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अरब सागर में है ये महादेव का मंदिर, समुद्र करता है शिवलिंग का जलाभिषेक

गुजरात शिव की नगरी, जहां महादेव बोल शुरू करते हैं बातचीत वहां है जल-थल के साथ सबसे ऊंचे पहाड़ पर शिवधाम।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 13, 2018, 08:21 AM IST

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    सूरत.विख्यात सोमनाथ मंदिर से लगभग तीन किमी दूर अधोई गांव में स्थित है यह प्राचीन शिव मंदिर। मंदिर की खास बात यह है कि यह अरब सागर की हद में आता है। यानी कि अरब सागर की मौजें ही प्रतिदिन शिवलिंग का अभिषेक करती हैं। इस मंदिर को ‘निष्कलंक महादेव मंदिर’ के नाम से जाना जाता है। मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है कि शिवलिंग के पास ही एक कुंड है, जिसमें अक्षय तृतीया के दिन गंगाजी प्रकट होती हैं। इस दिन यहां स्नान करने का बहुत महत्व है।

    पांडव कौरवों की हत्याओं से मुक्ति पाने यहां नहाने आए थे

    इस कुंड के बारे में एक और कथा प्रचलित है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने भाइयों की हत्याओं के पाप से मुक्ति के लिए इस कुंड में नहाने आए थे। कहा जाता है कि शिवलिंग के पास ही एक कुंड स्थित है, जिसमें अक्षय तृतीय के दिन गंगाजी प्रकट होती हैं। इस दिन यहां स्नान करने का बहुत महत्व है।

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    और मस्कट में पहुंचे मोदी जहां 109 वर्ष पहले कच्छ के गुजरातियों ने बनवाया था यह मंदिर

    मोदी आेमान के मस्कट में जिस शिव मंदिर में गए थे वह 109 वर्ष पुराना है। इस मंदिर को मोतीश्वर मंदिर नाम दिया गया। सुल्तान के महल से मात्र 35 किमी दूर इस मंदिर का गुजरात के कच्छ जिले के भाटिया परिवार ने निर्माण करवाया था। यह परिवार 1507 में मस्कट जाकर बस गया था।

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    भास्कर में पहली बार महाशिवरात्रि की नाइट...

    जूनागढ़ के भवनाथ महादेव में चल रहे पारंपरिक मेले का मंगलवार को अंतिम दिन है। सोमवार को चौथे दिन चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भवनाथ महादेव का दर्शन किए। मंगलवार को भवनाथ में दिगंबर साधुओं की सवारी निकलेगी। जिसमें दिगंबर साधु योग, कसरत करते हुए शामिल होंगे। नागा साधुओं की सवारी देखने के लिए श्रद्धालु रात से रूट पर बैठ जाते हैं। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी महाशिवरात्रि पर निकलने वाली नागा साधुओं की सवारी में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री भवनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे।

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