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इस गांव को बोलते हैं गोल्डन गांव; यहां के लाड़ली भवन में हैं 50 साल से विदा हुई 500 बेटियों के हाथों के निशान

गुजरात में अमरेली के पास है ये गांव; 5 साल पहले यहां लाड़ली भवन बनाया गया

Danik Bhaskar | May 14, 2018, 08:45 PM IST
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अमरेली (सूरत). ये गुजरात का गोल्डन गांव है। नाम-रफाला। जनसंख्या- सिर्फ हजार लोग। रफाला गांव अमरेली जिले के बगसरा तहसील से 12 किलोमीटर की दूरी पर बसा है। गांव की 5 साल पहले कोई खास पहचान नहीं थी। गोल्डन गांव कहलाने के पीछे खास वजह है। गांव के ही बिजनेसमैन ने 9 करोड़ खर्च कर अनूठी पहचान दिलाई...


रफाला गांव में विशेष रूप से लाड़ली भवन बनवाया गया है। यहां 50 साल में गांव से विदा हुई 500 बेटियों के हस्तचिह्न और उनकी फोटो को सहेजा गया है। गांव का ये लाड़ली भवन यहां की बेटियों के प्रति सम्मान जताने का एक जरिया है। लाड़ली भवन के बनने की कहानी भी दिलचस्प है।

कुछ साल पहले गांव के बिजनेसमैन सवजीभाई वेकरिया का गांधीनगर जाना हुआ। रफाला का नाम सुनकर स्कूल संचालक ने पूछ लिया कि ये गांव कहां है? बस तभी सवजीभाई को एहसास हुआ कि अपने गांव की ऐसी पहचान बनाने की जरूरत है ताकि बताना न पड़े गांव कहा हैं? वापस आकर उन्होंने गांव के मौजूदा गोल्डन स्वरूप की नींव डाल दी। सवजीभाई ने 9 करोड़ रु. खर्च कर गांव की ये नई पहचान पुख्ता की।

500 बेटियों के हाथों के थापे

रफाला गांव से पिछले पांच दशक में 500 बेटियों की विदाई हुई है। हाल ही में सभी बेटियों को गांव में बुला कर इनके हस्तचिह्न और तस्वीरें ली गई। इन्हें लाडली भवन में रखा गया है। रफाला की इन बेटियों में कई के तो नाती-पोते भी हो चुके हैं।

सरपंच की निगरानी में बनी है कमेटी, जो रखती है साफ-सफाई का ध्यान


सवजीभाई की अगुवाई में ही गांव में एक कमेटी बनाई गई। अब ये कमेटी ही गांव के साफ-सफाई, रेप्लिकाओं के रख-रखाव और लाड़ली भवन के रख-रखाव का ध्यान रखती है।

गांव की हर दीवार का एक ही रंग... गोल्डन

हजार लोगों की जनसंख्या वाले गांव में करीब 200 घर हैं। इन हजार लोग में से भी करीब 40% लोग सूरत में रहते हैं। 500 से 600 लोग ही गांव में रहते हैं। गांव के सात दरवाजे बनाए हैं। सबके नाम अलग हैं। गांव की सभी दीवारों को एक ही रंग में रंगा गया है- गोल्डन रंग में। आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम है। पूरा गांव सीसीटीवी की निगरानी में है।