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भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट : जाति नहीं, यहां कैंडिडेंट्स के दांव-पेंच होंगे निर्णायक

गिर-सोमनाथ जिले की राजनीति जातिगत है पर यहां राजनैतिक दिग्गजों का दांव-पेंच जीत में अहम साबित होता है।

Bhaskar News| Last Modified - Nov 26, 2017, 04:31 AM IST

Bhaskar Ground Report about Somnath and Gir Assembly seats
भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट : जाति नहीं, यहां कैंडिडेंट्स के दांव-पेंच होंगे निर्णायक

जूनागढ़.  गिर-सोमनाथ जिले की राजनीति जातिगत है पर यहां राजनैतिक दिग्गजों का दांव-पेंच जीत में अहम साबित होता है। सोमनाथ और तालाला सीट पर हमेशा हार-जीत का अंतर बहुत कम रहा है। इसमें एक-दो गांव का मत निर्णायक होता है। 

 

उना : पूर्व विधायक नाराज, भाजपा के लिए बड़ी चुनौती 

2012 में कांग्रेस के पुंजाभाई वंश ने भाजपा के केसी राठवा को हराया था। कांग्रेस ने फिर इन्हें रिपीट किया है। भाजपा ने पूर्व विधायक राठोड के बदले गिर-सोमनाथ जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष हरिभाई सोलंकी को मैदान में उतारा है। दोनों पार्टियों के उम्मीदवार कोली समाज से हैं। टिकट कटने के बाद पूर्व विधायक को मनाने में भाजपा जुटी है। यहां कांटे की टक्कर है। 

 

तालाला : जिला पंचायत के उपाध्यक्ष भाजपा की जीत में रोड़ा, निर्दलीय से हो सकती है परेशानी 
भाजपा ने उपचुनाव में इस सीट पर कब्जा जमाया था। इस चुनाव में भाजपा के गोविंदभाई परमार और कांग्रेस के भगवान बारड के बीच कांटे की टक्कर होगी। जिला पंचायत उपाध्यक्ष के निर्दलीय मैदान में उतरने से भाजपा की परेशानी बढ़ सकती है।       

 

कोडीनार :  सांसद के समर्थन से जीत हाेगी आसान, टिकट का भी होगा असर  
संसदीय सचिव जेठाभाई सोलंकी का टिकट कटने से भाजपा को कितना नुकशान होगा इस पर हार-जीत का आधार है। कारडिया समाज का जनाधार अधिक होनेसे दीनू सोलंकी जिसका समर्थन करेंगे उसके ही जीतने की संभावना है।

 

सोमनाथ : भाजपा के पूर्व नेता मतों के गणित का खेल बिगाड़ेंगे 
भाजपा के पूर्व नेता जगमाल वाणा इस बार भी मतों का गणित बिगाड़ सकते हैं। यहां खारवा, मुस्लिम, कोली, आहिर, कारडिया मतदाताओं का जनाधार अधिक है। किसी विशेष जाति का इस सीट पर वर्चस्व नहीं है।

 

धारी-बगसरा : पाटीदार होंगे निर्णायक, मजबूत उम्मीदवार न होने का खामियाजा भुगतेगी बीजेपी
भाजपा के पास मतबूत उम्मीदवार न होने के कारण संघाणी को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने 2012 के चुनाव में हारे जेवी काकडिया को रिपीट किया है। इस सीट पर पाटीदार मतदाता हार-जीत में निर्णायक होंगे।

 

राजुला-जाफराबाद : कोली मतदाताओं पर टिकी हार-जीत 
कोली समाज के गढ़ में भाजपा ने कोली नेता हीराभाई साेलंकी को रिपीट किया है। कांग्रेस ने आहिर समाज के अंबरीश डेर को मैदान में उतारा है। कोली समाज का कोई विकास न होने के कारण कौन जीतेगा सह सबसे बड़ा सवाल है।
 

सावरकुंडला-लीलिया : पाटीदार आंदोलन के असर पर होगी नजर 
कांग्रेस ने प्रताप दूधात को रिपीट किया है। भाजपा ने कृषि मंत्री और पूर्व विधायक का पत्ता काटकर नए उम्मीदवार कमलेश कानाणी को मैदान में उतारा है। यह पाटीदारों का गढ़ है। इस सीट पर पाटीदार आरक्षण आंदोलन का सबसे ज्यादा असर है। यहां पाटीदारों का मजबूत जनाधार है। पाटीदार उम्मीदवारों के हार-जीत में मुख्य भूमिका निभाते रहे हैं। 

 

 

 

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