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जमीन की सुरक्षा के लिए एक साथ आए 15 गांव के लोग, समुद्र का रुख मोड़ने की कर रहे तैयारी

भावनगर जिले की तलाजा तहसील, यहां पर ग्रामीणों ने बैलगाड़ी, ट्रैक्टर और जेसीबी तक लगा दिए

Dainik Bhaskar

Apr 08, 2018, 05:03 AM IST
1985 में शुरू हुई  थी योजना 1985 में शुरू हुई थी योजना

भावनगर. गुजरात में समुद्र तटीय क्षेत्र से लगी भूमि को खारेपन से बचाने के लिए 15 गांव के लोग स्वयं ही जुट पड़े हैं। भूमि को क्षार से बचाने के लिए यहां प्रत्येक ग्रामीण श्रमदान कर योगदान दे रहा है। कोई फावड़ा चला रहा है तो किसी ने बैलगाड़ी, ट्रैक्टर और जेसीबी लगा दिए हैं। खास बात ये है कि इसमें महिलाएं और बच्चे भी अपना योगदान दे रहे हैं।

महिलाएं भी फावड़ा चला रही हैं और तगाड़ी से मिट्‌टी ढो रही हैं, ताकि कार्य जल्द से जल्द पूरा हो जाए। यह कवायद एक महीने तक चलने का अनुमान है। ये मामला भूमि अधिग्रहण को लेकर सुर्खियों में रहे भावनगर जिले की तलाजा तहसील के मेथला और समीपवर्ती गांव का है।

81 करोड़ रु. की लागत का अनुमान

सिंचाई विभाग का कहना है कि मेड़ बनाने की योजना के लिए 545 हेक्टेयर सरकारी भूमि है, जबकि 250 हेक्टेयर निजी भूमि है। कुल 1576 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण करनी होगी। योजना में करीब 81 करोड़ रु. की लागत का अनुमान है।

महीनेभर तक चलता रहेगा काम

मेथला गांव के सरपंच घनश्यामभाई बारैया का कहना है कि हम काम में अब कोई अवरोध नहीं चाहते। बावजूद इसके कोई सुनवाई नहीं होती। ऐसे में कुछ आर्थिक दानदाताओं ने हाथ बढ़ाया जिससे हमारा उत्साह बढ़ा। महीने भर यह काम चलेगा।

1985 में शुरू हुई थी योजना

सिचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मेथला में समुद्री पानी की पहुंच और खारेपन को रोकने के लिए साल 1985 में मेड़ बनाने की योजना पर काम शुरू हुआ था। लेकिन अगले ही साल कुछ ग्रामीणों के विरोध करने पर यह ठंडे बस्ते में चला गया। तब से किसी न किसी कारण से ये योजना रफ्तार नहीं पकड़ पाई। योजना के आकार को भी सीमित किया गया ताकि विरोध न बढ़े। वहीं अब किसानों ने ये पहल स्वयं प्रारंभ की है।

इस योजना को पूरा करने के लिए महिलाएं और बच्चे भी हाथ बटा रहे हैं। इस योजना को पूरा करने के लिए महिलाएं और बच्चे भी हाथ बटा रहे हैं।
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1985 में शुरू हुई  थी योजना1985 में शुरू हुई थी योजना
इस योजना को पूरा करने के लिए महिलाएं और बच्चे भी हाथ बटा रहे हैं।इस योजना को पूरा करने के लिए महिलाएं और बच्चे भी हाथ बटा रहे हैं।
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