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ट्रॉमा सेंटर में घायल का बहता रहा खून, हुई मौत; अस्पताल प्रशासन बोला- स्टाफ नहीं था इसलिए चालू नहीं हो सके 3 वेंटिलेटर / ट्रॉमा सेंटर में घायल का बहता रहा खून, हुई मौत; अस्पताल प्रशासन बोला- स्टाफ नहीं था इसलिए चालू नहीं हो सके 3 वेंटिलेटर

सूर्यकांत तिवारी

Apr 29, 2018, 02:42 PM IST

सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर (सूरत) में लाए गए एक घायल युवक को यहां के प्रशासन की लापरवाही की वजह से जान गंवानी पड़ी।

अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से घायल ने तोड़ा दम Due To Hospital Administrations Negligence Injured Died in Surat

सूरत. गुजरात के सूरत में सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में शनिवार को गंभीर हालत में लाए गए घायल युवक को यहां के प्रशासन की लापरवाही की वजह से जान गंवानी पड़ी। ट्रॉमा में साढ़े 4 घंटे तक रखे जाने के बावजूद न तो उसका बहता खून रोका गया, न ही वेंटिलेटर पर लिया गया। चिकित्साकर्मियों ने तीन वेंटिलेटर होते हुए भी एम्बू लगाकर वार्ड बॉय और नर्स को पकड़ा दिया, लेकिन उन्होंने इतनी मुस्तैदी नहीं दिखाई कि घायल की सांसें न उखड़े। परिजनों को आने में भी सवा चार घंटे लग गए, तब तक मरीज की हालत और बिगड़ गई। शाम को परिजन निजी अस्पताल ले गए, लेकिन युवक को बचाया नहीं जा सका। क्या है पूरा मामला?

- उधना रोड नं. 6 पर दो बाइक की भिड़ंत में पांच लोग घायल हो गए। इनमें उधना हरिनगर निवासी 31 वर्षीय विनोद त्रिपाठी की हालत गंभीर थी, जिसे ट्रॉमा सेंटर में लाया गया था।

- सीएमओ ने भी माना कि तत्काल वेंटिलेटर पर लेकर और बहता खून रोककर विनोद की जान बचाई जा सकती थी।

गंभीर चोट थी
मरीज के सिर में गंभीर चोट थी। दाहिनी आंख फूट गई थी। पसलियां टूट चुकी थीं। नाक, कान, मुंह से लगातार खून निकल रहा था। मरीज ठीक से सांस भी नहीं ले पा रहा था।

होना यह था
ट्रॉमा सेंटर में छह बेड का आईसीयू है। ऐसे मरीजों को गोल्डन पीरियड में वेंटिलेटर पर लेकर बहता खून रोका जाता है, लेकिन घायल विनोद के मामले में ऐसा नहीं हुआ।

ये लापरवाही हुई
- ट्रॉमा में 3 वेंटिलेटर होते हुए भी दोपहर करीब सवा दो बजे एम्बू लगाया। एम्बू वार्ड बॉय और नर्स को थमा दिया गया। दोनों लगातार एम्बू नहीं दबा सके।
- सवा चार घंटे बाद साढ़े 6 बजे परिजन आए। परिजन के अनुसार वेंटिलेटर के लिए कहा तो जवाब मिला कि यह खाली नहीं है। शाम को उसकी मौत हो गई।

ट्रॉमा सेंटर में 6 वेंटिलेटर हैं, इनमें से 3 में मरीज नहीं थे
- मेडिसिन विभाग के आईसीयू में 10 वेंटिलेटर हैं, जबकि ट्रॉमा सेंटर में इमरजेंसी मरीजों के लिए 6 वेंटिलेटर हैं।

- रोजाना 10 से अधिक मरीजों को वेंटिलेटर में रखने की जरूरत होती है।

- सिविल अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. एमके वाडेल का कहना है कि आईसीयू वार्ड के तीन वेंटिलेटर अभी चालू नहीं हो सके हैं, क्योंकि स्टाफ नहीं है।

भास्कर आंखों देखी
वार्ड बॉय और नर्स एक-दूजे को थमाते रहे एम्बू....
- करीब ढाई बजे भास्कर संवाददाता सर्जरी वार्ड में गया और 15 मिनट तक मरीज के इलाज को देखा। वार्ड बॉय ने एम्बू दबाना शुरू किया।

- पांच मिनट बाद उसने नर्स से कहा-अब आप दबाओ। करीब 40 सेकंड के बाद नर्स ने एम्बू दबाना शुरू किया।

- लगभग 3 मिनट बाद वह फिर से आया और नर्स ने उसे एम्बू थमा दिया। ऐसा करीब पांच बार चलता रहा।

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