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दोनों हाथ से अपंग मरीज जिस पड़ोसी से लड़ता था, उसी की मां ने रात-दिन सेवा की, डिस्चार्ज होने तक बेटे की तरह नहलाती-खिलाती रही

Bhaskar News

Apr 15, 2019, 01:06 PM IST

गुजरात न्यूज: अपने हुए बेगाने: सगों ने साथ छोड़ा, लेकिन अनजान ने अपनाया

Surat Gujarat News in Hindi Positive story of woman
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सूरत (गुजरात)। अस्पताल में मरीजों के बीच में झगड़ा होना आम है। कई दिन साथ एडमिट होने की वजह से छाेटी-छाेटी बात पर विवाद हाे जाता है। लेकिन, ऐसा कम हाेता है कि किसी अनजान मरीज की देखभाल दूसरे मरीज के परिजन करते हाें। ऐसा ही एक मामला स्मीमेर अस्पताल में देखने को मिला। जहां ऑर्थो वार्ड में एडमिट एक अपंग मरीज के पास में एडमिट मरीज के साथ आए दिन झगड़ा हाेता था, लेकिन बाद में दाेनाें में इतना प्रेम हुआ कि दूसरे मरीज की मां ने अपने बेटे की तरह उसकी देखभाल की। दाेनाें हाथ से अपंग मरीज काे नहलाने से लेकर खिलाने तक की सेवा दूसरे मरीज की मां ने किया।

समाजसेवी सुभाष रावल की वजह से मां ने की सेवा


कालीचरण के रहन-सहन और व्यवहार से परेशान अर्जुन का अक्सर उससे झगड़ा होता था। क्याेंकि कालीचरण का एक हाथ नहीं था और दूसरा टूटा था। डॉक्टर ने इसकी जानकारी समाज सेवी सुभाष रावल को दी। सुभाष रोजाना उसे नहलाने खिलाने जैसे काम करने आते थे। इसी को देख अर्जुन की मां भी मानवता की सीख ली और अर्जुन की तरह ही कालीचरण की सेवा करने लगी।

अपने हुए बेगाने: रिश्ते के मामा ने साथ छाेड़ा, लेकिन अनजान ने अपनाया


उड़ीसा के सापुआपल्ली के आश्का थाना निवासी 25 वर्षीय कालीचरण गोरहरी का एक हाथ पहले से ही कटा था। परिवार में और कोई नहीं था, इसलिए दूर के मामा ने सूरत बुला लिया, लेकिन कुछ दिन बाद उसने निकाल दिया। किसी डायिंग-पेंटिंग कारखाने में काम कर रहा था। लगभग दो माह पहले रेलवे स्टेशन के पास उसका एक्सिडेंट हो गया, जिसमें उसका दूसरा हाथ भी कई जगह से टूट गया। जैसे-तैसे स्मीमेर अस्पताल आया। ऑर्थो वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। जहां उसी के बगल वाले बेड पर अर्जुन नामक एक युवक एडमिट था, जो तीन माह से भर्ती था। उसका पैर टूटा था।

दूसरे की सेवा देख बेटे की तरह करने लगी देखभाल


अर्जुन की मां शांति ने बताया कि पहले वह सोचती थी कि कालीचरण गंदा लड़का है, लेकिन सुभाष उसकी सेवा करने आते थे। मुझे लगा कि जब वह कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं। मैं तो अपने बेटे के लिए यहां रहती हूं तो कालीचरण की भी सेवा भी कर देती हूं। अस्पताल में भी परेशान और दुखी होते हैं। ऐसे में थोड़ी सी भी मदद मिलने से लोग खुश हो जाते हैं। मैंने तब से उसकी मदद करना शुरू किया।

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