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जिंदगी का सबक सिखाने पिता ने ली बेटे की कठिन परीक्षा

‘मेरे पिता ने मेरा यह भ्रम तोड़ा ही नहीं, बल्कि वास्तविक दुनिया से भी परिचित कराया।’

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 18, 2018, 04:59 PM IST

  • जिंदगी का सबक सिखाने पिता ने ली बेटे की कठिन परीक्षा
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    दाएं हितार्थ ढोलकिया, बाएं पीयूष डालिया।

    सूरत। जिंदगी में पैसे का महत्व क्या है, इसे गरीब ही बेहतर समझ पाता है। पर धनकुबेरों की संतानों को इसका अहसास ही नहीं होता कि पैसे आते कहां से हैं। इसलिए शहर के धनकुबेरों ने अपने बच्चे को पैसे का महत्व बताने के लिए उनकी कठिन परीक्षा ली। जिसे जानकर अाप चौंक जाएंगे। बिना पैसे के अज्ञात स्थान भेज दिया…

    बिजनेसमैन लवजी डालिया ने बताया कि बेटे को पैसे की कीमत समझाने और सुख-सम्पत्ति के बिना कठिन परिस्थितियों जीवन बीता सके, इसलिए बेटे पीयूष को डेढ़ महीने के लिए मैंने उसे अज्ञातस्थान भेज दिया। जब वह ट्रेन में बैठा, तो मैंने बताया कि तुम्हें विशाखापट्टनम जाना है। इसकी जानकारी केवल मुझे ही थी, घर में बेटे की मां को भी इसका पता नहीं था।

    इमर्जेंसी के लिए 5000 रुपए दिए

    बेटे को इमर्जेंसी के लिए 5 हजार रुपए दिए थे। यह भी कहा था कि जब तक तुम बाहर हो, किसी से बात भी नहीं करनी है। उसे इस तरह से इसलिए भेजा कि उसे पता चले कि कल यदि हालात बदलते हैं, तो उसका सामना किस तरह से किया जाए। हालात का सामना करने के लिए बेटे की क्षमता बढ़े, जीवन संघर्ष क्या होता है, यह बताने के लिए मैंने अपने बेटे के साथ ऐसा व्यवहार किया।

    बेटे पीयूष डालिया का अनुभव

    5000 रूपए में पूरा महीना किस तरह से काटा जाए, मुझे इसका जरा भी अनुभव नहीं था। पर जब इस तरह के हालात आए, तो मैंने समझा कि कम से कम पैसे में किस तरह से घर चलाया जा सकता है। इस दौरान मैंने अपने परिवार को अपने काफी करीब समझा। पैसे की सच्ची कीमत का पता चला। भोजन के लिए केवल 60 रुपए ही खर्च करता। कुछ भी खा लेता, कई बार भूखे भी रहना पड़ा। पिता का सख्त आदेश था कि कोई भी एक जॉब पकड़कर नहीं रखना है। 8 दिनों बाद जॉब बदल देना है। कोई भी छोटी सी छोटी नौकरी करना, पर अपनी पहचान छिपाए रखना।

    पहले दिन स्टेशन पर गुजारी रात

    पहले दिन तो रेल्वे स्टेशन पर रात गुजारी, सुबह पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल किया। कपड़े की एक शॉप में साफ-सफाई का काम किया। 48 रुपए का एक शर्ट खरीदकर उसे 80 से 100 रुपए में बेचता। इस तरह से अपने कठिन दिनों को गुजारा।

    500 रुपए और दाे जोड़ी कपड़े देकर कहा-एक महीने तक हैदराबाद में रहना है

    बिजनेसमैन धनश्याम ढोलकिया ने बताया कि मुझे अपने बेटे हितार्थ को हैदराबाद भेजा। ताकि वहां जाकर वह पैसे और इंसान की वेल्यू समझे। एक बार जब उसने इसका अनुभव ले लिया, तो फिर वह जीवन में कभी पीछे नहीं होगा। इसी के साथ उसने परिवार की वेल्यू समझी। इतने दिनों तक दूर रहा, तो मेरे और उसके बीच रिश्ता और मजबूत हुआ। हमारे बीच बातचीत का दौर बढ़ गया। उसने चार अलग-अलग स्थानों पर नौकरी की। एक जगह उसने काम किया, तो उसके पैसे उसे नहीं मिले। तब उसे समझ में आया कि अधिकार और मेहनत क्या होते हैं। जीवन के ये सबक उसे घर बैठे नहीं मिलते। उसके लिए खुद ही मेहनत करनी होती है। मैंने उसके लिए नियम भी सख्त बनाए थे। जिससे उसकी परीक्षा कठिन और कठिन हो। अपने प्यारे बेटे काे बाहर भेजना बहुत ही मुश्किल था, पर मैंने ऐसा किया और उसका प्रतिफल भी अच्छा मिला।

    बेटे हितार्थ ढोलकियाका अनुभव

    यह मेरी लाइफ का बेस्ट एक्सपिरियंस था। जिंदगी की सीख मैंने 30 दिनों में प्राप्त की। मेरे हाथ में टिकट पकड़ा दी, इसके अलावा 500 और दो जोड़ी सेकेंड हेंड कपड़े। मोबाइल भी नहीं, मुझे भेज दिया एक महीने के लिए हैदराबाद। एक आम आदमी की जिंदगी कैसी होती है, यह सीखने को मिला। जीवन में सब कुछ एेसे ही नहीं मिलता, इसके लिए मेहनत करनी होती है। मेरा पर्सनल लेबल सेल्फ कांफिडेंस बढ़ा। दुनिया का सामना किस तरह से किया जाए, उसका विजन चेंज हुआ। पहले दिन 25 जगह नौकरी मांगने गया। तब कहीं जाकर एक जगह नौकरी मिली। इसके बाद मैंने कम्प्रोमाइज करना सीखा। यदि यह अनुभव नहीं हुआ होता, तो मैं यही भ्रम पाले रहता कि जिंदगी कितनी आसान है। मेरे पिता ने मेरा यह भ्रम तोड़ा ही नहीं, बल्कि वास्तविक दुनिया से भी परिचित कराया। मैं इसके लिए अपने पिता को क्या कहूं, इसके लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।

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    ट्रेन में बिठाकर बेटे से कहा-तुम्हें विशाखापट्टनम जाकर नौकरी करनी है।
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    पिता का सबक काम आया-पीयूष डालिया।
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    500 रुपए और दो जोड़ी कपड़े देकर कहा-तुम्हें एक महीने तक हैदराबाद में रहना है।
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    मेरी लाइफ का बेस्ट एक्सपीरियंस-हितार्थ ढोलकिया।
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