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घोड़े-गधे के भी डॉक्युमेंट चैक करेंग पुलिस व ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट, बिना रिपोर्ट के नहीं आ पाएंगे शहर के अंदर

केन्द्र सरकार की गाइड लाइन के तहत इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सिफारिश की थी, होगी निगेटिव-पॉजिटिव रिपोर्ट की पड़ताल

Dainik Bhaskar

May 04, 2018, 08:50 AM IST
Documents check of horse and donkey police and transport department

उदयपुर. अब पुलिस और परिवहन विभाग जिले में आने और यहां से जाने वाले घोड़े-गधों और खच्चरों की भी जांच करेंगे। पड़ताल इनके ग्लैंडर्स निगेटिव-पॉजिटिव होने संबंधी रिपोर्ट की होगी। निगेटिव घोड़े-खच्चरों को आने-जाने देंगे, लेकिन पॉजिटिव की सूचना तुरंत पशुपालन विभाग को दी जाएगी। ये है कारण...

जांच रिपोर्ट नहीं होने पर ऐसे घोड़े-घोड़ी न जिले के अंदर आ सकेंगे, न बाहर जा सकेंगे। कलेक्टर बिष्णुचरण मल्लिक ने भास्कर को बताया कि पशुपालन विभाग ने केन्द्र सरकार की गाइड लाइन के तहत इस व्यवस्था लागू कराने की सिफारिश की थी। इस पर मुहर लगा दी गई है। विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. ललित जोशी ने बताया कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से आने वाले ज्यादातर अश्व वंशी ग्लैंडर्स रोग से ग्रस्त पाए जा रहे हैं। इस जानलेवा संक्रामक रोग से इंसानों को भी खतरा है।

इसलिए बढ़ी चिंता : इस साल ग्लैंडर्स ग्रस्त बता दो खच्चर मारकर दफनाए, पिछले साल 27 मारे थे

डॉ. जोशी ने बताया कि हाल ही उत्तर प्रदेश से आए दो खच्चर ग्लैंडर्स पॉजिटिव पाए गए थे। इन्हें नियमानुसार इंजेक्शन से मारकर दफना दिया गया है। मौजूदा साल में पहली बार ये दो नए केस सामने आने से विभाग फिर अलर्ट हो गया है। पिछले साल उदयपुर जोन में रोग और आशंका पर ऐसे 10 घोड़े मार दिए गए थे, जबकि प्रदेश में यही संख्या 27 थी। राजसमंद इलाके में जांच रिपोर्ट आने से पहले अश्व को मारने का मामला सुर्खियों में रहा। जांच रिपोर्ट के हवाले से डॉ. जोशी ने दावा किया कि उदयपुर जिले के सभी घोड़े-घोड़ी स्वस्थ हैं, लेकिन सबसे ज्यादा खतरा उत्तर प्रदेश से आने वाले अश्वों से है।

छूने से फैलती है बीमारी, बचने के लिए 10 फीट गहरे गड्ढे में करते हैं दफन

प्रदेश में ग्लैंडर्स का पहला केस नवंबर 2016 में धौलपुर में मिला था। इंसानों में इस बीमारी से संक्रमण का खतरा इतना ज्यादा है कि अश्वों को मारने के बाद 10 फीट तक गहरे गड्ढे में दफन किया जाता है। डॉक्टर बताते हैं कि यह बीमारी छूने से फैल सकती है। पशु के संपर्क में आने से मनुष्य में भी बीमारी हो सकती है। रोकथाम का कोई टीका ईजाद नहीं किया जा सका है। रोग ग्रस्त घोड़े-घोड़ी के शरीर में गांठें होने लगती हैं। धीरे-धीरे ये गांठें जानलेवा बन जाती हैं। नाक और मुंह से लगातार पानी बहता रहता है। सम्पर्क में आने वाला हर जानवर और यहां तक कि इंसान भी इसका शिकार बन जाता है।

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