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कार के अंदर फंस जाने से बुझ गए दो परिवार के चिराग

कार के पास जब कुत्ते भौंकने लगे, तब लोगों को शक हुआ,फिर सबने मिलकर कार का कांच तोड़ा।

Danik Bhaskar | May 15, 2018, 04:16 PM IST

सूरत। डिंडोली की मानसी रेसीडेंसी में घर से सेव-मुरमुरा खरीदने के लिए निकले दो मासूम रहस्यमय तरीके से लापता हो गए। बाद में दोनों की लाश सोसायटी में ही पार्क की गई कार में झुलझी हुई हालत में मिली। दोनों के शरीर पर फफोले पड़ गए थे। मौत का कारण दम घुटना हो सकती है। कार का टेम्परेचर काफी बढ़ गया था…

मानसी रेसीडेंसी में रहने वाले निखिल जरीवाला एम्ब्रॉयडरी का काम करते हैं। उनका 5 साल का बेटा विराज और पड़ोस में रहने वाले महेश भाई रुपावाला का 4 साल का बेटा हेलीश खेलते-खेलते पडाेस की अनलॉक कार में घुस गए। इसके बाद कार लॉक हो गई। दोनों बच्चे वहीं फंस गए। इस बीच कार के भीतर का तापमान बढ़ने लगा। अंदर दोनों बच्चों का दम घुटने लगा। कार का टेम्परेचर 51 डिग्री सेल्सियस तक हो गया। इससे बच्चे अंदर बुरी तरह से झुलस गए और उनकी मौत हो गई।

घटनाक्रम इस प्रकार रहा

डेढ़ बजे से परिजन और सोसाइटी के लोग बच्चों को तलाश रहे थे। पुलिस को भी सूचना दे दी थी। शाम 7 बजे कार के पास कुत्तों के भौंकने पर पता चला कि दोनों कार के अंदर हैं और कार लॉक हैं। कांच तोड़कर दोनों को अस्पताल ले गए, जहां दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। दोनों की चमड़ी झुलस गई थी, फफोले पड़ चुके थे। मानसी रेसीडेंसी के मकान नंबर 67 में रहने वाले निखिल जरीवाला ने 4 वर्षीय विराज और मकान नंबर 62 के महेश रुपावाला ने 5 वर्षीय हेलीश को इस घटना में खो दिया। विराज जूनियर केजी में और हेलीश सीनियर केजी में पढ़ता था ।

लॉक होने से कार के भीतर की गर्मी 51 डिग्री तक हो गई...

डीसीपी राकेश बारोट ने बताया कि कार रविवार सुबह से मानसी रेजिडेंसी में खड़ी थी, जो शायद अनलॉक थी। बच्चे खेलते-खेलते कार में चले गए और उनसे अंदर से लॉक हो गई। गर्मी, उमस और सांस नहीं ले पाने के कारण बच्चों ने दम तोड़ दिया।

बच्चों को देखकर लगा जैसे तंदूर में जल गए हैं

मैं भी मानसी रेसीडेंसी में ही रहता हूं। बच्चों के लापता होने से पूरी सोसायटी परेशान थी। हर कोई एक-एक गली में जाकर दोनों को तलाश रहा था, जैसे खुद के बच्चे खो गए हों। शाम 7 बजे के करीब कार के पास कुत्तों को भौंकता देख कुछ बच्चे वहां गए तो अंदर दो बच्चे दिखे। उन बच्चों ने इसकी जानकारी मुझे दी। वहां जाकर देखा तो वाकई में दोनों बच्चे कार में थे। एक पल सुकून महसूस हुआ, लेकिन फिर अनहोनी की आशंका हुई। तत्काल दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन नहीं खुला। पत्थर से लेफ्ट साइड का कांच तोड़कर दोनों बच्चों को बाहर निकाला। शरीर देखकर लगा जैसे तंदूर में जल गए हैं। उन्हें तत्काल अस्पताल ले गए, लेकिन देर हो चुकी थी।

जब बच्चों को लाया गया, तब वे ब्रोट डेड थे

दोनों बच्चों को हमारे अस्पताल में लाया गया, तब वे ब्रोट डेड थे। उनका शरीर बुरी तरह से झुलसा हुआ था। मौत के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। वह तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही पता चलेगा। पर उनकी मौत दम घुटने से ही हुई होगी, इसकी पूरी संभावना है। डॉ. अभिषेक यादव, बाबा मेमाेरियल हॉस्पिटल डिंडोली।

कुत्ते भौंकने लगे, तब ध्यान गया

सोसायटी के पास कुत्ते भौंक रहे थे, तब ध्यान गया कि हो सकता है बच्चे कार के अंदर हों। कांच से देखा तो अंदर दोनों बच्चे बेहोश पड़े थे। इससे कार का कांच तोड़कर दोनों को बाहर निकाला गया। तेज गर्मी के कारण उनका शरीर झुलस गया था, शरीर पर फफोले पड़ गए थे। संतोष बारिया, स्थानीय निवासी।

बंद कार में ग्रीन हाऊस इफेक्ट

बंद कार में कांच से सूर्यप्रकाश प्रवेश करता है और गर्मी पैदा करता है। परंतु गर्मी फिर बाहर नहीं जा पाती। इसे ग्रीन हाऊस इफेक्ट कहते हैं। 37 डिग्री में पार्क की गई कार का तापमान एक घंटे में 51 डिग्री सेल्सियस हो जाता है। डाॅ. पृथुल देसाई, प्रोफेसर फिजिक्स।

5 साल का विराज 5 साल का विराज
चार साल का हेलीश चार साल का हेलीश
विराज की बिलखती मां विराज की बिलखती मां
हेलीश की मां की हालत। हेलीश की मां की हालत।
बच्चों को कार से बाहर निकालते हुए लोग। बच्चों को कार से बाहर निकालते हुए लोग।
कार जिसमें बच्चों की मौत हो गई। कार जिसमें बच्चों की मौत हो गई।
घटनास्थल पर पुलिस। घटनास्थल पर पुलिस।

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