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बीजेपी-कांग्रेस के लिए असंतुष्ट बने मुसीबत चेतावनी- कैंडिडेट्स को हराने का करेंगे काम

प्रत्याशियों की घोषणा होने के बाद टिकट न मिलने से कई नेता नाराज हैं।

Danik Bhaskar | Nov 25, 2017, 04:02 AM IST

सूरत. गुजरात विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों को अपने ही दल के नेताओं को मनाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ रही है। प्रत्याशियों की घोषणा होने के बाद टिकट न मिलने से कई नेता नाराज हैं। सूरत की ओलपाड विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशियों को मानने से इनकार कर दिया है। दोनों पार्टियों में नाम की घोषणा के बाद हाईकमान को चेतावनी और इस्तीफा देने का सिलसिला चल रहा है।


ओलपाड से भाजपा के दो पूर्व विधायक किरीट पटेल और धनसुख पटेल इस बार चुनाव में दावेदारी कर रहे थे। इनके अलावा तहसील पंचायत के पूर्व प्रमुख समेत 27 अन्य नेताओं ने भी मुकेश पटेल की दावेदारी का विरोध किया था। इनमें अरविंद पटेल, प्रवीण टेलर, हितेष पटेल समेत अन्य शामिल हैं। पार्टी निरीक्षकों के सामने ही नेताओं ने इस सीट से किसी और को टिकट देने की सलाह दी थी। लेकिन पार्टी हाईकमान ने स्थानीय नेताओं की बातों को दरकिनार कर मुकेश पटेल को दोबारा इस क्षेत्र से मौका दिया। इससे भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं की नाराजगी बढ़ गई। ओलपाड विधानसभा क्षेत्र में हो रही चर्चाओं की मानें तो दोनों पूर्व विधायक खुले तौर पर मुकेश पटेल को समर्थन देने से कतरा रहे हैं। वे सामने से तो विरोध नहीं कर रहे, मगर उनके साथ दिखने से बच रहे हैं। स्थानीय नेताओं के इस विरोध को दूर करने के लिए मुकेश पटेल और उनके समर्थक लगातार बैठकें कर रहे हैं।

कांग्रेस प्रत्याशी के विरोध में जिप सदस्य

ओलपाड विधानसभा में भाजपा जैसा ही हाल कांग्रेस का भी है। जिला पंचायत सदस्य दर्शन नायक और गिरीश पटेल ने पार्टी द्वारा घोषित उम्मीदवार योगेंद्र सिंह बाकरोला को टिकट देने का खुलेआम विरोध किया था। यही नहीं, इन नेताओं ने वर्तमान प्रत्याशी के विरोध के साथ-साथ पार्टी को चुनाव में हराने तक की धमकी दे दी थी। नौबत यहां तक आ पहुंची कि दर्शन नायक के पास समर्थन के लिए पहुंचे बाकरोला काे दर्शन ने सीधे कह दिया कि समर्थन तो दूर की बात है, वे उन्हें हराने के लिए काम करेंगे।

कोली पटेल समुदाय के मतों पर पड़ सकता है असर

ओलपाड के समुद्र तटीय इलाके के गांवों में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नाराज नेताओं की अच्छी पकड़ मानी जाती रही है। ऐसे में स्थानीय नेताओं के निष्क्रिय रहने से भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के चुनाव पर असर पड़ सकता है। ओलपाड की राजनीति से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भाजपा को जहां ज्यादा नुकसान की आशंका जताई जा रही है, वहीं कांग्रेस को भी उसके मत प्रतिशत कम होने का खतरा नजर आ रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों में ओलपाड तहसील के 50 तटीय गांवों में 80 फीसदी वोटिंग करवाने में इन नेताओं की प्रमुख भूमिका रही है। कांति पटेल, किरीट पटेल, धनसुख पटेल, अरविंद पटेल जैसे भाजपा नेताओं के निष्क्रिय रहने से खतरा और ज्यादा है। वहीं, कांग्रेस के दर्शन नायक किसानों के प्रमुख रहनुमा माने जाते हैं। ओलपाड के सायण, सांधियेर, परिया, देलाड, कीम समेत 25 गांवों में दर्शन नायक की नाराजगी कांग्रेस को भारी पड़ सकती है।