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बांध टूटने के बाद हर तरफ थी इंसानी लाशें, बदबू के चलते सांस लेना भी था दूभर

11 अगस्त 1979 को मच्छू बांध टूटने से एक हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 30, 2017, 01:57 AM IST

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    मच्छू बांध हादसे को जिसने भी देखा, वे आज भी उसे याद कर सिहर उठते हैं।

    सूरत. बुधवार को गुजरात में मोरबी की रैली में मोदी ने कहा कि ‘मच्छू बांध त्रासदी के बाद राहत कार्य के दौरान राहुल गांधी की दादी इंदिराबेन मुंह पर रूमाल डाले दुर्गंध और गंदगी से बच रही थीं। जबकि, संघ के कार्यकर्ता कीचड़ व गंदगी में घुस कर सेवाभाव से काम कर रहे थे। गुजराती मैगजीन चित्रलेखा ने इंदिरा की तस्वीर पर राजकीय गंदगी और संघ के कार्यकर्ताओं की तस्वीर पर मानवता की महक का शीर्षक लगाया था।’

    हकीकत: मुंह पर रूमाल बांधे संघ के लोगों की भी तस्वीर छपी थी

    11 अगस्त 1979 को मच्छू बांध टूटने से एक हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। तब चौधरी चरण सिंह पीएम थे। गुजरात में भी जनता पार्टी की सरकार थी। इंदिरा गांधी के 16 अगस्त के मोरबी दौरे के बाद पत्रिका ने दो तस्वीरें छापी। पहले में इंदिरा के मुंह पर रुमाल था। दूसरी में शव ले जाते संघ के लोगों ने भी मुंह बांध रखे थे। फोटो के ऊपर लिखा था- मोरबीनु जलतांडव, नीचे लिखा था-गंधाती पशुता, महकती मानवता।

    तीन दिन की लगातार बारिश से ओवरफ्लो हो गया था डैम...

    मच्छू बांध हादसे को जिसने भी देखा, वे आज भी उसे याद कर सिहर उठते हैं। लगातार बारिश और अन्य स्थानों से आए पानी के कारण मच्छु डैम टूट गया था, जिससे कुछ ही देर में पूरे शहर में तबाही मच गई थी।


    Total Recll : आखिर हुआ क्या था उस दिन?
    - 11 अगस्त 1979 को दोपहर सवा तीन बजे डैम टूट गया और 15 मिनट में ही पूरा शहर पानी में डूब गया था। दो घंटे के अंदर मकान और इमारतें जमींदोज होने लगीं। लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला था।

    - हजारों की संख्या में पशुओं की भी मौत हो गई थी। कुछ ही देर में पूरा शहर मानो श्मशान बन गया था। हर साल लोग 11 अगस्त को इस हादसे को याद करते हैं। आज मोरबी एक बार फिर विकास की दिशा में बढ़ रहा है, लेकिन लोग उस हादसे को याद कर आज भी सिहर जाते हैं। जिन परिवारों का सब कुछ लुट गया, उनके दुखों को किसी भी तरह से कम नहीं किया जा सकता।

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    हजारों की संख्या में पशुओं की भी मौत हो गई थी।
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    बारिश और अन्य स्थानों से आए पानी के कारण मच्छु डैम टूट गया था, जिससे कुछ ही देर में पूरे शहर में तबाही मच गई थी।
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    दो घंटे के अंदर मकान और इमारतें जमींदोज होने लगीं।
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    कुछ ही देर में पूरा शहर मानो श्मशान बन गया था।
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    11 अगस्त 1979 को दोपहर सवा तीन बजे डैम टूट गया।
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    लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला था।
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    हर साल लोग 11 अगस्त को इस हादसे को याद करते हैं।
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Web Title: Morbi Dam Accident Reality
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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