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7 महीने की बच्ची के पेट से निकला अविकसित भ्रूण, ढाई घंटे तक चला ऑपरेशन

सिविल अस्पताल में सफल सर्जरी, अविकसित भ्रूण में रीढ़ की हड्डी, दिमाग का ट्यूमर, सिर के बाल और सॉफ्ट टिश्यू

Bhaskar News | Last Modified - Mar 02, 2018, 03:16 AM IST

7 महीने की बच्ची के पेट से निकला अविकसित भ्रूण, ढाई घंटे तक चला ऑपरेशन

अहमदाबाद. सिविल अस्पताल में एक अजीबो गरीब मामला दर्ज किया गया है। जिसमें अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग में पेट फूल जाने की समस्या से ग्रसित भर्ती की गई 7 महीने के बच्चे की पेट से अविकसित भ्रूण निकालने की ढाई घंटे की सफल सर्जरी की है। 5 लाख मामलों में एक ऐसा मामला “फिट्स इन फिटू’ के विश्व में 200 एवं सिविल में दूसरा मामला दर्ज किए जाने की जानकारी चिकित्सकों ने बताई है। क्या है मामला...


- पूरे विश्व में इस प्रकार के 200 और सिविल अस्पताल में इस तरह का दूसरा केस दर्ज किया गया है। सिविल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉ राकेश जोशी ने बताया कि छोटा उदेपुर में खेती करने वाले मोती सिंह राठवा एवं मनीषा बेन की 7 महीने की पुत्री के पेट में गांठ हो गई थी। जिससे बच्ची का पेट फूल गया था। इसके बाद उपचार के लिए 15 फरवरी के दिन बच्ची को सिविल में भर्ती कराया गया था।
- बच्ची के पेट का एक्स रे, रक्त की जांच एवं सिटी स्कैन जैसी जांच में पता चला कि बच्ची के पेट में गांठ नहीं लेकिन अविकसित भ्रूण जिसे चिकित्सकीय भाषा में “फिट्स इन फिटू’ कहा जाता है।

- 19 फरवरी को ढाई घंटे के सफल सर्जरी कर 130 ग्राम वजन के अविकसित भ्रूण में रीढ़ की हड्डी, दिमाग का टिश्यू, सिर के बाल, अविकसित हाथ-पैर, मसल्स और साफ्ट टिश्यू था। सर्जरी में डॉ राकेश जोशी सहित पीडियाट्रिक सर्जन डॉ जयश्री रामजी तथा एनेस्थेटिस्ट डॉ नम्रता शाह एवं डॉ रमीला की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस तरह बनता है अविकसित भ्रूण

- अविकसित भ्रूण के लिए पेरासायटिक ट्रिवन एवं टेरेटोमेटेस दो प्रकार की थियरी काम करती है। बच्ची में पाए गए भ्रूण पेरासायटिक टि्वन था। जो गर्भ की शुरूआत होती है तब अंडकोष फलित होने के बाद दो भागों में विकसित होती है। जिसमें से 1 नॉर्मल बच्चा एवं दूसरा अंडकोष बच्चे में शामिल होने के बाद “फिट्स इन फिटू’ के तौर पर विकसित होता है।

- इसमें बल्ड जीवित बच्चे से मिलता है और दिमाग, हृदय एवं फेफड़ा जैसे अंग होते हैं। सर्जरी के दौरान बच्ची की धोरी-नस, दाहिनी किडनी, स्वादूपिंड, यकृत एवं किडनी के ब्लड सप्लाई को नुकसान न हो इसकी सावधानी रखकर ही यह सफल सर्जरी की गई है।

हर 5 लाख केसों में एक बच्चे में पाया जाता है अविकसित भ्रूण

- 5 लाख में एक ऐसा केस बच्चे में अविकसित भ्रूण जैसा पाया जाता है। विश्व में ऐसे 200 जबकि सिविल में यह दूसरा मामला है। 2015 में 7 महीने के बच्चे के पेट से अविकसित भ्रूण निकाला गया था।

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