायटी के पास मंगलवार शाम को 7.30 बजे अवैध रूप से बन रहे मकान की दूसरी मंजिल की छत ढह गई। इसमें 3 लोग दब गए। गनीमत यह रही कि आरसीसी डालने का काम 10 मिनट पहले ही पूरा हुआ था और करीब 18 मजदूर मकान के बाहर चले गए थे, लेकिन 3 दब गए। फायर ब्रिगेड के 50 लोगों को मलबा हटाने के दौरान एक मजदूर की शर्ट दिखी। करीब ढाई घंटों तक टनों मलबा व लोहे की एंगल काटकर उसे बचा लिया गया। हालांकि, 2 छतों के करीब 10 टन बोझ तले दबे अन्य दो के शव रात एक से डेढ़ बजे के बीच निकाले जा सके। दोनों इतने नीचे दबे थे कि जेसीबी लगाकर मलबा हटाना पड़ा।

गनीमत: हादसे से पहले निकले 18 मजदूर

ढहा मकान आदर्श सोसायटी में रहने वाले महेश पटेल का है। बिना परमिशन दूसरी मंजिल की छत की 22 मजदूर आरसीसी कर रहे थे। शाम को 7.30 बजे 18 मजदूर टेम्पो में बैठ गए। नवागांव डिंडोली के पर्वत नागले (36), मनोज देशमुख (30), गणेश माकोड़ो (40) व उनका एक साथी छत का सपोर्ट लगाने रुक गए। 10 मिनट बाद छत ढहने लगी तो उनका साथी वहां से कूद गया लेकिन पर्वत, मनोज व गणेश मलबे में दब गए।

एक टन मलबा हटाया, फिर गैस कटर से सरिए हटाए, फिर लगाना पड़ा जैक

नवसारी स्टेशन के फायर ब्रिगेड कर्मचारी जगदीश पटेल ने बताया कि ऊपरी मलबा हटाने ही एक सफेद शर्ट दिखी। पास गए तो मजदूर(पर्वत) के चीखने की आवाज सुनी। वह सरिए-सीमेंट और बड़े पिलर में फंसा था। पर्वत बेहोश न हो इसलिए मैं उससे बात करता रहा। करीब एक टन मलबा हटाया, फिर गैस कटर से सरिए हटाए। रस्सी से पिलर नहीं हटा तो फिर एक जैक लगाकर उसे ऊपर किया जिससे वो बाहर निकाला जा सका।

कुछ देर सन्नाटा सा रहा, फिर समझ में आया क्या हुआ है

सीढ़ियों और गिरी हुई छत के नीचे दबने के बाद बमुश्किल बचकर आने वाले मजदूर पर्वत नागले को नहीं पता उसके साथी मर चुके थे। उसने बताया कि हम करीब 18 लोग लोग थे। शाम 7.20 स्लेप का पूरा काम खत्म हो गया था। सब बाहर निकल गए थे। मैं, मनोज देशमुख, गणेश माकोड़े और एक और मजदूर ऊपर नई पड़ी स्लैब देख रहे थे। मकान मालिक आैर ठेकेदार बाहर बातें कर रहे थे। तभी कुछ कटकटाहट ही आवाज आई। नीचे आकर देखा तो 9 दिन पहले पड़े बीम से आवाज आ रही थी। हमने उसे रोकने को चार सपोर्ट लगाए, लेकिन आवाज नहीं रुकी। मैं छत की तरफ देखने को तीन सीढ़ी ही चढ़ा था, तभी लगा कि आसमान फट पड़ा है। कुछ देर सन्नाटा सा रहा, फिर समझ में आया क्या हुआ है। मैं भारी बोझ तले दबा था। बहुत गर्मी लग रही थी। एक-एक सांस लेना मुश्किल था। दाहिने पैर में दर्द था। मैं 20-30 मिनट चिल्लाता रहा। आधे घंटे के बाद कुछ आवाजें सुनाई दीं। फायर ब्रिगेड वाले आए और मुझे निकाल लिया। मै सीढ़ियों के बीच था, इसलिए बच गया। आप तो उन दोनों को बचाओं। वो दो छतों के नीचे दबे हैं, लगता है नहीं बचेंगे।’

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