सूरत

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पोरबंदर: सौ साल पहले अंडरग्राउंड टंकी में सहेजते थे पानी

आधुनिक युग में भूगर्भ टंकी न होने से पानी की समस्या विकट, पोरबंदर में पहले भूगर्भ में टंकी बनाकर बरसात का पानी संग्रह हो

Danik Bhaskar

Mar 13, 2018, 06:07 AM IST

पोरबंदर. समुद्र के किनारे बसे पोरबंदर में भी पानी की समस्या विकट होती जा रही है। समुद्र के किनारे होने के कारण भूगर्भ के खारे पानी का भी उपयोग नहीं हो सकता है। पानी की समस्या को दूर करने के लिए भूगर्भ पानी की टंकी काफी उपयोगी हो सकती है। पोरबंदर शहर में आज से डेढ़ से दो सौ साल पहले हर घर के भूगर्भ में पानी की टंकी बनाई जाती थी। 100 साल से अधिक पुराने घरों में आज भी भूगर्भ टंकी मौजूद हैं। समुद्र के किनारे बसे होने के कारण यहां जमीन के नीचे का पानी भी खारा है। पानी की समस्या को दूर करने के लिए लोग बरसात में भूगर्भ टंकी में मीठा पानी भरते थे। बरसात में टंकी में भरा गया पानी सालभर पीने के लिए पर्याप्त होता था।

- आधुनिक युग की शुरूआत होते ही लोग पीने के लिए पानी के लिए महानगरपालिका, नगरपालिका पर निर्भर हो गए। इसका परिणाम यह हुआ कि लोग घरों में भूगर्भ टंकी बनाना बंद कर दिए। हाल के जल संकट को देखते हुए लोग फिर से घरों में भूगर्भ टंकी बनाकर पानी का संग्रह कर सकते हैं। टंकी में संग्रह किया गया पानी अनेक लोगों की समस्या को दूर कर सकता है।

भूगर्भ टंकी क्या है?
बरसात में मकान के छतों पर इकट्‌ठा हुआ पानी गटर और रास्तों से होते हुए समुद्र में बह जाता है। बरसाती पानी को पाइप आदि के माध्यम से मकान के भूगर्भ में बनी टंकी को भरा जा सकता है। बरसात बंद होने के बाद इस पानी का जरूरत के अनुसार उपयोग हो सकता है।


भूगर्भ टंकी के लिए मदद दी जानी चाहिए
पुराने मकानों के निचले हिस्से में बनी भूगर्भ टंकी पानी संग्रह के लिए बहुत उपयोगी साबित हो रही हैं। इस प्रकार की टंकी बनाने के लिए सरकार द्वारा आर्थिक मदद दी जानी चाहिए। पोरबंदर के निवासियों ने बताया कि नए मकानों में भूगर्भ टंकी बनाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे पानी का संग्रह किया जा सकता है।

मोदी ने ‘मन की बात’ में भूगर्भ टंकी का उल्लेख किया था

कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के दौरान पोरबंदर की भूगर्भ टंकी का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि बरसात के पानी को संग्रह करने के लिए गांधीजी के जन्मस्थल पोरबंदर में आज भी भूगर्भ टंकियां मौजूद हैं। इस योजना का पूरे देश में अमल किया जाए तो पानी की समस्या को कम किया जा सकता है। प्रधानमंत्री के प्रयास के बावजूद लोगों में जागरूकता की कई दिखाई दे रही है।

पानी बचाने की अच्छी पहल, अब छोटे मकानों, ऑफिस, दुकानों में ड्युअल फ्लैश होगा तो ही मिलेगी एनओसी

- राज्य सरकार पानी बचाने के लिए सघन प्रयास कर रही है। पानी बचाने के लिए ड्युअल फ्लैश सिस्टम पर अमल करने की सरकार तैयारी कर रही है। विभिन्न सरकारी विभागों में 15 दिनों से इस पर प्रयास किया जा रहा है। प्रयास के तहत सोमवार को विभिन्न विभागों की बैठक हुई। हालांकि अधिकारिक मंजूरी मिलनी अभी बाकी है।

- विश्वस्त सूत्रों के अनुसार सकरार जल्द ही नए मकान, आॅफिस, दुकान में ड्युअल फ्लैश सिस्टम अनिवार्य करेगी। ड्युअल फ्लैश सिस्टम की शर्त के साथ नए मकानों, शॉपिंग सेंटर की मंजूरी दी जाएगी। राज्य में गृह उपयोग और रिहाइशी इलाकों के टॉयलेट में अब तक छह लीटर और आठ लीटर दो प्रकार का फ्लैश टैंक रखा जाता है। फ्लैट टैंक में पेशाब और टॉयलेट के लिए एक समान पानी का उपयोग होता है। यानी कि छह लीटर की क्षमता की टैंक हो तो छह लीटर और अाठ लीटर की टैंक हो तो आठ लीटर पानी का उपयोग होता है। ऐसी स्थिति में पेशाब और टॉयलेट में कम, ज्यादा पानी के उपयोग वाली फ्लैश टैंक दी जाएगी।

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