--Advertisement--

सूरत: लोकसभा के मुकाबले दोनों दलों को मिले ज्यादा वाेट, अस्मिता के मुद्दे से BJP को फायदा

कोली पटेल के एक लाख व मराठी समाज के 55 हजार मतों ने निभाई निणार्यक भूमिका

Danik Bhaskar | Dec 19, 2017, 08:44 AM IST
झंखना पटेल ने अपने निकटतम उम्म झंखना पटेल ने अपने निकटतम उम्म

सूरत. गुजरात के बाकी क्षेत्रों की तरह सूरत शहर में बीजेपी और कांग्रेस के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है। कांग्रेस ने भले ही 12 सीटों में से एक भी सीट जीतने में सफल न रही हो, लेकिन उसके वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी से पार्टी को भविष्य के लिए एक उम्मीद जगी है। वहीं पाटीदार आंदोलन का असर भले ही चुनाव परिणाम पर न दिखा हो, लेकिन पाटीदार बहुल सीटों पर कांग्रेस के वोट में वृद्धि दर्ज की गई है। शहर की 12 सीटों पर लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले थे। करीब उतने ही वोट विधानसभा के चुनाव मे बीजेपी के हिस्से आए हैं।


- सूरत की वैसे तो सभी सीटें बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का विषय थीं, लेकिन चौर्यासी सीट ऐसी थी जहां बीजेपी के ही बागी उम्मीदवार अजय चौधरी चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे थे। बीजेपी को डर था कि अजय चौधरी उसका खेल बिगाड़ सकते हैं।

- यही वजह है कि बीजेपी ने यहां स्थानीय नेताओं के साथ गृहमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्वांचल के बड़े नेता मनोज सिन्हा, दिल्ली बीजेपी प्रमुख मनोज तिवारी जैसे नेताओं को चुनाव प्रचार में उतारा। लेकिन, चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी उम्मीदवार झंखना पटेल की बड़ी जीत में अजय चौधरी का बड़ा योगदान है।

- तर्क है कि अजय चौधरी जिस तरह उत्तर भारतीय और हिंदीभाषी के नाम पर वोट मांग रहे थे उससे स्थानीय वोटरों का ध्रुवीकरण हो गया और इसका सीधा फायदा बीजेपी उम्मीदवार को मिला। यही वजह है कि झंखना पटेल गुजरात विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा वोटों से जीतने में सफल रहीं।

- उल्लेखनीय है कि झंखना पटेल ने अपने निकटतम उम्मीदवार कांग्रेस प्रत्याशी योगेश पटेल को लगभग 1 लाख 10 हजार वोटों से हराया। झंखना की तरह योगेश पटेल भी कोली पटेल समाज के थे, लेकिन नया चेहरा होने और झंखना द्वारा किए गए कार्यों को देखते हुए कोली पटेल, मराठी, राजस्थानी और बड़ी संख्या में हिंदीभाषी वोटरों ने भी बीजेपी पर ही विश्वास जताया। वहीं जिस समाज के दम पर अजय चौधरी चुनाव मैदान में उतरे थे, उसने पूरी तरह धोखा दिया और चौधरी को सिर्फ 9,708 वोटों से ही संतोष करना पड़ा।

कोली पटेल के एक लाख व मराठी समाज के 55 हजार मतों ने निभाई निणार्यक भूमिका

- चौर्यासी हिन्दी बाहुल्य होने के साथ स्थानीय बाहुल्य भी है। यहां कुल मिलाकर करीब एक लाख 25 हजार उत्तर भारतीय हैं। करीब एक लाख पांच हजार कोली पटेल और करीब 55 हजार मराठी। इसके साथ स्थानीय हलपति समाज के 4200 वोट, उड़ीसा के 15000, राजस्थानी 2200 तथा अन्य वोटरों की संख्या 7500 है।

- माना जा रहा है कि चौधरी द्वारा उत्तर भारतीय अस्मिता का मुद्दा उठाने से विशेषतौर पर कोड़ी पटेल, हलपति, उड़ीसा और राजस्थानी वोटरों का ध्रुवीकरण हो गया। इन वोटरों का अधिकांश वोट बीजेपी की झंखना पटेल के खाते में गया। वहीं बड़ी संख्या में हिंदीभाषी वोट जो पूरी तरह बीजेपी का समर्पित वोटर है उसका भी वोट बीजेपी को गया। यही वजह रही कि झंखना इतनी बड़ी मार्जिन से जीतने में सफल रही।

प्रमुख कारण : हिंदीभाषी वोटरों के लिए उत्तर भारतीय नेताओं ने संभाला मोर्चा
- पार्टी के हिंदीभाषी बागी उम्मीदवार के आक्रामक चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने यहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। गृहमंत्री गुजरात चुनाव में बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं थे। बावजूद इसके उन्होंने चौर्यासी और हिंदीभाषी बहुल क्षेत्र के उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार किया।

- यूपी के नवनिर्वाचित हिंदुत्ववादी नेता योगी आदित्यनाथ दो बार चुनाव प्रचार करने के लिए आए। साउथ गुजरात में पूर्वांचल और बिहार में लोकप्रिय भोजपुरी अभिनेता और दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी भी दो बार यहां चुनाव प्रचार करने आए, जबकि पूर्वांचल के बड़े नेता व केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा भी दो बार चुनाव प्रचार करने आए।

भविष्यवाणी : मनोज सिन्हा ने पहले ही कर दी थी बड़ी जीत का दावा
- पूर्वांचल के कद्दावर नेता माने जाने वाले केन्द्रीय राज्यमंत्री मनोज सिन्हा का गुजरात चुनाव में बड़ा योगदान रहा। विशेषतौर पर हिंदीभाषी विधानसभा में उन्होंने जमकर प्रचार किया। चौर्यासी में भी उन्होंने दो बार चुनाव प्रचार किया।

- उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव प्रचार के दौरान की बैठक में दावा किया था चौर्यासी सीट उत्तर भारतीय वोटर बीजेपी के साथ है। उन्होंने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा था कि बीजेपी चौर्यासी की सीट लगभग एक लाख वोटों से जीतेगी। उनकी भविष्यवाणी सही साबित हुई। बीजेपी की झंखना पटेल ने यह सीट लगभग एक लाख 10 वोटों से जीत लिया।