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आज का सूरत देखकर नहीं लगता कि मैं इंडिया में हूं-रतन टाटा

ब्रिटीश सिमेट्री, एंड्रुस लायब्रेरी, होपपुल, पारसी पंचायत, पारसी अगियारी, सर जे जे स्कूल तथा किले का भी भ्रमण किया।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - May 04, 2018, 12:47 PM IST

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    सूरत शहर के इंफ्रास्टक्चर और उद्योगों के विकास को देखकर रतन टाटा को अचरज हुआ।

    सूरत। सूरत की हीरा कंपनी द्वारा प्रदान किए गए संतोकबा अवार्ड पर आभार व्यक्त करते हुए गुरुवार को शहर में आए टाटा समूह के चेयरमेन रतन टाटा ने कहा कि इस शहर को देखकर नहीं लगता कि मैं इंडिया में हूं। उनके साथ लगतार 5 घंटे तक रहे गोविंद ढोलकिया ने अपने अनुभव भास्कर के साथ शेयर किए। सूरत का विकास देखकर रतन जी को अचरज लगा…

    ढोलकिया ने बताया कि 6 महीने पहले जब रतन टाटा को संतोकबा अवार्ड दिया गया, तब उन्होंने कहा था कि मैं ऐसे समारोह में शिरकत नहीं करता तब हमने यह तय किया कि हम मुम्बई जाकर उन्हें सम्मानित करेंगे। तब उन्होंने वादा किया कि मैं सूरत आऊंगा। किंतु केवल आपके परिवार से मिलने ही आऊंगा। तब उन्होंने 3 मई की तारीख दी। इसके बाद उन्होंने कहा कि किसी प्रकार की सिक्योरिटी की व्यवस्था मत करना। आप खुद ही मुझे एयरपोर्ट पर लेने आ जाना। पर किसी को पता नहीं चलना चाहिए।

    परिवार और अन्य कई लोगों से बातचीत की

    गुरुवार की सुबह 11 बजे वे अपने प्राइवेट प्लेन से सूरत एयरपोर्ट पर आए, उन्हें लेकर मैं डायमंड फैक्टरी, किरण हॉस्पिटल समेत शहर के कई स्थानों पर ले गया। फिर उन्हें अपने घर ले गया। हमने साथ-साथ लंच लिया। फिर उन्होंने मेरे परिवार के कई सदस्यों से बातचीत की।

    परिवार के सदस्य की पेंशन नहीं होती, तो समस्या होती है

    परिवार वालों ने जब उनसे यह पूछा कि क्या परिवार द्वारा चलाने वाला बिजनेस सही है या प्राेफेशनल तरीके से चलाने वाला? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि फेमिली द्वारा चलाया जाने वाला बिजनेस कई बार एकाध सदस्य को जो पेंशन न मिले, तो समस्या हो सकती है।

    20 साल पहले सूरत आया था

    सूरत के संबंध में बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं 20 साल नवसारी जाने के लिए सूरत एयरपोर्ट पर उतरा था। इसके बाद तब के और आज के सूरत में काफी परिवर्तन आ गया है। डायमंड उद्योग में टेक्नालॉजी और शहर का काफी विकास हुआ है। मुम्बई में बैठे-बैठे कभी पता ही नहीं चलता कि सूरत का इतना विकास हो गया है। ऐसा विकास भारत में संभव है। आज के सूरत को देखकर नहीं लगता कि मैं इंडिया में हूं।

    पारसी कम्युनिटी के लोगों से भी भेंट की

    सूरत में काफी कम समय मे उन्होंने ब्रिटीश सिमेट्री, एंड्रुस लायब्रेरी, होपपुल, पारसी पंचायत, पारसी अगियारी, सर जे जे स्कूल तथा किले का भी भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने पारसी कम्युनिटी के लोगों से मुलाकात कर बातचीत की।

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    परिवार के कई सदस्यों के साथ बातचीत की।
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    परिवार के सदस्य को पेंशन न मिले, तो समस्या हो सकती है।
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    20 साल पहले सूरत आया था।
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    पारसी कम्युनिटी के लोगों से मुलाकात की।
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