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नकलचियों की दलीलें: एक ने कहा- मुझे पीछे वाले ने बुलाया था, नकल नहीं की, दूसरा बोला- किसी ने पर्ची फेंक दी थी लेकिन मैंने नहीं पढ़ी

एग्जाम में नकल करने वालों की दलीलें ऐसी कि पकड़ने वाली टीम को ही दोषी बता दिया।

Bhaskar News | Last Modified - Jun 29, 2018, 12:27 PM IST

नकलचियों की दलीलें: एक ने कहा- मुझे पीछे वाले ने बुलाया था, नकल नहीं की, दूसरा बोला- किसी ने पर्ची फेंक दी थी लेकिन मैंने नहीं पढ़ी

सूरत.दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं में नकल करते हुए पकड़ गए 150 छात्रों को कमेटी ने सुनवाई के लिए गुरुवार को बुलाया। 150 में से 145 छात्र ही सुनवाई में आए, अब कमेटी तय करेगी कि छात्र दोषी हैं या नहीं। यूनिवर्सिटी ने इस साल नकल में पकड़े छात्रों के लिए नियम बदलते हुए फैक्ट कमेटी बनाई थी। ये था मामला...

- 2017-2018 के अलग-अलग सेमेस्टर में लगभग 450 छात्रों को नकल करते हुए स्क्वाड टीम ने पकड़ा था, जिसके बाद नियम के मुताबिक उन्हें परीक्षा में तो बैठने दिया गया, लेकिन उनको कमेटी के समक्ष पेश किया गया।

- सुनवाई के बाद छात्रों के मामले सिंडीकेट में रखे जाएंगे। जहां तय किया जाएगा कि छात्र दोषी है तो उसे क्या सजा दी जाए या कितनी छूट दी जाए।

दलीलें भी ऐसी कि पकड़ने वाली टीम ही दोषी बता दिया

केस 1 -पहले सेमेस्टर के एक छात्र ने सुनवाई में कहा, परीक्षा में पीछे बैठे छात्र ने पेपर खत्म होने के बाद मुझे बुलाया। उसी समय स्क्वाड ने मुझे पकड़ लिया, जबकि मैं नकल नहीं कर रहा था।

केस 2- 5वें सेमेस्टर के एक छात्र के मुताबिक, उसके पास किसी ने नकल की पर्ची फेंक दी थी, लेकिन उसने नकल नहीं की थी, फिर भी अब यहां उसे कबूल करना पड़ेगा, क्योंकि उसने सुना है कि कबूल कर लेने से 500 रुपए दंड देकर छोड़ देते हैं।

सवाल: सारे सबूत यूनिवर्सिटी के पास, फिर सुनवाई क्यों?

- कमेटी सदस्य विनोद गजेरा के मुताबिक, 145 में से ज्यादातर छात्रों के पास नकल की पर्चियां मिली। 15% छात्रों को सीधे पर्ची से नकल करते पकड़ा। एक छात्र के पास मोबाइल बरामद हुआ था। हालांकि ज्यादातर छात्रों को 500 रुपए दंड देकर छोड़ दिया जाएगा और अगली बार नकल करते हुए पकड़े गए तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जबकि, यूनिवर्सिटी ने सभी परीक्षा कक्ष और क्लास रूम में सीसीटीवी कैमरे लगाने के सख्त निर्देश दिए हैं।

- इनके फुटेज देखकर ही तय किया जा सकता कि छात्र ने नकल की है या नहीं। इसके अलावा इन्हें पकड़ने वाली स्क्वाड भी यूनिवर्सिटी की ही होती है। ऐसे में सुनवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं।

सुनवाई में 17 सदस्यों में से आधे अनुपस्थित

हाल में आचार्य कमेटी को भंग करके फैक्ट कमेटी बनाई गई थी, जिसमें 17 सदस्यों को शामिल किया गया था। लेकिन, अब इन सदस्यों को यूनिवर्सिटी की इस कार्रवाई में रुचि नहीं है। कमेटी सदस्य विनोद गजेरा के मुताबिक, 17 सदस्यीय टीम में से सिर्फ 7 सदस्य ही सुनवाई में मौजूद थे।

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