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भगवान की तरफ से 'हां' की चिट्ठी आई तब जाकर तय हुआ कि अब गांव में बना सकते हैं 2 मंजिला घर, ईश्वर से बड़ा कोई नहीं इसलिए गांव में नहीं था एक भी ऐसा घर

ग्रामीणों ने इसका रास्ता भी आस्था के जरिए ही दो तरीकों से निकाला।

Danik Bhaskar | Jun 28, 2018, 12:10 AM IST

वाव (सूरत). अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा 10 हजार की आबादी वाला गुजरात का ढीमा गांव जो कि वाव तहसील में आता है। वहां पर एक भी दो मंजिला घर नहीं है, लेकिन सदियों बाद अब यह होने जा रहा है। दो मंजिला घर बनाने की यह अनुमति किसी सरकार या कोर्ट ने नहीं, बल्कि स्वयं ईश्वर ने दी है। दरअसल, यहां के ग्रामीणों का मानना है कि जब कोई भगवान से बड़ा नहीं हो सकता तो भला उनके मंदिर से बड़ा घर कैसे बना सकता है। इसी आस्था और मान्यता के चलते गांव के धरणीधर (श्रीकृष्ण) भगवान के 31 फीट ऊंचे मंदिर को आधार मानकर इससे छोटे यानी एक मंजिला घर ही बनाए जाते रहे। मान्यता को तोड़ना चाहा तो हुआ अनिष्ट...

- अब ग्रामीणों ने इसका रास्ता भी आस्था के जरिए ही दो तरीकों से निकाला। सबसे पहले नया मंदिर बनाकर ध्वजा सहित उसकी ऊंचाई 71 फीट की, फिर भगवान से लिखित चिट्ठी के माध्यम से बाकायदा अनुमति ली। जब भगवान की ओर से हां की चिट्ठी आई तो तय हुआ कि अब गांव में दो मंजिला घर बना सकेंगे। यहां राजपूत, ब्राह्मण, पटेल और दलित समाज के 800 घर हैं।

- सरपंच हर्षा बहन सेवक की माने तो यह सिर्फ कोरी मान्यता नहीं थी। इससे पहले कुछ लोगों ने दो मंजिला घर बनवाया भी था लेकिन जिन्होंने भी ऐसा किया, उनके यहां अनिष्ठ शुरू हो गया। कोई न कोई परेशानी आती रही। आखिरकार निर्माण तुड़वाना पड़ा। भगवान की अनुमति के बाद सब खुश हैं और जन्माष्टमी पर चांदी का सिंहासन अर्पण किया जाएगा।

चिट्ठी लिख कर जानी भगवान की मर्जी

- मंदिर की ऊंचाई 71 फीट करने के बाद भी ग्रामीणों को भगवान की अनुमति जरूरी लगी। हाल ही में मंदिर के 597वें पाटोत्सव के दौरान मोरपंख से दो चिट्ठी (चिट्ठियां) लिखी गईं। एक में लिखा- दो मंजिल का मकान बनाने की मंजूरी- है, दूसरे में लिखा- नहीं है। दोनों पातियां उछालकर एक छोटे बच्चे से एक को चुनने को कहा गया। बच्चे ने हां वाली चिट्ठी उठाई। बस, इसी के बाद दो मंजिला घर बनाना तय हुआ।

- मान्यता है कि मार्कडेंय ऋषि ने इस गांव में तप किया था। उनकी प्रतिमा भी है। यहां सात मंजिला वाव (सीढ़ियों वाला कुआं) भी है।