Hindi News »Gujarat »Surat» अनलॉक कार ने ले ली थी दो मासूमों की जान, Kids Died In Locked Car: Experts Told How Painful It Would Be

कार लॉक होने से 2 जिगरी दोस्तों की चली गई थी जान, एक्सपर्ट्स ने बताया-कितनी दर्दनाक हुई होगी मौत

सूरत में सोमवार शाम को कार में लॉक होने से दो मासूमों की दम घुटने से मौत हो गई थी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - May 17, 2018, 06:03 PM IST

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    सूरत (गुजरात).सूरत में सोमवार शाम को एक अनलॉक कार ने दो मासूमों की जान ले ली थी। दरअसल, डिंडोली इलाके के मानसी रेजिडेंसी में रहने वाले दोनों बच्चे निकले तो थे नमकीन लेने, लेकिन अपार्टमेंट के बाहर खड़ी अनलॉक कार में खेलते-खेलते जा बैठे। जिसके तुरंत बाद कार लॉक हो गई। लगभग छह घंटे 36 डिग्री तपती गर्मी के बीच कार में बंद रहने के दौरान दम घुटने से मासूमों की मौत हो गई। कार का शीशा तोड़कर उन्हें बाहर निकालने वाले संतोष बारिया का कहना था- देखकर लगा जैसे तंदूर में जल गए हैं।' जानिए कार में बढ़ती गर्मी, घटती ऑक्सीजन का कोमल बच्चों पर असर...

    (इस मामले में दैनिक भास्कर ने 4 एक्सर्ट्स डॉ. जिगिशा पाटडिया, एड. प्रोफेसर, पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट सिविल हॉस्पिटल के डॉ. जितेंद्र दर्शन, सर्जन, स्मीमेर हॉस्पिटल के डॉ. निर्मल चोरडिया, चाइल्ड

    क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. हिमांशु टडवी )

    1:00 बजे
    कार में ऑक्सीजन 45 मि. चली होगी, बाद में फेफड़े थकने लग

    मान लेते हैं कि बच्चे 12 बजे के बाद कार में गए। कुछ देर तक वे खेलते रहे होंगे। दरवाजा लॉक होने पर गर्मी बढ़ी होगी। घबराहट से उन्हें उल्टी हुई होगी। इस दौरान अगर उनकी मौत नहीं हुई तो असर दूसरे रूप में होगा। कार में करीब 30 ली. ऑक्सीजन होगी, जो 45 मिनट चली होगी। 30 मिनट बाद फेफड़े-हृदय थकने लगे होंगे।

    2:00 बजे
    दिमाग तक रक्त नहीं पहुंचने से दोनों बेहोश होने लगे होंगे

    आशंका है कि बच्चे तेज सांस लेने की कोशिश में इस कदर थक गए होंगे कि उनके हृदय की धड़कनों की दर कम होती गई होगी। दिल की धड़कन कम होने की वजह से रक्त की सप्लाई बाधित होनी शुरू हुई होगी। इसके बाद दिमाग तक रक्त पहुंचना कम हो गया होगा। और फिर बच्चे अर्द्ध बेहोशी की हालत में पहुंचना शुरू हो गए होंगे। पहले लाल फिर रक्त संचार बंद होने पर शरीर सफेद पड़ा होगा।

    3:00 बजे
    शरीर में टॉक्सिन की मात्रा बढ़ने से आर्गन हुए होंगे फेल

    दो घंटे के बाद बच्चों का बचना मुश्किल गया होगा। यदि किसी तरह वे बच गए होंगे तो अचेत जरूर हो गए होंगे। उनके शरीर में ऑक्सीजन की बजाय कार्बन डाई ऑक्साइड जाने लगी होगी। शरीर में टॉक्सिन बढ़ने लगी होगी। इससे फेफड़े, हृदय और मष्तिक डैमेज होना शुरू हो गए होंगे, जिससे शरीर के आर्गन फेल होने लगे होंगे।

    4:00 बजे
    ब्रेन में ऑक्सीजन नहीं पहुंचने से मौत की आगोश में गए होंगे

    दिमाग में ऑक्सीजन की आपूर्ति रुकने के बाद बच्चों के शरीर के कई अंग एक साथ काम करना बंद करने लगे होंगे। इसे मेडिकल की भाषा में मल्टी आर्गन फेल होना कहा जाता है। आर्गन फेल होने के साथ ही दोनों बच्चे मौत की आगोश में धीरे-धीरे जाने लगे होंगे। अगर बच्चों की सांस नली में फंसे अन्न कण के कारण पहले उनकी मौत नहीं हुई होगी, तो ऑर्गन फेल होने की वजह से हो गई होगी।

    5:00 बजे
    मौत होने के बाद बंद कार में ज्यादा गर्मी से पड़े होंगे फफोले

    बंद कार में 3 घंटे से ज्यादा समय तक बच्चों का जिंदा रहना संभव नहीं है। बच्चों की मौत के बाद उनके शरीर पर कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगे होंगे। उनकी डेड बॉडी पर घबराहट की वजह से उल्टी होने का असर भी दिखाई पड़ने लगा होगा। कार के अंदर के तापमान की वजह से उनकी स्किन पर फफोले पड़े होंगे।

    6:00 बजे
    कॉर्बन डाई ऑक्साइड से हाथ-पैर काले, नाखून नीले होंगे

    प्राकृतिक मौत में मृत शरीर का रंग फीका रहता है, जबकि शरीर में कार्बनडाई ऑक्साइड के बढ़ने की वजह से हुई मौत में होठ, तलवे, हाथ-पैर आदि का रंग गहरा काला होने की संभावना रहती है। मौत के आधे घंटे बाद नाखून का रंग भी नीला पड़ने लगता है। यदि तीन-चार घंटे तक डेड बॉडी कार के अंदर पड़ी रही होगी तो इसमें कड़ापन अधिक होगा, जबकि आमतौर पर यह कम कड़ी होगी।

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    वो कार, जिसमें विराज और हेलीश की दम घुटने से मौत हो गई थी
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    अस्पताल ले जाने के दौरान
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    बच्चों को कार से निकालने वाले संतोष बारिया
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