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ये है देश की सबसे पुरानी डबल डेकर ट्रेन, 112 साल पहले अंग्रेजों ने इस काम के लिए किया था शुरू

ब्रिटिशकाल में मुंबई सेंट्रल से सूरत के बीच चली थी यह ट्रेन

Bhaskar News | Last Modified - May 01, 2018, 02:35 AM IST

  • ये है देश की सबसे पुरानी डबल डेकर ट्रेन, 112 साल पहले अंग्रेजों ने इस काम के लिए किया था शुरू
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    ब्रिटिशकाल में मुंबई सेंट्रल से सूरत के बीच चली थी यह ट्रेन

    सूरत.1906 में मुंबई सेंट्रल से सूरत के बीच शुरू हुई फ्लाइंग रानी ट्रेन का मंगलवार को पश्चिम रेल जन्मदिन मनाएगी। 112 साल पुरानी यह ट्रेन अब डबल डेकर कोच के साथ चलती है। की हो गई। पश्चिम रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रविंद्र भाकर ने बताया कि फ्लाइंग रानी जोन में गोल्डन टेंपल के बाद दूसरी सबसे पुरानी ट्रेन है। यह पश्चिम रेल की विरासत है। हम फ्लाइंग रानी में भी रंगीन एलएचबी कोच जोड़ेंगे। यात्रियों में यह ट्रेन बहुत लोकप्रिय है, इसलिए इसके कोच भी बढ़ाए जाएंगे। 4 घंटे 15 मिनट में तय करती है 263 किमी की दूरी...

    - यह ट्रेन दोनों विश्व युद्ध के दौरान बंद रही थी, लेकिन उसके बाद इसका सफर निरंतर जारी है।

    - पहले यह विशेष साप्ताहिक ट्रेन थी, लेकिन 1950 के बाद से यह नियमित हुई। इस ट्रेन को ब्रिटिशकाल के दौरान बॉम्बे बड़ौदा सेंट्रल इंडिया रेलवे (बीबीसीआई) ने चलाया था।

    - इस ट्रेन को चलाने का मुख्य उद्देश्य मुंबई से सूरत के बीच व्यापार को बढ़ावा देना था। शुरू में इस ट्रेन में 10 कोच थे, जिससे एक ट्रिप में लगभग 800 यात्री सफर करते थे।

    - वर्तमान में इस ट्रेन से रोज 2500 यात्री सफर कर रहे हैं। इनमें 500 तो पास होल्डर हैं। मुंबई-सूरत के 263 किमी सफर को यह ट्रेन 4 घंटे 15 मिनट में तय करती है।

    - 24 अप्रैल 1914 को विश्व युद्ध के कारण इस ट्रेन का परिचालन बंद कर दिया गया था।

    10 से 15 फिर 19 कोच की हुई ट्रेन

    - यात्रियों की बढ़ती संख्या के कारण 18 दिसंबर 1979 को इस ट्रेन में डबल डेकर कोच जोड़े गए, जिससे यह 10 से 15 कोच की हो गई।

    - 2001 से इस ट्रेन में कुल 19 कोच हो गए और सभी कोच आईसीएफ डबल डेकर जोड़ दिए गए जो अब तक जुड़े हैं।

    - अब इसमें 1 फर्स्ट क्लास, 2 एसी चेयर कार, 6 नॉन एसी चेयर कार, 5 एमएसटी, 1 महिला, 2 जनरल और 2 एसएलआर कोच जुड़े हैं।

    पारसी ड्राइवर-गार्ड ने चलाया

    - 1 मई वर्ष 1937 को इस ट्रेन को फिर से शुरू ड्राइवर रुस्तमजी और गार्ड धनजीशॉ ने चलाया। इसकी वजह से पारसियों ने इसका नाम फ्लाइंग रानी रखा।

    - द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 1939 में इसे बंद किया, 1950 में फिर से शुरू की गई।

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    फ्लाइंग रानी में 1970 मे सबसे पहले डबल डेकर कोच जोड़े गए थे, अब ऐसी दिखती है।
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