12 साल की बेटी की जिद के आगे हार गए माता-पिता, रेलवे ऑफीसर पिता ने कई लालच दिया लेकिन अपने फैसले पर चट्टान की तरह अडिग रही लड़की / 12 साल की बेटी की जिद के आगे हार गए माता-पिता, रेलवे ऑफीसर पिता ने कई लालच दिया लेकिन अपने फैसले पर चट्टान की तरह अडिग रही लड़की

घर में नौकर-चाकर, मंहगी गाड़ी जैसी सारी सुविधा, फिर भी सब त्याग दिया

Bhaskar News

Feb 11, 2019, 03:48 PM IST
Gujarat news railway officer 12 years old daughter khushi will become saint jain religion

सूरत (गुजरात न्यूज)। रेलवे में सीनियर एक्जीक्यूटिव अफसर अहमदाबाद निवासी विनीत शाह की 12 वर्षीय बेटी खुशी 29 मई को दीक्षा लेंगी। 29 मई को आचार्य गुणरत्नसूरी के सानिध्य में मुमुक्षु खुशी दीक्षा लेंगी। खुशी ने 7वीं कक्षा में ही अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़कर संयम मार्ग को चुना। छठीं कक्षा में खुशी ने 96 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। करोड़पति परिवार से होने के बावजूद खुशी ने संसार की मोह-माया का त्यागकर संयम मार्ग को चुना। घर में नौकर-चाकर, गाड़ी, ब्रांडेड कपड़ों के साथ खुशी को बचपन से ही सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त हुईं। दीक्षा के बाद मुमुक्षु खुशी साध्वी तेजस्वी रेखा और साध्वी प्रमोद रेखा के सानिध्य में जीवन व्यतीत करेंगी।


कक्षा 6 में खुशी को मिले थे 96 फीसदी अंक, डांस में आती थी अव्वल


खुशी ने बताया- पिछले 3 वर्षों से स्कूल की छुट्टियों में साध्वी तेजस्वी रेखा और साध्वी प्रमोद रेखा के सानिध्य में विहार करने जाती थी। वहां साध्वियों के साथ संयम जीवन जीने की प्रेरणा मिली। इसके साथ ही साध्वियों ने खुशी को संयम मार्ग का महत्व भी बताया। संयम ही एक ऐसा मार्ग है जो मोक्ष के मार्ग पर लेकर जाता है। इसके बाद मैंने माता-पिता से कहा- मुझे इस पापमयी संसार में नहीं रहना, मुझे दीक्षा लेनी है।


धार्मिक संस्कार के लिए जाती थी पाठशाला


खुशी की मां भाविनी शाह ने बताया कि अहमदाबाद स्थित शांतिनगर जैन पाठशाला में खुशी को धार्मिक संस्कार के लिए भेजते थे। जहां कई प्रतियोगिताएं होती थीं, जिसमें डांस में खुशी ने हमेशा प्रथम स्थान प्राप्त किया।


पिता ने दिया डॉक्टरी की पढ़ाई करवाने का लालच, फिर भी नहीं मानी


खुशी के पिता विनीत शाह ने बताया- हमारे घर में पहले से ही धार्मिक माहौल रहा है। 12 वर्ष पहले मेरे बड़े भाई के साथ उनकी पत्नी और उनके बेटे ने भी दीक्षा ली थी। हमने खुशी को लालच भी दिया कि हम उसे डॉक्टर बनाएंगे और उसे पढ़ने के लिए जिस भी यूनिवर्सिटी में जाना होगा उसे वहां भेजेंगे। यदि उसे दीक्षा लेनी है तो 18 वर्ष पूरे होने के बाद ले। लेकिन, खुशी ने माता-पिता की बात नहीं मानी। उसकी जिद के आगे हम हार गए।

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