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दुष्कृत्य के बाद मासूम की हत्या, कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा

इसके पहले भी दो और मामले में आरोपियों को जज ने फांसी की सजा सुनाई थी।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 27, 2018, 12:52 PM IST

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    शंभू पढियार

    भरुच। जंबूसर तहसील के पीलुदरा गांव में 4 साल के बच्चे के साथ सृष्टि विरुद्ध कृत्य कर उसकी क्रूरता से हत्या के आरोपी को कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है। बच्चे को आसस्क्रीम खिलाने का लालच देकर एक मजदूर उसे सुनसान जगह पर ले गया, जहां उसने उसके शरीर को बुरी तरह से नोंच डाला, फिर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। यह घटना 2016 में हुई थी। यहां पॉस्को के स्पेशल जज ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। आरोपी पर पास्को के तहत कार्रवाई…

    सरकारी वकील ऋगेश देसाई ने बताया कि 2016 में जंबूसर तहसील के पीलुदरा गांव के शंभू रायसिंह पढ़ियार अपने ही गांव के 4 साल के एक बालक को आइस्क्रीम खिलाने का लालच देकर गांव के तालाब के पास स्थित पीर की दरगाह के पीछे झाड़ियों में ले गया, जहां उसके साथ सृष्टि विरुद्ध कृत्य कर उसके शरीर को नोंच डाला, फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी थी। जब शाम तब बालक घर नहीं लौटा, तो परिवार वाले उसे तलाशने निकले। थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई।

    बालक की लाश झाड़ियों में मिली

    खोजबीन पर बच्चे की लाश झाड़ियों में पाई गई, इससे पुलिस ने पॉस्को की धारा 4 और 6 के तहत अपराध दर्ज किया। मामले की जांच में यह पाया गया कि आखिरी बार बालक शंभू रायसिंह के साथ देखा गया था। इससे उसकी धरपकड़ की गई। यह मामला पॉस्को के स्पेशल जज एच.जे. दवे की कोर्ट में चला। जज ने आरोपी के कृत्य को मानवीयता के विरुद्ध बताते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई है।

    भरुच में फांसी का तीसरा मामला

    4 साल के बच्चे से सृष्टि विरुद्ध कृत्य कर उसकी हत्या करने वाले शंभू पढियार को फांसी की सजा सुनाई है। इसके पहले अंकलेश्वर में पत्नी और पुत्र की हत्या तथा पुत्री को गंभीर रूप से चोट पहुंचाने वाले हितेश मधुसूदन अध्यारू को फांसी की सजा सुनाई थी। नर्मदा नदी मेंं 3 बच्चियों को फेंकने वाले पिता को भी कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी।

    किस धारा के तहत सुनाई फांसी की सजा

    आईपीसी की धारा 302 के तहत फांसी की सजा, आईपीसी की धारा 364 के तहत 10 साल की कैद और 10 हजार रुपए का दंड, जुर्माना न भरने पर एक महीने की सजा और पॉस्को की धारा 6 के तहत उम्र कैद और 10 हजार रुपए का दंड, जुर्माना न भरने पर एक महीने की सजा।

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    अदालत।
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