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खांसी के इलाज के लिए चमगादड़ों का कर रहे शिकार, खुलेआम इस तरह मार गिराते हैं इन्हें

चमगादड़ों का खांसी के उपचार से जुड़ा कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

Danik Bhaskar | Jun 04, 2018, 07:27 AM IST
‘दवा’ के लिए पाबंदी के बावजूद चमगादड़ों का मार रहे ‘दवा’ के लिए पाबंदी के बावजूद चमगादड़ों का मार रहे

कोटा (उदयपुर). चमगादड़ों से फैलने वाला निपाह वायरस इन दिनों सर्वाधिक चर्चा में है। उदयपुर के कोटड़ा में पाबंदी के बावजूद चमगादड़ों का शिकार किया जा रहा है। हालांकि, इसका निपाह से कोई ताल्लुक नहीं है। यहां लाइलाज खांसी या दमे के इलाज के लिए चमगादड़ों को मारकर दवाई के रूप में उपयोग किया जाता है। यह शिकार भी रविवार को ही होता है और यह दवा भी रविवार को ही ली जाती है। हालांकि,

चमगादड़ों का खांसी के उपचार से जुड़ा कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

सिर्फ स्थानीय मान्यताओं के चलते यहां हर रविवार चमगादड़ों की शामत आ जाती है। इसके लिए बाकायदा शिकार भी होते हैं, जो बंदूक या तीर-कमान से पेड़ पर लटके चमगादड़ों को मार गिराते हैं।

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