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पंचायत चुनाव के परिणाम, नोटबंदी और जीएसटी के सहारे है कांग्रेस

22 साल से गुजरात में राजनीति वनवास काट रही कांग्रेस के लिए पंचायत चुनाव परिणाम किसी संजीवनी से कम नहीं था।

​वीरेन्द्र कुमार राय | Last Modified - Nov 23, 2017, 02:25 AM IST

  • पंचायत चुनाव के परिणाम, नोटबंदी और जीएसटी के सहारे है कांग्रेस

    सूरत.13वें विधानसभा चुनाव में ऐसे ही नहीं कांग्रेस के चुनाव अभियान को अंडर करंट बोला जा रहा है, दरअसल इसकी नींव 2015 में हुए गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव में पड़ गई थी। जब कांग्रेस ने ग्रामीण इलाके में जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुए राज्य की 31 जिला पंचायतों में से 21 सीटों पर कब्जा किया था, जबकि 2010 में कांग्रेस के पास सिर्फ 2 जिला पंचायत सीट थी। 230 तालुका पंचायतों में 4778 सीटों में से कांग्रेस ने 2509 को जीत मिली, जबकि बीजेपी को 1981 सीट से ही संतोष करना पड़ा था।

    22 साल से गुजरात में राजनीति वनवास काट रही कांग्रेस के लिए यह परिणाम किसी संजीवनी से कम नहीं था। वहीं शहरी निकायत चुनाव में बीजेपी ने सभी 6 नगर निगमों और 56 में से 40 नगर पालिकाओं पर कब्जा जमाया था, लेकिन इसमें भी कांग्रेस के लिए अच्छी खबर छिपी थी।


    कांग्रेस ने नगर निगमों में 2010 के चुनाव के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया था। 6 में से 5 नगर निगमों में बीजेपी की सीटों की संख्या घटी थी। कांग्रेस नेताओं के दावों के मुताबिक, विधानसभा सीटों के लिहाज से इन नतीजों को देखा जाए तो 182 विधानसभा क्षेत्रों में से 90 पर कांग्रेस को बढ़त मिली थी, जबकि बीजेपी 72 सीटों पर ही सिमट गई थी। फिलहाल बीजेपी के पास 116 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस के पास 59 सीट है। ऊपर से केन्द्र सरकार की नोटबंदी और जीएसटी से भी कांग्रेस को उम्मीद है। यही वजह है कि इस बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ज्यादा मुखर है और गड़े मुर्दे उखाड़ने की बजाय गुजरात के विकास, किसानों की समस्या, नोटबंदी के बाद हुई परेशानी व जीएसटी से चौपट हुए व्यापार को अदम मुद्दा बना रही है।

    मनपा चुनावों के नतीजे थे सकारात्मक

    अहमदाबाद
    2015 में अहमदाबाद नगर निगम की 192 सीटों पर चुनाव हुए, जिसमें भाजपा को 143 और कांग्रेस को 52 सीटें मिलीं। गौर करने वाली बात यह है कि 2010 के चुनाव में बीजेपी के पास 151 सीटें थीं और कांग्रेस के पास 38। ऐसे में बीजेपी को चुनाव में 9 सीटों का नुकसान हुआ है।

    सूरत
    सूरत महानगर पालिका चुनाव में 116 सीटों में से बीजेपी ने 82 सीटें जीती थी, जबकि कांग्रेस को महज 34 सीटों पर ही जीत मिल सकी थी। 2010 में बीजेपी के पास 98 सीटें थीं, जबकि कांग्रेस के पास 14 सीटें थी। इस तरह बीजेपी यहां जीती जरूर, लेकिन उसे 16 सीटों का नुकसान हुआ है।

    भावनगर
    भावनगर महानगर पालिका की 52 सीटों में से भाजपा ने 34 सीटों पर कब्जा जमाया था। वहीं कांग्रेस के हिस्से में 18 सीटें आई थीं। गौरतलब है कि बीजेपी ने 2010 में 41 सीटें जीती थीं, इस तरह उस 7 सीटों का नुकसान हुआ। कांग्रेस ने 10 सीटें जीती थी और उसे 8 सीटों का फायदा हुआ।

    वडोदरा
    बीजेपी ने वडोदरा की 76 सीटों में से 58 और कांग्रेस ने 14 पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। 2010 में बीजेपी के पास जहां 61 सीटें थीं, वहीं कांग्रेस ने महज 11 सीटें अपने नाम की थीं। इस तरह भाजपा को वडोदरा में 3 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा, जबकि कांग्रेस को इतने का लाभ हुआ।

    राजकोट
    बीजेपी ने राजकोट की 72 में से 38 सीटों पर कब्जा किया, जबकि कांग्रेस यहां भी महज 34 सीटें ही हासिल कर सकी थी। 2010 में बीजेपी ने यहां 57 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस तरह उसे 19 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था। वहीं विपक्षी कांग्रेस की सीटों की संख्या में 23 का इजाफा हुआ।

    जामनगर
    जामनगर अकेली ऐसी महानगर पालिका थी जहां बीजेपी को पिछले चुनाव के मुकाबले बढ़त मिली। बीजेपी ने यहां 64 में से 38 सीटों (3 सीट का लाभ) पर कब्जा किया, जबकि कांग्रेस 24 सीटें हासिल करने में कामयाब रही। 2010 में बीजेपी को यहां 35 और कांग्रेस को 16 सीटें मिली थी।

    दोनों दलों को बेहतर परिणाम की उम्मीद

    राज्य कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी ने कहा, “भाजपा के लिए गुजरात में पिछले दो दशकों में यह सबसे बड़ा झटका है। राज्य में अंबाजी से लेकर उमरगाम और कच्छ से लेकर दाहोद तक लोगों ने इस चुनाव में कांग्रेस का साथ दिया है। यह कहा जा सकता है कि यह इस बात का एक संकेत है कि विधानसभा चुनाव में क्या होने जा रहा है।’ भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि स्थितियां कैसी होंगी। कोई भी अपने पत्ते नहीं खोल रहा, लेकिन आने वाले दिन दिलचस्प जरूर होंगे।’ सौराष्ट्र से भाजपा के एक नेता ने बताया कि किसानों में नाराजगी और बढ़ती कीमतों का भी चुनाव के नतीजों पर असर पड़ा है। सौराष्ट्र में 11 में से 9 जिला पंचायतों में कांग्रेस के हाथों भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा नेता ने कहा कि किसान कपास और मूंगफली के समर्थन मूल्य के साथ ही बढ़ती कीमतों के कारण भी नाखुश हैं।

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Web Title: Local Body Elections Effects Assembly Election
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