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जमानत नहीं बचा पाते निर्दलीय, पिछली बार 668 में से 662 का यही हश्र, 1 जीता

2012 के विधानसभा चुनाव में 668 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरे। इनमें से 662 की जमानत जब्त हो गई।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 26, 2017, 04:23 AM IST

  • जमानत नहीं बचा पाते निर्दलीय, पिछली बार 668 में से 662 का यही हश्र, 1 जीता

    सूरत.2012 के विधानसभा चुनाव में 668 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरे। इनमें से 662 की जमानत जब्त हो गई। जीतने वालों में सिर्फ एक ही उम्मीदवार था। पांच ने किसी तरह जमानत बचाई। निर्वाचन आयोग के आंकड़े बताते हैं कि इन निर्दलीय प्रत्याशियों के पक्ष में महज 5.83 प्रतिशत ही वोट पड़े। इन तथ्यों से आप समझ सकते हैं कि गुजरात के मतदाता तीसरे मोर्चे या किसी पार्टी पर भरोसा नहीं करते।

    यही वजह है कि पिछले तीन दशकों से भी ज्यादा समय से यहां दो दलीय व्यवस्था में ही चुनाव होते रहे हैं। इस बार भी सियासी स्थितियां ऐसी ही हैं। आम आदमी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, जदयू या अन्य क्षेत्रीय दल अपनी उपस्थिति तो जरूर दर्ज करा रहे हैं, लेकिन चुनावी परिदृश्य वस्तुत: भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के इर्द-गिर्द ही घूम रहा है।


    गुजरात की जनता ने तीसरे विकल्प के बारे में कम ही सोचा है। 1990 के चुनाव में मतदाताओं ने जनता दल को 70 सीट देकर सबसे बड़े दल के रूप में चुन कर विधानसभा भेजा। लेकिन बाद के दिनों में जनता दल के चिमनभाई पटेल ने सत्ता बचाने के लिए विधायकों के साथ अपने दल का कांग्रेस में विलय कर लिया। यह घटना प्रदेश में किसी तीसरी पार्टी के लिए अंतिम साल साबित हुई। जनता का तीसरी पार्टी पर विश्वास टूटा, जो अब तक जारी है। 1990 के बाद से हुए लगातार पांच विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के अलावा कोई दल दहाई के अंक को भी पार नहीं कर पाया है।

    2012 के चुनाव में तो स्थिति और भी बदतर हो गई। भाजपा और कांग्रेस के अलावा सबसे ज्यादा सीटों पर एनसीपी ने चुनाव लड़ा, लेकिन इसका वोट प्रतिशत सिर्फ 0.95 प्रतिशत रहा। वहीं, सबसे बुरी स्थिति गुजरात परिवर्तन पार्टी की रही। माना जा रहा था कि यह पार्टी भाजपा को भारी नुकसान पहुंचाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। जनता ने जीपीपी को बुरी तरह नकार दिया।

    1288 उम्मीदवारों की जमानत जब्त

    2012 के विधानसभा चुनाव में कुल 182 सीटों पर 1666 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमाने उतरे थे। इसमें से 1288 की जमानत जब्त हो गई। इनमें सबसे ज्यादा बीएसपी और गुजरात परिवर्तन पार्टी के प्रत्याशी थे। जीपीपी महज 3.83 प्रतिशत वोट के साथ केवल दो सीटें जीत पाईं, वहीं बीएसपी मात्र 1.25 प्रतिशत के साथ किसी सीट पर नहीं जीत सकी। अलबत्ता जनता दल यूनाइटेड के छोटू बसावा ने एक सीट जीतकर अपनी पार्टी की लाज रखी। इसे भी व्यक्तिगत जीत ही बताया जाता है। चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों को 5.83 प्रतिशत वोट ही मिले। यानी 182 सदस्यीय विधानसभा में 0.55 प्रतिशत सीट पर ही निर्दलीय के हक में आई।

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