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व्यापारियों की दिक्कतें सुन जेटली ने कहा- कमेटी बना दिल्ली आओ, निकालेंगे रास्ता

अरुण जेटली ने सूरत के कपड़ा व्यापारियों से मुलाकात कर जीएसटी सहित कई मुद्दों पर बात की।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 27, 2017, 03:17 AM IST

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    सूरत.गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर रविवार को सूरत पहुंचे वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सूरत के कपड़ा व्यापारियों से मुलाकात कर जीएसटी सहित कई मुद्दों पर बात की। एक निजी होटल में सूरत के वीवर्स, ट्रेडर्स और प्रोसेसर्स इसमें शामिल रहे। इस मीटिंग में कपड़ा व्यापारियों ने खुलकर अपनी मांग अरुण जेटली के समक्ष रखा। अरुण जेटली ने सभी की बात सुनी।

    ई-वे बिल, क्वार्टरली रिटर्न, इनपुट टैक्स क्रेडिट, ओपनिंग स्टॉक पर क्रेडिट सहित कई समस्या पर अरुण जेटली ने कहा कि देश भर में एक समान ई-वे बिल लागू करने और टेक्सटाइल की समस्याओं के निराकरण के लिए 4 लोगों की कमेटी बनाकर दिल्ली आने को कहा। उन्होंने कहा कि जीएसटी बाद टैक्स चुकाने वाले शहरों में सूरत का 53वां नंबर है। इन डाइरेक्ट 17 फीसदी टैक्स था, जिसमें राज्यों को स्टैंडर्ड एक्साइज 12.5 और वैट 14.4 फीसदी था।

    उल्लेखनीय है कि जीएसटी के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान जीएसटी हटाने की मांग को लेकर सूरत से जीएसटी संघर्ष समिति 17 जुलाई को अरुण जेटली से मिली थी। उस समय उन्होंने साफ कहा था कि जीएसटी नहीं हटेगा, सरलीकरण के मुद्दे हो तो बताइए। उस समय मनसुख मंडविया द्वारा दिए गए 13 मुद्दों पर चर्चा तो हुई थी।

    फोस्टा : जीएसटी से व्यापारी अभी भी परेशान

    फोस्टा प्रमुख मनोज अग्रवाल ने कहा, जीएसटी से पहले प्रतिदिन 4 करोड़ मीटर कपड़ा उत्पादन होता था, लेकिन अब घटकर 2.5 करोड़ मीटर हो गया है। समस्या जीएसटी नहीं पर जीएसटी की प्रक्रिया और कुछ नियमों से है। कुछ कठिनाइयों के कारण कारोबार कठिन होता जा रहा है। ट्रेडर की मुख्य मांग है कि सभी के लिए क्वार्टरली रिटर्न रखा जाए, आरसीएम को हमेशा के लिए मुक्त किया जाए ओर इ-वे बिल नेशनलाइज किया जाए।

    जवाब : वित्तमंत्री ने कहा, जीएसटी से व्यापारियों को जो भी परेशानी है, उसके लिए 4 लोगों की एक कमेटी बनाकर दिल्ली आइए। जो भी समस्या है मिलकर दूर करने की कोशिश करेंगे। ई-वे बिल से जुड़े प्रश्न का जवाब देते हुए कहा, 31 दिसंबर तक ई-वे बिल स्थगित रखा गया है। उसके बाद 31 मार्च तक देश भर में एक समान ई-वे बिल लागू करने को लेकर चर्चा की जाएगी।

    विवर्स : अलग-अलग स्लैब से बढ़ी परेशानी

    फियासवी चेयरमैन भरत गांधी ने कहा, विविंग इंडस्ट्री की इनपुट टैक्स क्रेडिट और ओपनिंग स्टॉक पर क्रेडिट की समस्या हल नहीं हुई। यार्न को 18 में से 12 स्लैब में लाया गया, लेकिन फाइनल प्रोडक्ट पर 5 फीसदी जीएसटी है। जिसके चलते इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर का इनफ्लो बरकरार नहीं रहता। इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई जाती है लेकिन उसका नोटिफिकेशन जारी नहीं किया जाता। इम्पोर्ट सिल्क स्थानिक बाजार से 40 रुपए सस्ता है।

    जवाब : वित्तमंत्री ने कहा, सिंगापुर में एक जीएसटी है, लेकिन भारत में एक जीएसटी मुमकिन नहीं है। साबुन और मर्सिडीज पर एक समान जीएसटी मुमकिन नहीं है। जीएसटी बाद जैसे-जैसे रेवन्यू बढ़ती गई। वैसे-वैसे नीचे लाते गए। 28 फीसदी के स्लैब में लग्जरियस तथा डिमेरिट प्रोडक्ट ही रखी गई है।

    व्यापारी : जीएसटीआर 1-2 क्वार्टरली रखें

    कपड़ा व्यापारी रंगनाथ सारडा ने कहा, 3 बी रिटर्न भले ही हर माह सबमिट करना पड़े, लेकिन जीएसटीआर 1 और जीएसटीआर 2 क्वार्टरली रखिए। जिससे व्यापारियों का समय बचे। इसके अलावा आरसीएम में से मुक्ति और आईटीसी 4 में राहत दी जाए। वैल्यूएडिशन के काम के लिए कपड़ा 10 जगह जाता है जिससे कागजी कार्य बढ़ जाता है। सरकार को भी इससे कोई फायदा नहीं है। इससे राहत दी जाए।

    जवाब : जवाब- वित्तमंत्री ने कहा, सूरत के व्यापारी काफी समझदार हैं। उन्होंने महत्वपूर्ण मुद्दे उठाएं हैं। सरकार इन सभी मुद्दों से वाकिफ हंै और सभी समस्याओं के समाधान के लिए काम भी कर रही है। उन्होंने सभी मुद्दों पर बात करने के लिए व्यापारियों को दिल्ली आने को कहा। साथ ही आश्वासन दिया कि उनकी जो भी समस्याएं हैं उन्हें आसान किया जाएगा।

    तकनीक : पोर्टल बनी सबसे बड़ी समस्या

    एसजीटीटीए महामंत्री सुनील जैन ने कहा, जीएसटी में पोर्टल की समस्या सब से बड़ी समस्या है। तकनीकी खराबी के कारण कई बार टैक्स नहीं भर पाते। उसके बाद पेनल्टी भी चुकानी पड़ती है। दीपावली तक कपड़ा कारोबार की हालत खराब रही, लेकिन आने वाला साल अच्छा रहे इस प्रकार की राहत दी जाए। 10 साल का बच्चा नाराज होकर घर से चला गया हो ऐसी ही स्थिति व्यापारियों की है। हमारे पास कमल के अलावा अन्य कोई विकल्प ही नहीं।

    जवाब : वित्तमंत्री ने कहा, जीएसटी पोर्टल को लेकर काफी शिकायतें मिली हैं। इसकी वजह से सितंबर महीने में जीएसटी टैक्स भी कम हुआ है। संबंधित अधिकारियों को इसके लिए निर्देश दे दिया गया है। ऑब्जर्व भी किया जा रहा है। जो भी समस्या सामने आएगी उसे हल करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

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