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ये भीड़ नहीं, ये हैं शहर के कोहिनूर, इनके हुनर से ही आती है सूरत के हीरों में चमक

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 02:50 AM IST

आज गुजरात स्थापना का दिन एवं मजदूर दिवस भी

ये भीड़ नहीं, हीरा कारखानों से निकलने वाले रत्न कलाकार हैं। ये भीड़ नहीं, हीरा कारखानों से निकलने वाले रत्न कलाकार हैं।
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सूरत. ये भीड़ नहीं, हीरा कारखानों से निकलने वाले रत्न कलाकार हैं। इनके हुनर से ही सूरत के हीरों में चमक आती है। विश्व में हीरा उद्योग के सबसे बड़े केंद्र बेल्जियम के एंटवर्प से आए रफ हीरे को यही पॉलिश्ड करते हैं। यहां से ज्यादातर पॉलिश्ड हीरा हांगकांग जाता है। सूरत के हीरा उद्योग में 10 लाख लोग कार्यरत हैं।

55 हजार करोड़ सालाना कमाते हैं मजदूरी से

- सूरत में सालाना 1 लाख करोड़ रुपए के रफ हीरे आयात होते हैं।

- पॉलिश्ड करने के बाद ये हीरे 1.55 लाख करोड़ रुपए में निर्यात किए जाते हैं।

- ऐसे में यह उद्योग एक साल में केवल मजदूरी से 55 हजार करोड़ रुपए अर्जित करता है।

- देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सूरत के हीरा उद्योग का हिस्सा 7.5 प्रतिशत है।

यूरोप की मंदी में कम वेतन पर किया काम

- हीरा पॉलिश्ड करने के लिए न पानी की जरूरत पड़ती है, न ही ज्यादा बिजली खर्च होती है।

- सूरत में हीरा की लगभग 7 हजार यूनिट हैं, जिनमें 10 लाख लोग काम करते हैं।

- 2008 में यूरोप में आई मंदी का असर हीरा उद्योग पर भी पड़ा था, रत्न कलाकारों ने कम वेतन पर काम किया, लेकिन उद्योग को बंद नहीं होने दिया।

सूरत के हीरा उद्योग में 10 लाख लोग कार्यरत हैं। सूरत के हीरा उद्योग में 10 लाख लोग कार्यरत हैं।
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हीरा पॉलिश्ड करने के लिए न पानी की जरूरत पड़ती है, न ही ज्यादा बिजली खर्च होती है। हीरा पॉलिश्ड करने के लिए न पानी की जरूरत पड़ती है, न ही ज्यादा बिजली खर्च होती है।
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ये भीड़ नहीं, हीरा कारखानों से निकलने वाले रत्न कलाकार हैं।ये भीड़ नहीं, हीरा कारखानों से निकलने वाले रत्न कलाकार हैं।
सूरत के हीरा उद्योग में 10 लाख लोग कार्यरत हैं।सूरत के हीरा उद्योग में 10 लाख लोग कार्यरत हैं।
हीरा पॉलिश्ड करने के लिए न पानी की जरूरत पड़ती है, न ही ज्यादा बिजली खर्च होती है।हीरा पॉलिश्ड करने के लिए न पानी की जरूरत पड़ती है, न ही ज्यादा बिजली खर्च होती है।
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