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महंत विजयदास 1980 में निर्विरोध चुने गए, दूसरी बार 94% वोटों से जीत पहुंचे विधानसभा

​वीरेन्द्र कुमार राय | Last Modified - Dec 04, 2017, 04:50 AM IST

कांग्रेस के उम्मीदवार महंत विजयदासजी वीरदासजी के खिलाफ कोई उम्मीदवार ही नहीं खड़ा हुआ।
  • महंत विजयदास 1980 में निर्विरोध चुने गए, दूसरी बार 94% वोटों से जीत पहुंचे विधानसभा

    सूरत.गुजरात विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ना हर व्यक्ति की महत्वाकांक्षा बन गई है। ग्लैमर और सत्ता की हनक का नतीजा है कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता भी टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय के तौर पर चुनाव मैदान में उतर गए हैं और जिस पार्टी के लिए जीने-मरने की कसमें खाया करते थे, उसी के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। लेकिन गुजरात में एक ऐसा भी नेता था, जिसके खिलाफ किसी ने चुनाव ही न लड़ा। यह वह दौर था जब आपातकाल के बाद आई जनता दल की सरकार बिखर चुकी थी।


    पोरबंदर की कुतियाणा सीट से 1980 में निर्विरोध चुने गए

    इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस फिर से मजबूती से चुनाव लड़ रही थी और जनवरी में हुए सातवें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 353 सीट जीत कर पूर्ण बहुमत में आई। इसके बाद वर्ष 1980 में गुजरात में हुए विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को सफलता मिली, लेकिन चर्चा रही पोरबंदर जिले की कुतियाणा सीट की, जहां कांग्रेस के उम्मीदवार महंत विजयदासजी वीरदासजी के खिलाफ कोई उम्मीदवार ही नहीं खड़ा हुआ। गुजरात विधानसभा चुनाव के इतिहास में महंत एक मात्र उम्मीदवार हैं, जिनके खिलाफ किसी ने चुनाव नहीं लड़ा और वे निर्विरोध चुनकर विधानसभा पहुंचे।

    वोट प्रतिशत में भी सबसे बड़ी जीत महंत के नाम ही दर्ज

    पांचवें विधानसभा चुनाव के बाद हुए 1985 में गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर से कुतियाणा विधानसभा सीट से महंत विजयदास को अपना उम्मीदवार बनाया। इस बार जनसंघ भारतीय जनता पार्टी के रूप में एक नाम व हिंदुत्व के साथ मैदान में थी, लेकिन कुतियाणा की जनता ने भाजपा उम्मीदवार सतरेजा मिराग को बुरी तरह नकार दिया। पूरे विधानसभा क्षेत्र में 55,929 वोट पड़े, जो पूरे मत का 57.05% था। इसमें से महंत विजयदासजी को अकेले 52,214 वोट पड़े। इस तरह अब तक गुजरात चुनाव विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा मत प्रतिशत 94.40% से महंत विजयी हुए। भाजपा उम्मीदवार को 2.19 प्रतिशत वोट के केवल 1211 मत पड़े, जबकि 612 वोट रिजेक्ट हुआ। बाकी 9 उम्मीदवारों में अधिकतम वोट निर्दलीय उम्मीदवार मारू भोजा समत को अधिकतम 570 वोट मिले थे। यह भी यहां गौर करने वाली बात है कि महंत ने छठे विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी जीत भी दर्ज की थी।

    जीत का सम्मान : 2 बार मंत्री बने

    गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रहे महंत विजयदासजी को 1980 में निर्विरोध चुने जाने का कांग्रेस पार्टी ने रिवार्ड देते हुए माधवसिंह सोलंकी की सरकार में मंत्री बनाया, जबकि दूसरी बार जब 1985 में वे भारी मतों से चुनकर आए तो उन्हें दोबारा राज्य में मंत्री बनने का मौका मिला। इसके अलावा 1981 से 1985 तक उन्होंने गुजरात प्रदेश कांग्रेस प्रमुख का जिम्मा भी उठाया। 1990 में चुनाव नहीं लड़ा और राजनीतिक जीवन से दूर हो गए।

    कांग्रेस के जाडेजा ब्रिजराज सिंह हिम्मत सिंह के नाम सबसे कम मार्जिन से जीत

    गुजरात विधानसभा चुनाव के इतिहास में अब तक सबसे कम मार्जिन से हुई जीत में सौराष्ट्र की जामजोधपुर की सीट है। इस सीट पर 2007 में हुए चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार जाडेजा ब्रिजराजसिंह हिम्मतसिंह ने भाजपा के उम्मीदवार चिमनभाई शपरिया को 17 वोट से हराया था। इस सीट पर कांग्रेस को 43,254 तथा भाजपा को 43,237 वोट मिले थे।

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Web Title: Unique Leader Of Congress Mahant Vijaydas
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