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दोनों मासूमों की अंत्येष्टि में पूरा शहर उमड़ पड़ा, हर कोई इस मौत से गमगीन

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सांस नली में खुराक फंस जाने से हुई मासूमों की मौत।

Dainik Bhaskar

May 16, 2018, 01:46 PM IST
दोनों मासूमों की अंत्येष्टि में उमड़ा पूरा शहर। दोनों मासूमों की अंत्येष्टि में उमड़ा पूरा शहर।

सूरत। यहां डिंडोली इलाके में करुण और हृदय को कंपकंपा देने वाली घटना सोमवार को हुई। जिसमें दो मासूम खेलते-खेलते एक अनलॉक कार में बैठ गए। फिर उसका दरवाजा लॉक हो गया। दोनों कार में फंस गए। कार के भीतर तेज गर्मी के कारण दोनों की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला है कि उनकी सांस नली में भोजन के कण फंस गए थे, इसलिए दम घुटने से उनकी मौत हो गई। दो मांएं, दर्द एक सा...

इन दोनों मांओं का दर्द एक जैसा है। दोनों ने ही दो दिन पहले अपने-अपने इकलौते चिराग को खोया है। एक व्यक्ति के कार अनलॉक न करने की गलती ने विराज और हेलीश की जान ले ली थी। दोनों मासूम रोज साथ खेलते थे। साथ साइकिल चलाते। दोस्ती ऐसी कि कई बार एक-दूसरे के घर चले जाते। साथ ही नहाते-खाते। पूरी सोसाइटी इनकी तारीफ करती। अब दोनों इस दुनिया में नहीं हैं। मकान संख्या 62 और 67 में रहने वाले दो परिवारों ने इकलौते चिराग खोए हैं, लेकिन 700 परिवारों वाली पूरी मानसी रेजिडेंसी सोमवार से मातम में डूबी है। यह शोक और सन्नाटा चार और पांच साल के दो अजीज दोस्तों विराज (लालू) और हेलीश केे अचानक दुनिया से चले जाने से पसरा है। सोमवार की दोपहर निकले तो थे नमकीन लाने, लेकिन अनलॉक छोड़ दी गई कार देखकर बैठने की इच्छा हो गई। लेकिन उन्हें और परिवार को क्या पता कि दो दिन से खुले में खड़ी कार और अनलॉक छोड़ने की लापरवाही ही उनकी मौत की वजह बन जाएगी।

बेसुध पिता

सोसाइटी से दोनों घरों की तरफ बढ़ते ही लोगों का कलेजा बैठने लगता है। एक के पिता बिना खाए-पिए घंटों से बेसुध पड़े हैं, तो दूसरे के पिता का भी ऐसा ही हाल है। दोनों बच्चों की माताएं आंसू बहा-बहाकर निढाल हो चुकी है। दोनों के माता-पिता का मन तो बार-बार यही कह रहा है कि दोनों बच्चे नमकीन लेकर आते ही होंगे, लेकिन फिर शून्य की ओर निहारने लग जाते हैं। शाम के समय कुर्सियों पर लोग बैठे तो नजर आए, लेकिन कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे। कुछ पड़ोसियों ने दोनों मासूम की दोस्ती यूं बयां की। चार-पांच मकान की दूरी दोनों बच्चों ने पाटकर रख दी थी। जब से छुट्‌टी हुई थी, दोनों एक साथ ज्यादा समय बिताते थे। डॉक्टर मुकेश पाराशर का कहना है कि शरीर में इतना पानी होता है कि 51 डिग्री पर तपती कार में भी चार-पांच साल के मासूम तीन घंटे तक जिंदा रह सकते हैं। यानी आखिरी समय में करीब तीन घंटे तक दोनों तड़पे होंगे।

जली त्वचा के कारण लोगों को हत्या का शक

परिजनों समेत पड़ोसी बच्चों की हत्या की आशंका जता रहे हैं। पड़ोिसयों का आरोप है कि जिस गाड़ी में बच्चों का शव मिला, वह करीब चार बजे खड़ी की गई थी, जबकि बच्चे दोपहर 12 बजे घर से निकले थे। अगर बच्चे कार में बंद थे तो किसी की नजर तो पड़ती। जरूर कोई बच्चे को फिरौती के लिए ले गया था। मामला खुलने के डर से बच्चों की हत्या कर शव कार में रखकर फरार हो गया होगा। जली हुई त्वचा से उन पर एसिड डालने की आशका भी लोग व्यक्त कर रहे हैं।

श्वास नली में खाना फंसने से बंद हुई सांसें

विराज और हेलीश की मौत का सही कारण जानने के लिए स्मीमेर अस्पताल में पोस्टमॉर्टम कराया गया। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर इलियास शेख ने बताया कि दोनों बच्चों ने उल्टी की थी। उनकी श्वास नली में खाना अटका हुआ मिला। श्वास नली में खाना अटकने से सांसें रुक गईं, उसी वक्त घुटन और गर्मी भी काफी थी। प्राथमिक रिपोर्ट में मौत की वजह यही बताई जा रही है। सोसायटी के लोग थाने गए थे, लेकिन पुलिस ने रिपार्ट लिखने से मना कर दिया था।

दर्द का रिश्ता ऐसा

इनमें से कोई विराज और हेलीश की मां नहीं है, लेकिन दु:ख इतना है कि हर कोई रो रहा है, क्योंकि ये किसी की तो मां हैं। डिंडोली की मानसी सोसाइटी की हर महिला अनलॉक कार में हुई दोनों बच्चों की मौत से गहरे सदमे में दिखी। हर किसी की आंख में आंसू थे। इन मांओं की चीखें मौत के मातम के सन्नाटे को चीरती हुई हर किसी के दिल में हूक उठा रही थीं।

...और साथ ही निकली अर्थी

मानसी रेजीडेंसी से दोनों बच्चों विराज और हेलीश की अर्थी भी साथ निकली। अर्थी के साथ चल रहे 500 से ज्यादा लोग गमगीन थे। दोनों की अंतिम यात्रा जिधर से गुजरी देखने वाले लोग भी आंखों से आंसू नहीं रोक पाए।

मां की व्यथा

हेलीश और विराज में गहरी दोस्ती थी। दोनों हमेशा साथ ही रहते थे। साथ ही खेलते थे, साथ ही खाते थे। यहां तक कि दोनों साथ नहाते भी थे। हादसे के दिन भी दोनों साथ दुकान पर नमकीन लाने किराने की दुकान पर गए थे। दोनों हर शाम साथ साइकिल भी चलाते थे। दोनों को कार से घूमने का बहुत शौक था। ऐसा लगता था कि दोनों एक ही घर में रहते हैं। चार-पांच मकान की दूरी उन्होंने पाटकर रख दी थी। जबसे स्कूल की छुट्‌टी हुई थी, दोनों एक ही घर में ज्यादा समय बिताते थे। मैं दोनों के लिए खाना भी पकाती थी। पिछले चार-पांच महीने से मुझे किसी अनहोनी की आशंका हो रही थी। घबराहट सी होती थी। सोशल मीडिया पर मैसेज चल रहे थे कि बच्चों का अपहरण करने वाली गैंग सक्रिय है। भेस्तान में कुछ बच्चों का अपहरण भी हुआ था, इसलिए मुझे डर लगता था। मुझे क्या पता था कि हमारे दोनों बच्चों के साथ भी ऐसा हो जाएगा। किसी पर शंका नहीं, लेकिन ऐसा लग रहा है कि जैसे बच्चों के साथ किसी ने कुछ अनहोनी कर दी हो। ऐसा इसलिए कि जहां पर कार खड़ी थी, वहां आस-पास के सभी घर बंद थे। हो सकता है कि किसी ने बच्चों को उन घरों में बंद करके रखा हो और बाद में कार में डाल दिया।

जेनी रूपावाला

मुझे पता नहीं कार कैसे लॉक होती है, मैं अभी सीख रहा हूं

गाड़ी मेरी नहीं है। मैंने अपने दोस्त प्रवीण पटेल से सीखने के लिए ली थी। रविवार की दोपहर मैं प्रवीण के साथ कार में डीजल भरवाकर अपने घर मानसी रेजीडेंसी पहुंचा था। गाड़ी प्रवीण ही चलाकर लाया था। वह अपने घर चला गया। रात भर कार मेरे घर के पास ही खड़ी रही। मैं एक निजी कंपनी में अभियंता हूं। रोज सुबह 9 बजे मुझे काम पर जाना होता है। मैं अपने काम पर चला गया। दिन भर मुझे कुछ पता नहीं चला। शाम को घर लौटने पर इस हादसे के बारे में पता चला। मैंने पहले कभी कार नहीं चलाई। मुझे कार की तकनीकी के बारे मेें ज्याादा जानकारी नहीं है। मुझे यह भी नहीं मालूम कि कार में इस तरह से लॉक भी लगता है। मुझे यह भी याद नहीं कि कार के दरवाजे को मेरे दोस्त प्रवीण ने लॉक लगाया था या नहीं, क्योंकि कार वही चलाकर लाया था। घर आने के बाद जब मुझे इस हादसे के बारे से पता चला तो मैं बहुत दु:खी हुआ। मुझे लगा कि एक छोटी सी लापरवाही से दो मासूम बच्चों की जान चली गई। काश ऐसा न हुआ होता। अगर मैं गाड़ी चलाता होता और मुझे मालूम होता कि कार को अनलॉक छोड़ने से ऐसा हादसा हो सकता है तो कभी नहीं करता।

जयेंद्र ठाकोरभाई

दुकानदार ने घर जाने को कहा था

सोमवार दोपहर 12 बजे दोनों बच्चे सोसाइटी के अंदर ही थोड़ी दूरी पर ही दुकान पर सेव-चिप्स लेने गए थे। दुकानदार के अनुसार उन्हें सेव देकर घर जाने को कहा था। बाद में दोनों बच्चे कार में बंद मिले। एफएसएल की टीम के अनुसार हो सकता है बच्चों के कार के अंदर चले जाने के बाद किसी हरकत से गाड़ी का सेंट्रलाइज लॉक ( चाइल्ड लॉक) ऑन हो गया हो और बच्चे अंदर ही फंस गए हों।

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दो मांएं दर्द एक दो मांएं दर्द एक
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