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यहां पिंक ऑटो से हर माह कमा रही हैं 30 हजार, 60 महिलाओं को और मिलेंगे

गौरव तिवारी | Last Modified - Nov 06, 2017, 02:51 AM IST

पिंक ऑटो योजना का पहला चरण सफल रहा है। अब दूसरे चरण में 79 महिलाओं को लर्निंग लाइसेंस मिल चुका है।
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    सूरत.पिंक ऑटो योजना का पहला चरण सफल रहा है। अब दूसरे चरण में 79 महिलाओं को लर्निंग लाइसेंस मिल चुका है। चुनाव के बाद करीब 60 महिलाओं को पिंक ऑटो उपलब्ध करा दिया जाएगा। महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से सूरत महानगर पालिका ने पिंक ऑटो योजना की शुरुआत जुलाई 2017 में की थी। वर्तमान में शहर 15 महिलाएं पिंक ऑटो चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं।
    घरवालों से खर्च के लिए नहीं मांगने पड़ते रुपए
    पिंक ऑटो चलाने वाली कई महिलाओं ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि वे अब अपने फैसले खुद लेती हैं। जब मन कहता है ऑटो चलाती हैं और जब मन कहता है बच्चों के साथ समय बिताती हैं। कुछ महिला पढ़ाई भी कर रही हैं। वे कहती हैं कि अब उन्हें घर वालों से खर्च के पैसे नहीं मांगने पड़ते।
    सशक्तिकरण : पिंक ऑटो चलाने के लिए ज्यादा महिलाएं आ रहीं आगे
    पिंक ऑटो योजना के पहले चरण में 15 महिलाओं को ऑटो दिए गए थे। महिला ड्राइवरों को ट्रेनिंग, ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी के लोन की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई थी। महिलाओं को लाइसेंस और लोन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई थी। महिला सशक्तिकरण के लिए यूसीडी विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस प्रोजेक्ट से ज्यादा से ज्यादा महिलाएं जुड़ रही हैं। चुनाव के बाद जिनके भी ड्राइविंग लाइसेंस बन जाएंगे उन्हें पिंक ऑटो दिया जाएगा। गाड़ी खरीदने के लिए आसानी से लोन मिल सके इसके लिए मनपा ने बैंक ऑफ बड़ौदा से बात की है।
    फायदा : हीरा कारखाने में 12 घंटे करती थीं काम, अब समय की कोई पाबंदी नहीं
    पिंक ऑटो चलाने वाली रीना पटेल बताती हैं कि शुरुआत में गाड़ी चलाने में तकलीफ होती थी, लेकिन धीरे-धीरे आदत पड़ गई। पहले मैं हीरा कारखाने में काम करती थी। जिसमें 12 घंटे काम करना पड़ता था। हर महीने 15 हजार रुपए तनख्वाह मिलती थी। लेकिन बच्चों को समय नहीं दे पाती थी। इसकी वजह से पिंक ऑटो चलाने का फैसला किया। रीना पिछले तीन साल से सिंगल मदर हैं। ऑटो चलाकर अपने बच्चों का पालन पोषण कर रही हैं। वह बताती हैं कि पति को शराब पीने की लत थी। अलग होने के बाद घर चलाने में परेशानी होती थी। अब पैसे आने लगे हैं। बच्चों को भी समय दे पाती हूं।
    रिक्शा चालक मानते थे प्रतिद्वंद्वी, अब आदत पड़गई
    टैक्सटाइल डिजाइनिंग में डिप्लोमा कर चुकी पूनम पटेल भी पिंक ऑटो चलाती हैं। पूनम ने बताया कि शुरुआत में बाकी के रिक्शा चालक हमें अपना प्रतिद्वंदी मानते थे। वे हमारे मनोबल को तोड़ने का प्रयास करते थे। लेकिन समय के साथ यह सब सुनने की आदत पड़ गई। नौकरी के दौरान छुट्टियां नहीं मिलती थीं, साथ ही काम का समय अधिक होने से मैं आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रही थी। लेकिन अब मैं अपनी जरूरत के मुताबिक काम करती हूं।
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Web Title: Pink Auto Service In Surat For Women
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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