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10 घंटे तक दो माह का बच्चा बिना दूध पिए तड़पता रहा, डॉ. बोले ऐसा तो होता रहता है

​सूर्यकांत तिवारी | Last Modified - Nov 18, 2017, 04:34 AM IST

भटार स्थित आजाद नगर निवासी नीलेश भाई सखाराम खरोसे का दो माह का बेटा दक्ष जन्म से ही दिमागी बीमारी से पीड़ित है।
  • 10 घंटे तक दो माह का बच्चा बिना दूध पिए तड़पता रहा, डॉ. बोले ऐसा तो होता रहता है

    सूरत.सिविल हॉस्पिटल में मरीजों के साथ लापरवाही का एक और हृदयविदारक मामला सामने आया है। घटना शुक्रवार की है, जब महज दो माह के बच्चे के एमआरआई जांच के लिए उसे करीब 10 घंटे तक इंतजार कराया गया। इसकी वजह से बच्चा 10 घंटे बिना दूध पीए रहा, क्योंकि एमआरआई से पहले उसको दूध नहीं पिलाना था।

    वहीं 10 घंटे बिना दूध के इंतजार करने के बाद भी बच्चे का एमआरआई नहीं हो पाया, क्योंकि एनीस्थिसिया के डॉक्टर आए ही नहीं। बाद में बच्चे की हालत को देख मां वापस वार्ड में चली गई। जहां पहले से ही बच्चे का इलाज चल रहा था। अब शनिवार को फिर से एमआरआई की जांच की बात डॉक्टरों ने कही है।


    भटार स्थित आजाद नगर निवासी नीलेश भाई सखाराम खरोसे का दो माह का बेटा दक्ष जन्म से ही दिमागी बीमारी से पीड़ित है। इसके लिए उसे डेढ़ माह तक आईसीयू में रखा गया था। बाद में उसे पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती किया गया। जहां आज भी उसका इलाज चल रहा है। आगे के इलाज के लिए डॉक्टरों ने एमआरआई जांच के लिए कहा था। इसी जांच के लिए मां रेशमा दो माह के दक्ष को लेकर जांच केन्द्र शुक्रवार को गई थी। डॉक्टरों के हिदायत के कारण उसने दक्ष को सुबह पांच बजे से ही दूध नहीं पिलाया था। कई घंटे वार्ड में रहने के बाद करीब 12 बजे डॉक्टरों ने उसे पीडियाट्रिक वार्ड से एमआरआई के लिए सिविल कैम्पस स्थित छायड़ो भेज दिया, लेकिन एनीस्थिसिया के डॉक्टर को नहीं भेजा।

    डॉक्टरों ने मां से कहा था कि तुम वहां पहुंचो डॉक्टर को ऑपरेशन थियेटर से भेजा जा रहा है। यहां आने के बाद करीब तीन घंटे तक डॉक्टर नहीं आए। इधर बच्चा भूख से बिलखता रहा। मां बच्चे की हालत देख छटपटा रही थी। जांच केन्द्र छायाड़ो के इंचार्ज राकेश भाई ने कहा कि यहां पर एमआरआई कराने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन ऐसे केस में एनेस्थीसिया के डॉक्टर का होना जरूरी होता है। अंत में जब डॉक्टर नहीं आए तो मां बच्चे को लेकर वापस वार्ड में चली गई।

    पीडियाट्रिक विभाग का गैरजिम्मेदार बयान

    इस मामले में जब एनीस्थिसिया के डॉक्टर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमें तो पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट से कोई इस संबंध में कोई जानकारी ही नहीं दी गई। अगर जानकारी होती तो जरूरत जाते। वहीं पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट के डॉक्टर का कहना है कि जांच में टाइम तो लगता ही है। ऐसी घटनाएं तो होती ही रहती हैं।

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Web Title: Negligence With Patients In Civil Hospital
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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