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ये है विश्व का सबसे छोटा एक CM का पौधा, कई गुणों से है भरपूर; बनाई जाएंगी कई भीषण बीमारियों की दवाएं

अहवा के जंगलों में मिले फर्न प्रजाति के इस पौधे के चिकित्सकीय गुणों पर वीर नर्मद यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक कर रहे शोध

Bhaskar News | Last Modified - May 14, 2018, 08:35 AM IST

  • ये है विश्व का सबसे छोटा एक CM का पौधा, कई गुणों से है भरपूर; बनाई जाएंगी कई भीषण बीमारियों की दवाएं
    फर्न प्रजाति का यह पौधा दुर्लभ है। यह नाखून के बराबर का होता है।

    सूरत.विश्व के सबसे छोटे पौधे ओफियोग्लोस्सम माल्लवे को डांग से खोजने के बाद अब वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी के बापालाल वैद्य बायो टेक्निकल रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक डॉ. एमएन रेड्‌डी और मीतेश पटेल इससे चिकित्सकीय गुणों का पता लगाने में जुट गए हैं। इस पौधे में एंटी माक्रोबियल लक्षण पाए गए हैं। इससे उम्मीद जगी है कि इस पौधे से विभिन्न बीमारियों के लिए दवाएं बनाई जा सकती हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का पौधा है। इससे पहले विश्व में इस पौधे की प्रजाति फर्न के 45 पौधे खोजे जा चुके हैं। गुजरात से खोजा गया पौधा फर्न प्रजाति का 46वां पौधा है। शोध टीम में शामिल पीएचडी के विद्यार्थी मीतेश पटेल कहा कि यह एक दुर्लभ प्रजाति का पौधा है, जो मुश्किल से दिखता है।

    डीएनए जांच से पता चला यह फर्न प्रजाति का पौधा

    - मीतेश पटेल ने बताया कि वह 2016 से गुजरात के जंगली इलाकों में घूमकर पौधों की प्रजाति पर शोध कर रहे हैं।

    - इस दौरान उन्होंने करीब 400 पौधों को इकट्ठा किया। इसी दौरान उन्हें डांग जिले में अहवा के जंगलों में एक पौधे की जड़ें निकालने के दौरान यह पौधा दिखा।

    - डीएनए जांच में पता चला कि यह फर्न प्रजाति का 46वां पौधा है।

    दुर्लभ: एक सेंटीमीटर का यह पौधा बड़ी मुश्किल से दिखाई पड़ता है

    - ओफियोग्लोस्सम माल्लवे एडर टंग समूह के पौधों का हिस्सा है। यह नाखून के आकार के उस समूह से संबंधित है जिसे सांप की जीभ के समान होने के कारण एडर-टंग फर्न कहा जाता है।

    - इसका आकार केवल एक सेंटीमीटर होता है। इसके बीज (जिसे बीजाणु कहा जाता है) में अद्वितीय मोटी बाहरी परत होती है, जो इसकी समान प्रजातियों में मौजूद नहीं होती है।

    - यह न केवल आकार में बल्कि अन्य जटिल फर्न की समान प्रजातियों से अलग भी है।

    - यह इतना छोटा होता है कि इसे ढूंढना काफी मुश्किल होता है। मानसून में पनपने वाला यह पौधा बहुत ही कम संख्या में पाया जाता है। डांग जिले के अहवा के जंगलों से इसके 12 पौधे ढूंढ़े गए थे।

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