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30 साल से लिव इन रिलेशनशिप में पह रहे थे ये लोग, रचाई शादी और पोते के साथ दादा और पिता भी बने दूल्हा

तीन पीढ़ियां एक साथ बनी दूल्हा: वासूर्णा गांव में 51 जोड़ों ने एक साथ लिए सात फेरे

Dainik Bhaskar

May 14, 2018, 08:40 AM IST
पोते राजेंद्र के साथ दादा महेंद्र और पिता सुरेंद्र ने शादी रचाई । पोते राजेंद्र के साथ दादा महेंद्र और पिता सुरेंद्र ने शादी रचाई ।

सूरत. गुजरात के सूरत में रविवार को तीन पीढ़ियों की एक साथ शादी हुई। इनमें दादा, पिता और पोते ने एक साथ शादी रचाई। इनकी शादी एक सामूहिक विवाह समारोह में हुई। जहां 51 जोड़ों का ने एक साथ फेरे लिए। इनमें से 30 जोड़े तो ऐसे थे, जो करीब 30 साल से पति-पत्नी बनकर रह रहे थे; लेकिन शादी नहीं की थी। यहां के वासूर्णा गांव के 72 साल के बुजुर्ग महेंद्र पाडवी ने पत्नी ईला के साथ 50 साल बाद सात फेरे लिए। शादी के मंडप में महेंद्र के साथ बेटे सुरेंद्र और पोते राजेंद्र का भी विवाह हुआ। एक ही मंडप में पोता और उसकी दुल्हन के साथ दादा-दादी और माता-पिता भी मौजूद थे। बताया आखिर क्या थी मजबूरी, जो एक साथ लिए सात फेरे...

- 72 साल की उम्र मे दूल्हा बने महेंद्र पाडवी ने बताया कि खर्च नहीं उठा पाने के कारण ईला से मेरा विवाह नहीं करवाया गया था।

- हिंदू विधि से शादी नहीं होने पर नारियल और सवा रुपए देकर ही मेरे ससुर ने अपनी बेटी को विदा कर दिया था। उन्होंने बताया कि शादी करने से बारातियों के लिए खाना, मंडप आदि पर खर्च होता है।

- इसलिए हमारे पूर्वजों ने सालों पहले सवा रुपया में लड़की विदा करने की परंपरा बनाई थी।

सवा रुपए देकर बेटी की विदाई

- डांग जिले में ज्यादातर आबादी आदिवासी समाज की है। भील, पाडवी, गावित और चौधरी समाज के लोग यहां पर सदियों से रह रहे हैं।
- ये आदिवासी जंगली वनस्पतियों और थोड़ी-सी जमीन पर खेती कर गुजर-बसर करते हैं। घोर गरीबी के कारण अधिकांश लोग शादी नहीं करते हैं।
- शादी के नाम पर न बाजा, न बारात, बस लड़की के पिता लड़के वालों को सवा रुपए और श्रीफल देकर अपनी बेटी को विदा कर देता है।
- यहां के 100 से अधिक गांव में दशकों से यह परंपरा चली आ रही है। उसके बाद नवदंपति का गृहस्थ जीवन शुरू हो जाता है।
- हालांकि, अब कुछ समाजसेवी संस्थाएं यहां सामूहिक विवाह का आयोजन करने लगी हैं। तेजस्वनी संस्कृति परिवार नामक संस्था ने रविवार को सामूहिक विवाह का आयोजन किया।

3 साल में 200 आदिवासी दंपतियों की करवाई शादी
- तेजस्विनी संस्कृति परिवार की प्रमुख और सामूहिक विवाह का आयोजन करने वाली हेतल ने बताया कि डांग जिले में लोग सालों से बिना शादी किए ही रहते आ रहे हैं।
- 'आप इसे लिव इन रिलेशनशिप भी कह सकते हैं। इसे धार्मिक मान्यता नहीं मिलती। सरकार भी ऐसी शादी को नहीं मानती, इसलिए हमने इन लोगों की शादी करवाने का निर्णय लिया।'
- बता दें कि संस्कृति परिवार तीन साल में करीब 200 से अधिक दंपतियों की शादी करा चुका है।

फेरे लेते हुए जोड़े। फेरे लेते हुए जोड़े।
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पोते राजेंद्र के साथ दादा महेंद्र और पिता सुरेंद्र ने शादी रचाई ।पोते राजेंद्र के साथ दादा महेंद्र और पिता सुरेंद्र ने शादी रचाई ।
फेरे लेते हुए जोड़े।फेरे लेते हुए जोड़े।
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